नेपाल में Lashkar का नया पैंतरा, NGO बनाकर कर रहा आतंकियों की भर्ती

नई दिल्ली। भारत को अशांत करने के लिए आतंकवादी संगठन Lashkar E Taiba ने नेपाल को अपना नया ठिकाना बना लिया है। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक लश्कर ए तैयबा ने नेपाल में अपना बेस बना लिया है। सूत्रों का कहना है कि इस काम में पाकिस्तान हाईकमीशन Lashkar की मदद कर रहा है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई आतंकियों की बहाली में भी मदद कर रहा है।

सूत्रों का कहना है कि आईएसआई ने एनजीओ बनाया है, जिसकी मदद से Lashkarसहित अन्य आतंकी संगठनों के लिए आतंकवादी बनाने के लिए युवाओं का सलेक्शन किया जाता है।

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई आतंकियों की बहाली में भी मदद कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि आईएसआई ने एनजीओ बनाया है, जिसकी मदद से लश्कर सहित अन्य आतंकी संगठनों के लिए आतंकवादी बनाने के लिए युवाओं का सलेक्शन किया जाता है।

खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि नेपाल के मोरंग जिले के विराट नगर में ISI की मदद से लश्कर ने बड़ा बेस कैंप तैयार कर लिया है. बताया जा रहा है कि यहां लश्कर नेपाली लोगों को भी बरगला कर आतंकी बना रहा है। माना जा रहा है कि भारत में वारदात को अंजाम देने के लिए आतंकी बनाए गए नेपाली लोगों की मदद ली जा सकती है।

ये भी माना जा रहा है कि लश्कर ए तैयबा ने भारत के हरियाणा के कुछ हिस्सों में युवाओं को बरगलाने के लिए पैसे खर्च किए हैं. हरियाणा में लश्कर ने मोटी फंडिंग की है।

हालांकि दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग (डीएमसी) की एक तथ्यान्वेषी कमेटी ने कहा है कि हरियाणा में टेरर फंडिंग के कोई सबूत नहीं मिले हैं। खबर आई थी कि आतंकवादी संगठन के धन का इस्तेमाल हरियाणा के पलवल में मस्जिद बनाने के लिए किया गया। आयोग ने बुधवार को इस सिलसिले में अपनी एक रिपोर्ट जारी की।

मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं आयोग के सलाहकार ओवैस सुल्तान नीत चार सदस्यीय समिति का गठन मीडिया में आई उन खबरों पर गौर करने के लिए किया गया था, जिनमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अनाम सूत्रों के हवाले से दावा किया गया था कि पाकिस्तान आधारित आतंकवादी हाफिज सईद के फलाह ए इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ) से आए धन का इस्तेमाल मस्जिद के निर्माण में किया गया होगा।

ओवैस ने कहा, ‘कमेटी को ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है जिससे यह कहा जा सके कि पलवल के उत्तवार में खुलफा ए राशिदीन मस्जिद के निर्माण के लिए आतंकवादियों से धन मिला था।’ गौरतलब है कि मीडिया में आई खबरों में एनआईए के अनाम सूत्रों ने यह आरोप लगाया था। कमेटी ने उस गांव का 20 अक्टूबर को दौरा किया, जहां यह मस्जिद बनाई गई है।

एनआईए ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा के मुखौटा संगठन फलाह ए इंसानियत फाउंडेशन से जुड़े आतंकी मॉड्यूल की जांच के लिए जुलाई में एक मामला दर्ज किया था। प्राथमिकी के मुताबिक दिल्ली में रह रहे कुछ लोगों को इस संगठन के विदेश स्थित सदस्यों से धन प्राप्त हो रहा है और उसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों में हो रहा है।

ओवैस ने कहा कि यह मस्जिद तबलीगी जमात से संबद्ध है जबकि लश्कर ए तैयबा और एफआईएफ सलाफी विचारधारा से संबद्ध है। ये दोनों एक दूसरे की शिक्षाओं और परंपराओं से सहमति नहीं रखते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह उनके बीच तालमेल होने का या मस्जिद के लिए धन दिए जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता है।

-एजेंसी

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