सरकार के 100 days पूरे होने पर दिल्‍ली में राहुल से मिले कुमारस्‍वामी

नई दिल्‍ली। अपनी सरकार के 100 days पूरे होने पर कर्नाटक के मुख्‍यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने आज नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। भेंट के बाद कुमारस्वामी ने कहा, ‘मैं केवल सरकार के सौ दिन पूरे होने पर उनसे (राहुल) मिलने आया था। यह बस दोस्ताना मुलाकात थी।’
कुमार स्‍वामी ने अपनी सरकार के 100 days पूरे होने पर उन्‍होंने कहा कि सरकारी काम, भगवान का काम होता है। दरअसल, 15 मई 2018 के बाद ऐसा बदलाव हुआ, जिसके बाद ईश्‍वर के प्रत‍ि उनकी आस्‍था और बढ़ गई है। यही वजह है कि उन्‍होंने अपने मुख्‍यमंत्री शपथ ग्रहण से लेकर अब तक 50 से अध‍िक बार मंद‍िरों के दर्शन कर ल‍िए।
सीएम की पत्‍नी अनीता कुमारस्‍वामी ने कहा, ‘कुमारस्‍वामी ईश्‍वर पर आस्‍था रखते हैं लेकिन अपने प‍िता और भाई की तरह नहीं। उन्‍होंने कभी क‍िसी पूजा या अनुष्‍ठान पर जोर नहीं द‍िया। जब उन्‍हें पूजा के बारे में बताया जाता है, तभी वह उसमें शाम‍िल होने के ल‍िए पहुंचते हैं।’ अचानक कुमारस्‍वामी में ईश्‍वर के प्रत‍ि बढ़ती आस्‍था के पीछे बड़ी वजह है, जिसने उनके जीवन को एक नई द‍िशा दी है।
15 मई के बाद भगवान के प्रत‍ि कुछ यूं बढ़ी आस्‍था
कुमारस्‍वामी में भगवान के प्रत‍ि भरोसा और आस्था उस वक्त बढ़ी, जब 15 मई की सुबह कर्नाटक व‍िधानसभा चुनाव की मतगणना शुरू हुई। उस द‍िन बेंगलुरु शहर का तापमान 22 ड‍िग्री सेल्‍स‍ियस था। मौसम सुहाना था और वह अदीचंचनग‍िरी मठ में अमावस्‍या की चंद्रमा पूजा करने के ल‍िए पहुंचे थे। द‍िन जैसे-जैसे चढ़ रहा था कुमारस्‍वामी के ल‍िए च‍िंता बढ़ रही थी। उन्‍हें 12 साल बाद सत्‍ता में वापसी का इंतजार था। उन्‍हें उम्‍मीद थी क‍ि उनकी पार्टी जनता दल (सेक्‍युलर) व‍िधानसभा चुनाव में 80 सीट हास‍िल करेगी, जिससे उनका असेंबली में शीर्ष पद पर बैठने का रास्‍ता साफ हो जाएगा। लेकिन मतगणना के शुरुआती रुझानों ने उनकी उम्‍मीदों पर पानी फेर द‍िया था। बीजेपी 118 सीटों से आगे चल रही थी। उसे 111 सीटें हास‍िल करनी जरूरी थीं, जिससे वह 222 सीटों पर हुए चुनाव में बहुमत हासिल कर सके।
संन्‍यास लेने का कर ल‍िया था फैसला
पूजा के बाद चुनाव के रुझानों को जानकर कुमारस्‍वामी काफी परेशान हुए और उन्‍होंने अपने एक करीबी म‍ित्र को बुलाया। उन्‍होंने अपने म‍ित्र से कहा क‍ि अब वह राजनीत‍ि से संन्‍यास ले लेंगे। कुमारस्‍वामी ने च‍िंता जताई क‍ि अगर जेडीएस चुनाव नहीं जीती तो वह अपने इस फैसले की घोषणा करेंगे। मगर लग रहा था कि उस द‍िन तापमान के बढ़ने के साथ ही कुमारस्‍वामी के भाग्‍य का स‍ितारा भी कुछ अलग द‍िशा में चमकने वाला था।
फ‍िर हुआ नाटकीय पर‍िवर्तन
15 मई मतगणना के बीच दोपहर 2.30 बजे तक बड़ा नाटकीय पर‍िवर्तन हुआ। बीजेपी जो अब तक आगे चल रही थी उसकी रफ्तार 104 सीट हास‍िल कर थम गई। इस समय कांग्रेस 78 सीट हास‍िल करके दूसरे स्‍थान पर और जेडीएस 38 सीट के साथ तीसरे स्‍थान पर थी। इसमें एक सीट बीएसपी को म‍िली और 2 सीटें न‍िर्दल‍ीय को हास‍िल हुईं। बस देखते ही देखते जेडीएस फ‍िर से गेम में शाम‍िल हो गया। पर‍िणामों से परेशान बीजेपी अध्‍यक्ष अम‍ित शाह ने कुमारस्‍वामी को फोन करके बीजेपी का साथ देने को कहा। इसके बदले में उन्‍होंने वादा किया क‍ि सत्‍ता में आने पर बीजेपी उनको मुख्‍यमंत्री का पद देगी और उनके भाई एचडी रेवन्‍ना को उपमुख्‍यमंत्री का पद दिया जाएगा।
कांग्रेस के प्रस्‍ताव को स्‍वीकार कर बदली तकदीर
बीजेपी के ल‍िए कुमारस्‍वामी ब‍िल्‍कुल अजनबी नहीं थे। जेडीएस ने साल 2006 में बीजेपी के साथ गठबंधन क‍िया था। कुमारस्‍वामी ने अम‍ित शाह के प्रस्‍ताव पर व‍िचार करते हुए कुछ समय मांगा। इसके बाद वह अपने प‍िता पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा से सलाह लेने पहुंचे। प‍िता ने कुमारस्‍वामी को सलाह दी क‍ि अगर वह बीजेपी के साथ जाएंगे, तो सभी लोग उनके साथ नहीं आएंगे। अपने प‍िता की सलाह के बाद उन्‍होंने कांग्रेस से गठबंधन का प्रस्‍ताव स्‍वीकार क‍िया और कर्नाटक के सीएम बन गए।
ईश्‍वर से जुड़ गई आस्‍था
15 मई के द‍िन उनके जीवन में अचानक जो मोड़ आया उसके बाद उनकी आस्‍था ईश्‍वर के प्रत‍ि बढ़ गई। बता दें कि तब से मंद‍िर जाने का उनका स‍िलस‍िला जारी है। उन्‍होंने 19 मई को फ‍िर से इस मठ के दर्शन क‍िए। इसके बाद वह 20 मई को तम‍िलनाडु के त‍िरुची और श्रीरंगम के दर्शन पहुंचे और साथ ही त‍िरुपति के भी दर्शन क‍िए। वहीं 21 मई को उन्‍होंने लक्ष्‍मी नरस‍िंह मंद‍िर और श‍िव मंद‍िर की चौखट पर मत्था टेका। शपथग्रहण के द‍िन 23 मई को वह चामुंडेश्‍वरी और बालामुरी गणपत‍ि मंद‍िर के दर्शन करने मैसूर गए थे।
शपथ ग्रहण के बाद भी चलता रहा मंद‍िर भ्रमण
मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद उन्‍होंने 23 मई से लेकर 23 अगस्‍त तक कई मंद‍िरों के अलावा राजस्थान के अजमेर में स्थित मशहूर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर जाकर अपनी आस्‍था प्रकट की।
-एजेंसियां

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