ND Agriculture विवि में शिक्षकों का अभाव, शिक्षण कार्य बाधित

फैज़ाबाद। ND Agriculture एवं प्रद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज किसी न किसी आंतरिक समस्याओं से निरंतर जूझ रहा है।

 

विगत एक दशक से कभी ND Agriculture विश्वविद्यालय में आर्थिक संकटों के बादल छाये रहे, तो कभी वित्तीय अनिमित्ता के चलते वि. वि. की छवि धूमिल होती रही है।

अनेक समस्याओं का सामना करता रहा है जिसके चलते ND Agriculture एवं प्रद्योगिकी विश्वविद्यालय  के विकास एवं शोध कार्यो पर भी खासा असर पड़ा, किन्तु नवागत कुलपति प्रो. जे. एस. संधू के कार्य भार ग्रहण करने के उपरांत वि. वि. में व्याप्त अधिकांश समस्याओं जहां एक ओर निराकरण करने में सफल हुए वहीं दूसरी तरफ वि. वि. की हुई धूमिल छवि को सुधारते हुए विकास की गति एवं वैज्ञानिकों के द्वारा किये जाने वाले शोधों को भी नया आयाम दिया।

इसके बावजूद वि. वि में शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थियों को दिए जाने वाली शिक्षा का सम्पूर्ण समाधान नहीं निकाल पा रहे वि. वि. में शिक्षकों की कमी का खामयाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। वि.वि. में लगभग 249 शिक्षकों का अभाव बना हुआ है इतना ही नहीं वि. वि से जुड़े महाविद्यालययों जैसे ग्रह विज्ञान महाविद्यालय, उद्यान महाविद्यालय, पशुपालन महाविद्यालय, कृषि महाविद्यालय,मत्स्य महाविद्यालय , कृषि अभियांत्रिक महाविद्यालय, आज़मगढ़ कृषि महाविद्यालय में लगभग 200 शिक्षकों का अभाव है।

शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थियों को किसी तरह से अतिथि शिक्षकों की सहायता से शिक्षा दी जा रही है जिसपर वि. वि. के कुलपति प्रो. जे. एस. संधू ने कहा की समस्या तो व्यापक है जिसका अतिशीघ्र निराकरण किया जायगा।

इसी वर्ष जुलाई में नरेंद्र देव कृषि एवं प्रद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज कुलपति प्रो. जेएस संधू के प्रयास करने पर शासन स्तर से 85 शिक्षकों के पद स्वीकृत करने का शासनादेश जारी कर दिया गया है।
प्रदेश शासन स्तर से कृषि विश्वविद्यालय के अधीन संचालित गृह विज्ञान महाविद्यालय के लिए कुल 21 शिक्षकों की भर्ती करने की स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय, मत्स्य महाविद्यालय के लिए भी 21-21 शिक्षकों की नियुक्ति का शासनादेश जारी किया गया है। अम्बेडकरनगर में स्थित कृषि अभियंत्रण महाविद्यालय के लिए कुल 22 शिक्षकों के पद स्वीकृत किये गये हैं। शासन ने यह आदेश नए कुलपति प्रो. जेएस संधू की कोशिशों के परिणाम स्वरूप दिया है। कुलपति विश्वविद्यालय की शिक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने के प्रयास में लगे हैं।

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