पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता काजी रशीद मसूद का निधन

सहारनपुर। कद्दावर राजनेता काजी रशीद मसूद का निधन हो गया है। कई बीमारियों से जूझ रहे 73 साल के रशीद मसूद का रुड़की में इलाज चल रहा था। सोमवार सुबह 10 बजे के करीब उनका निधन हो गया। उनकी गिनती पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कद्दावर राजनेताओं में होती थी।
पांच दशकों के सियासी सफर में वह वीपी सिंह से लेकर मुलायम सिंह यादव के हमसफर रहे। वहीं, 2012 में वह कांग्रेस में भी शामिल हुए थे।
रशीद मसूद कुल नौ बार संसद के सदस्य रहे। अपने लंबे राजनैतिक करियर में लोकसभा के साथ ही राज्यसभा के लिए भी वह निर्वाचित हुए थे। सोमवार को रुड़की के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो जाने से समर्थकों में गम की लहर दौड़ गई। रशीद मसूद हार्ट और किडनी जैसी कई बीमारियों से जूझ रहे थे। पैतृक निवास गंगोह में उन्हें सपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। 1989 में केंद्र में वीपी सिंह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार में वह स्वास्थ्य मंत्री रहे थे।
रशीद मसूद पहले से ही हृदय और किडनी की बीमारियों से पीड़ित थे। पिछले दिनों कोरोना पॉजिटिव होने की वजह से इलाज के लिए दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया था। हाल ही में कोरोना से ठीक होने के बाद रशीद मसूद की दो दिन पहले तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें रुड़की स्थित अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। उनके निधन पर समर्थकों में शोक की लहर है और सियासी पार्टियों से शोक संवेदनाएं आ रही हैं।
1977 में शुरू की थी सियासत
रशीद मसूद पांच बार लोकसभा सदस्य होने के साथ ही चार बार राज्यसभा के लिए भी निर्वाचित हुए। 2012 में यूपी विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा भेजा। साथ ही केंद्रीय मंत्री का दर्जा देते हुए एपीडा का चेयरमैन बनाया था। उन्होंने पहला लोकसभा चुनाव इमरजेंसी के तुरंत बाद 1977 में लड़ा था। वह जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे और जीत हासिल की।
वीपी सिंह से मुलायम तक सबके साथी
इसके बाद वह जनता पार्टी (सेक्युलर) में शामिल हो गए। 1989 का चुनाव उन्होंने जनता दल से लड़ा और फिर जीत दर्ज की। इस दौरान वह 1990 और 91 में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री भी रहे। 1994 में वह मुलायम के करीब आए और समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। बाद में 1996 में उन्होंने इंडियन एकता पार्टी बनाई। 2003 में एक बार फिर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। 2004 में उन्होंने एसपी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा और जीते।
एमबीबीएस एडमिशन धांधली में भेजे गए थे जेल
2012 यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वह कांग्रेस में आ गए। बतौर स्वास्थ्य मंत्री के कार्यकाल में उन पर गड़बड़ी का आरोप लगा था। एमबीबीएस एडमिशन धांधली के मामले में सजा होने पर जेल गए और राज्यसभा की सदस्यता भी खोनी पड़ी थी। वहीं 1996, 1998, 99 और 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का भी सामना करना पड़ा।
-एजेंसियां

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