लखीमपुर खीरी कांड: 20 घंटे के भीतर सब-कुछ सामान्‍य, धरी की धरी रह गई विपक्ष की सारी सियासत… CM योगी ने ADG के साथ बैठा दिए टिकैत

3 अक्टूबर रविवार की शाम यूपी के लखीमपुर खीरी में 4 किसानों समेत 8 लोगों की मौत एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी। दुख बांटने की कौन कहे, गैर-बीजेपी शासित प्रदेशों के नेताओं ने फौरन राजनीति शुरू कर दी। दिल्ली ही नहीं, छत्तीसगढ़ और पंजाब से भी नेता लखीमपुर के लिए निकल पड़े। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के विरोध में बने माहौल को लपकने के लिए कांग्रेस, सपा, बसपा और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने कोई कसर नहीं छोड़ी। पुलिस के रोकने पर नोकझोंक के वीडियो वायरल हुए, प्रियंका गांधी ने हिरासत में विरोध के तौर पर झाड़ू लगाया, आप के संजय सिंह रोके गए, अखिलेश यादव को लखीमपुर जाने नहीं दिया गया तो वह लखनऊ में ही सड़क पर धरना देने लगे। शिवपाल यादव घर में नजरबंद किए गए तो दीवार फांदकर भाग निकले। बाद में उन्‍हें हिरासत में ले लिया गया। गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़) में राष्‍ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी के समर्थकों ने टोल प्‍लाजा बैरियर तोड़ दिया। चौधरी दौड़ते हुए अपनी गाड़ी में सवार हुए और लखीमपुर खीरी के लिए निकल पड़े। नेताओं की फुर्ती बता रही थी कि चुनाव से पहले विपक्ष इस मामले को भुनाना चाह रहा है।
दूसरी तरफ प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ लखनऊ में पल-पल का अपडेट ले रहे थे। हिंसक विरोध के बाद मामले को संभालने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी। उन्होंने 20 घंटे के भीतर कुछ इस तरह से हालात को संभाला कि विपक्ष की सारी सियासत धरी की धरी रह गई। जो माहौल सुबह से गरमाया हुआ था दोपहर 1 बजते-बजते हवा हो गया। किसान नेता राकेश टिकैत और प्रदेश के एडीजी (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार की साथ में प्रेस कॉफ्रेंस की तस्वीर सामने आते ही विपक्ष की आवाज ठंडी पड़ गई क्योंकि सरकार प्रदर्शनकारी किसानों की सारी मांगें मान चुकी थी। इससे विपक्ष के लिए मुद्दे को गरमाने के सारे रास्ते बंद हो गए। टीवी चैनलों पर डिबेट कर रहे बीजेपी के प्रवक्ताओं ने बताया कि योगी ने रातभर जागकर मामले को प्रभावी ढंग से हैंडल किया। उन्होंने विपक्ष पर बरसते हुए कहा कि योगी के आगे आपकी एक न चली। किसान नेता राकेश टिकैत के सहारे समझौता करा योगी ने विपक्ष के सारे वार फेल कर दिए।
रविवार शाम का माहौल….
रविवार को लखीमपुर खीरी में किसानों की हत्या ने बीजेपी के खिलाफ माहौल को और गरमा दिया था। विपक्ष चौतरफा योगी सरकार पर टूट पड़ा। हालात को संभालने के लिए प्रदेश के मुखिया सीएम योगी आदित्यनाथ ने सभी कार्यक्रम स्थगित कर दिए। बताते हैं कि रविवार देर रात तक वह लखीमपुर की घटना को लेकर अपने आवास पर सीनियर अधिकारियों के साथ बैठक करते रहे। चुनाव से ठीक पहले किसान आंदोलन के बीच लखीमपुर कांड से भंवर में फंसी बीजेपी को योगी ने निकालने की पूरी कोशिश की और वह सफल रहे।
दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार हो या यूपी की योगी सरकार पहले दिन से किसान आंदोलन पर उनका एक समान रुख रहा है। सरकार की ओर से बार-बार कहा गया है कि तीनों नए कानूनों से किसानों को लाभ होगा और मंडिया खत्म नहीं होंगी, MSP घटाई नहीं बल्कि और बढ़ाई जा रही है। हाल में भी केंद्र सरकार ने कई फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर देशवासियों को यह संदेश दिया था कि सरकार किसानों के साथ है और दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन के पीछे राजनीतिक मकसद है। किसान नेता राकेश टिकैत को लेकर सोशल मीडिया पर उनके सियासी उद्देश्य को लेकर कई तरह की बातें उछाली जाती रही हैं। ऐसे में रविवार शाम को जब लखीमपुर में हिंसा की वारदात की खबर लखनऊ पहुंची तो योगी ने फौरन मोर्चा संभाल लिया।
रात होते-होते
विपक्ष के कई नेता रात में ही लखीमपुर खीरी के लिए निकल पड़े थे, ऐसे में योगी अलर्ट मोड में थे। उन्होंने माहौल को बिगड़ने से रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किए। सरकार को आशंका थी कि नेताओं के पहुंचने से इलाके में कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती थी। ऐसे में कांग्रेस, आप, सपा हो या बसपा सभी दलों के नेताओं को अलग-अलग जगहों पर हिरासत में लेने के निर्देश दे दिए गए। मीडिया में भले ही उनके तीखे बयान आए पर सरकार अपने फैसले पर अड़ी रही। विरोध में प्रियंका गांधी ने हिरासत में अपने कमरे में झाड़ू भी लगाया।
योगी आए सामने
रात में ही सीएम योगी ने ट्वीट किया कि जनपद लखीमपुर खीरी में घटित हुई घटना अत्यंत दुःखद एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। यूपी सरकार इस घटना के कारणों की तह में जाएगी और घटना में शामिल तत्वों को बेनकाब करेगी। दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करेगी। उन्होंने बताया कि मौके पर शासन द्वारा अपर मुख्य सचिव नियुक्ति, कार्मिक एवं कृषि, ए.डी.जी. कानून-व्यवस्था, आयुक्त लखनऊ तथा आई.जी. लखनऊ मौजूद हैं तथा स्थिति को नियंत्रण में रखते हुए घटना के कारणों की गहराई से जांच कर रहे हैं। घटना में लिप्त जो भी जिम्मेदार होगा, सरकार उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही करेगी।
उन्होंने क्षेत्र के लोगों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं और मौके पर शांति-व्यवस्था कायम रखने में अपना योगदान दें। किसी प्रकार के निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मौके पर हो रही जांच तथा कार्यवाही का इंतजार करें। यह कहकर योगी ने लखीमपुर खीरी को लेकर फैल रही अफवाहों, अटकलों और चर्चाओं पर विराम लगाने की कोशिश की।
सुबह हुई तो…
राज्य सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने विपक्षी दलों के नेताओं को लखीमपुर खीरी जाने को अशांति फैलाने वाला राजनीतिक स्टंट करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया, ‘विपक्षी दल फोटो ऑप (तस्वीर खिंचवाने का मौका) हासिल करने और राजनीतिक फायदा लेने की फिराक में हैं। वे 2022 तक का जो राजनीतिक सफर तय करना चाहते हैं, वह लाशों पर नहीं हो सकता। सरकार नहीं चाहती कि लखीमपुर खीरी में शांति का माहौल बिगड़े। सरकार चाहती है कि शांतिपूर्ण माहौल में सही जांच हो और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके।’
ट्विटर पर ट्रेंड, विपक्षी नेताओं के वीडियो वायरल
देर रात से ही विपक्षी नेताओं के ट्वीट और वीडियो धड़ाधड़ आने लगे जिसमें सीधे तौर पर यूपी सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की गई। ट्विटर पर ट्रेंड शुरू हो गए। नेता लखीमपुर जाने की असफल कोशिश करते नजर आए। उधर, योगी की कोशिश थी कि हालात को काबू में रखते हुए किसानों को शांत कराने के कदम उठाए जाएं। रविवार शाम 5 बजे से सोमवार सुबह 12 बजे तक तेजी से घटनाक्रम बदलते रहे।
योगी सरकार चाह रही थी कि किसानों के घेराव, कांग्रेस के प्रदर्शन, सपा के विरोध, शाम में जंतर-मंतर कैंडल मार्च के तूल पकड़ने से पहले ही किसानों को मना लिया जाए। हुआ भी कुछ ऐसा ही। दोपहर 1 बजे किसान नेता राकेश टिकैत खुद पुलिस अधिकारियों के साथ मीडिया के सामने आए।
सरकार ने मान ली सारी मांगें
एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार ने बताया कि सरकार ने किसानों की मांगें मान ली हैं। कल लखीमपुर खीरी में मारे गए चारों किसानों के परिवारों को 45 लाख रुपये और एक सरकारी नौकरी दी जाएगी। घायलों को 10 लाख रुपये दिए जाएंगे। किसानों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की जाएगी और रिटायर्ड हाई कोर्ट जज मामले की जांच करेंगे।
एडीजी के साथ टिकैत के बैठने से ही साफ हो गया था कि मामला सुलझ गया है। यह खबर मिलते ही जहां-जहां विपक्ष प्रदर्शन में जुटा था, कार्यकर्ता एक-एक कर बिखरने लगे। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी लखीमपुर कांड में स्कोप न देख गोरखपुर में मर्डर, प्रयागराज में संत की संदिग्ध मौत के मामलों का जिक्र कर नए ट्रैक पर जाते दिखे।
यह कुछ वैसा ही है जैसे क्रिकेट में कमेंट्री शब्द बदलकर की जा रही हो- आगे बढ़कर खेल दिया है ‘मुद्दा’ चर्चा से बाहर, विपक्षी टीम के पास कोई मौका नहीं।
-एजेंसियां

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