हथिनी कुंड से लाखों क्यूसेक पानी छोड़ा, आज दिखाई देगा असर

नई दिल्‍ली। हथिनी कुंड से लगातार लाखों क्यूसेक पानी छोड़ने का असर आज दिखाई देगा। एहतियात के तौर पर दिल्ली सरकार ने यमुना के किनारे बसे उस्मानपुर, पुश्ते के आसपास रहने वाले लोगों को खाली करा दिया है। काफी लोग अभी भी यमुना के किनारे बसे हुए हैं। प्रशासन की ओर से लगातार लोगों को हटाने के लिए चेतावनी जारी की जा रही है। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए गोताखोरों और बोटों को तैनात कर दिया गया है। यमुना के किनारे बसे लोगों को बाहर निकालकर टेंटों में ले जाया जा रहा है।
ताजेवाला हैड वर्क्स से यमुना में छोड़ा गया पानी 72 घंटे बाद फरीदाबाद में आता है। यमुना में अभी करीब 52 हजार क्यूसिक पानी चल रहा है। ताजेवाला से छोड़ा गया करीब साढे़ 8 लाख क्यूसिक पानी आने के बाद यमुना किनारे बसे गांवों में बाढ़ की संभावना और बढ़ जाएगी। यमुना के बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए एहतियातन 24 गांवों को अलर्ट कर दिया गया है। जिले में बाढ़ से निपटने के लिए पर्याप्त मात्रा में बाढ़ बचाव उपकरण है। इनमें एल्यूमिनियस की 7 बोट्स, 39 लाइफ जैकेट्स, 2 ओबीएम, एक ट्रेलर,19 चप्पू, 18 कुण्डे, दो रस्से तथा एक इमरजेंसी लाइट के अलावा रेत से भरे 25 हजार कट्टे तैयार किए गए हैं।
उधर रविवार शाम 6 बजे यमुना का लेवल 205.51 मीटर तक पहुंच गया था, जबकि खतरे का निशान 204.83 मीटर है। शनिवार की तरह रविवार को भी लगातार हथिनी कुंड बैराज से पानी छोड़ने का सिलसिला जारी रहा। बैराज से सुबह 253739 क्यूसेक, फिर 241656 क्यूसेक, दोपहर में 118441क्यूसेक, शाम को 110298 क्यूसेक पानी छोड़ा। पानी छोड़ने का यह सिलसिला लगातार देर रात तक जारी रहा। बाढ़ के पानी को निकालने के लिए वजीराबाद, आईटीओ और ओखला बैराज के गेट खोल दिए गए हैं।
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने रविवार को शहर के निचले इलाकों से लोगों को निकालने के काम का जायजा लिया। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस संबंध में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपात बैठक भी की। दिल्ली सरकार के अधिकारी ने बताया कि यमुना के खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बाद सेना और एनडीआरएफ से भी मदद मांगी गई है।
खतरा बढ़ा पर लोग हटने को तैयार नहीं
मजनू का टीला से लोहे वाले पुल तक यमुना किनारे बनी झुग्गियाों में कई तो आधी डूब चुकी हैं लेकिन लोग उन्हें छोड़ने को तैयार नहीं हैं। लोहे वाले पुल के पास करीब 10 परिवारों ने झुग्गिंयां बनाई हैं। उनमें से कुछ तो पुल के ठीक नीचे हैं, जो पूरी तरह से डूब चुकी हैं। पश्चिम बंगाल की सुमित्रा का कहना है कि पिछले 30 साल से वह इसी झुग्गी में रहती हैं। यहीं पैदा हुईं। पली-बढ़ी। शादी भी झुग्गियों में हुई। उन्होंने कहा कि वह बाढ़ का सामना करने को तो तैयार हैं, लेकिन झुग्गियां खाली करने को नहीं। सुमित्रा की झुग्गी के पास ही गोपाल की भी झुग्गी है, वह भी घर छोड़कर जाने को तैयार नहीं है। गोपाल का कहना है कि उनके पास दिल्ली में दूसरा ठिकाना नहीं है।
बाढ़ से निपटने के लिए कंट्रोल रूम
बाढ़ से निपटने के लिए कंट्रोल रूम बना दिया गया है। इन नंबरों पर 011-22428773, 011-22051234, 011-22501668 पर कॉल की जा सकती है। डिजास्टर हेल्पलाइन 1077 पर भी कॉल की जा सकती है।
हरियाणा के हथिनी कुंड से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण यमुना का जलस्तर बढ़ता जा रहा है। दिल्ली में यमुना खतरे के निशान से करीब आधा मीटर से ज्यादा ऊपर बह रही है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए रविवार को करीब शाम 7 बजे से ट्रैफिक पुलिस ने लोहे के पुल पर दोनों ओर से यातायात को बंद कर दिया गया था लेकिन अब यमुना में पानी का स्तर घटने के बाद एक बार फिर से पुल पर रेलवे यातायात को बहाल कर दिया गया है। इससे पहले पुल पर यातायात रोकने के कारण 27 पैसेंजर ट्रेन रद्द कर दिया गया था और 7 ट्रेनों का रूट बदलना पड़ा था।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने रविवार को ही ओल्ड यमुना ब्रिज को बंद कर दिया। दिल्ली आपदा प्रबंधन कमिटी की तरफ से अलर्ट जारी करने के बाद पुलिस ने यह कदम उठाया। पानी का स्तर जब तक खतरे के नीचे नहीं गिरेगा, तब तक ब्रिज को फिर से चालू नहीं किया जाएगा। जॉइंट सीपी ट्रैफिक पुलिस आलोक कुमार ने कहा, ‘इस मार्ग से जानेवाले लोगों को हमने वैकल्पिक रूट गीता कॉलोनी और आईटीओ की तरफ से जाने का निर्देश दिया है।’
इस बीच, यमुना में पानी का स्तर कुछ घटने के बाद रेल यातायात को बहाल कर दिया गया है। उत्तरी रेलवे के सीपीआरओ नितिन चौधरी ने कहा, ‘रेलवे के इंजिनियर लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और ब्रिज की मॉनिटरिंग की जा रही है।’
-एजेंसी

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