Faculty Development प्रोग्राम GL बजाज में शुरू

मथुरा। डा. APJ अब्दुल कलाम टेक्नीकल यूनिवर्सिटी का Faculty Development प्रोग्राम GL बजाज में आज शुरू हुआ। साइंस एंड इंजीनियरिंग के शिक्षकों का यह 5 दिवसीय कम्प्यूटर ‘फाॅर्मल मैथड एंड फाॅर्मल लैग्वेज‘ विषयक कार्यक्रम है। यूनिवर्सिटी आफ देहली के ओपन लर्निंग कैम्पस के विशेष कार्याधिकारी और मुख्य वक्ता डा. उमा शंकर पांडेय का स्वागत संस्थान के निदेशक डा. एलके त्यागी ने वेलकम स्पीच के साथ और काॅआडीनेटर अंकुर सक्सेना ने बुके भेंटकर किया। डा. पांडेय ने एकेटीयू के विभिन्न कालेजों को फैकेल्टी को विषय वस्तु पर जानकारी देते हुए इंटरनेट आफ थिंग्स के मेडीकल साइंस, शिक्षण, स्वास्थ्य समेत अन्य क्षेत्रों में हो रहे उपयोग की विशेष जानकारी दी।

-डा. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नीकल यूनिवर्सिटी के ‘फाॅर्मल मैथड एंड फाॅर्मल लैग्वेज‘ विषय पर आयोजित पांच दिवसीय कार्यक्रम विवि के कई कालेजों के शिक्षक कर रहे प्रतिभाग
-यूनिवर्सिटी आफ देहली के ओपन लर्निंग कैम्पस के विशेष कार्याधिकारी और मुख्य वक्ता डा. उमा शंकर पांडेय ने कहा-आइओटी मेडिकल साइंस, क्वालिटी एजूकेशन, भवनों और पुलों की सुरक्षा में सहायक
– आरके एजुकेशनल हब के चैयरमेन डा. रामकिशोर अग्रवाल, वाइस चैयरमेन पंकज अग्रवाल और एमडी मनोज अग्रवाल ने कहा कि इंटरनेट आफ थिंग्स में कॅरियर की काफी संभावना

जीएल बजाज मेें आयोजित Faculty Development प्रोग्राम के एक्सपर्ट सिस्टम, ई-गर्वनेस, क्लाउड कम्प्यूटिंग और ग्रिड कम्प्यूटिंग समेत कई क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल डा. उमा शंकर पांडेय ने प्रथम सत्र में ‘फाॅर्मल मैथड एंड फाॅर्मल लैग्वेज‘ विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि आईओटी यानी कि इंटरनेट आफ थिंग्स युवाओं के लिए विशेष तौर पर उपयोगी है। इससे हमें विभिन्न क्षेत्रों में कार्य की एक्यूरेसी मिलती है। इसका क्षेत्र बहुत ही विस्तृत है। आईओटी ने मेडिकल साइंस, क्वालिटी एजूकेशन, भवनों और पुलों की सुरक्षा, मरीजों की विभिन्न गतिविधियों की निगरानी और एअरपोर्ट जैसे सार्वजनिक स्थानों पर यात्रियों की सुरक्षा संबंधी जांचों को बहुत आसान बना दिया है।
संस्थान के निदेशक डा. एलके त्यागी ने दूसरे सत्र में फैकल्टीज को संबोधित करते हुए कहा कि ‘फाॅर्मल मैथड एंड फाॅर्मल लैग्वेज‘ के अनुसार हर शिक्षक को शिक्षण करते समय औपचारिक तरीकों और भाषा का उपयोग प्रभावी शिक्षण करने के लिए करना चाहिए। इससे शिक्षण के बाद छात्र-छात्राओं में बेहतरीन परिणाम सामने आ सकेंंगेे।

उन्होंने बताया कि Faculty Development कार्यक्रम में बीएसए इंजीनियरिंग कालेज, मथुरा, संस्कृति विवि, संजय इन्स्टीट्यूट आफ मैनेजमेण्ट, मथुरा, नोयडा इन्टरनेशनल यूनिवर्सिटी, नोयडा, राजीव एकेडमी फोर टेक्नोलाॅजी एंड मैनेजमेंट समेत अन्य कालेजों की फैकल्टीज प्रतिभाग कर रही हैं। कार्यक्रम के काॅआडीनेटर अंकुर सक्सेना और को-आडीनेटर डा. रमाकान्त एवं संजीव अग्रवाल रहे।
आरके एजुकेशनल हब के चैयरमेन डा. रामकिशोर अग्रवाल, वाइस चैयरमेन पंकज अग्रवाल और एमडी मनोज अग्रवाल ने कहा कि विदेशों में इंटरनेट आफ थिंग्स का काफी उपयोग किया जा रहा है। वहां अपने कार्यालय में बैठा व्यक्ति अपने घर और बच्चों के हालचाल जान लेता है। भारत में ये तकनीक अब तेजी से स्थान बना रही है। इससे कम्प्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के छात्रों का भविष्य काफी उज्ज्वल माना जा सकता है।

हाथ पर बंधा टेटबिक बता देता है मरीज की हालत
यूनिवर्सिटी आफ देहली के ओपन लर्निंग कैम्पस के विशेष कार्याधिकारी और मुख्य वक्ता डा. उमा शंकर पांडेय ने विशेष वार्ता के दौरान बताया कि इंटरनेट आफ थिंग्स की बदौलत बने हाथ पर बांधी जाने वाली टेटबिक घडीनुमा यंत्र से मरीजों पर निगरानी रखी जा सकती है। इस घडी से मरीज के टहलने पर व्यय हुई उर्जा, सोने पर हल्की और गहरी नींद का समय, धडकन, ब्लड प्रेशर आदि की जानकारी रखी जा सकती है।

ये तकनीक ब्रिजों, एअरपोर्टाें आदि सुरक्षा करने में भी सक्षम
डा. उमा शंकर पांडेय ने बताया कि यदि बायोमेट्रिक अटेंडेंस को इंटरनेट आफ थिंग्स से जोड दिया जाए तो संस्थानों में आने वाले फैकल्टीज, स्टूडेंटस, कर्मचारी आदि की काफी अन्य जानकारियां एकत्र की जा सकती हैं। वैसे ही देश के ब्रिजों, पुलों, एअरपोर्ट, बस अड्डा शिक्षण संस्थानों के संेसरों को इंटरनेट आफ थिंग्स से जोड देने पर सुरक्षा संबंधी जो जांच काफी समय में मैनुअली की जाती है, उसे कुछ ही मिनटों में पूरा किया जा सकता है। जो अब भी विदेशों में इसी तरीके से सुरक्षा जांच का काम इंटरनेट आफ थिंग्स द्वारा किया जा रहा है।
फोटो परिचय: जीएल बजाज में आयोजित कार्यक्रम में फैकल्टीज को मुख्य अतिथि डा. उमा शंकर पांडेय व्याख्यान देते हुए। अन्य फोटो में सामने बैठे विभिन्न कालेजों से आए फैकल्टीज।

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