आम आदमी पार्टी वर्जन-2 लाएंगे कुमार विश्‍वास

आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास ने ऐलान किया है कि वह आम आदमी पार्टी वर्जन-2 बनाएंगे। हालांकि उन्होंने साफ किया कि वर्जन-2 का मतलब नई पार्टी नहीं है बल्कि इसका मतलब पार्टी को ‘बैक टु बेसिक’ पर लाना है। कुमार विश्वास ने पार्टी ऑफिस में कार्यकर्ताओं से अलग-अलग ग्रुप में मुलाकात की। कई कार्यकर्ताओं ने विधायकों को लेकर अपनी शिकायत कुमार को बताई तो कुछ लोगों ने कहा कि पार्टी में आपसी मतभेद दूर होने चाहिए।
कुमार ने कहा कि राज्यसभा में कौन जाएगा, इसका फैसला कार्यकर्ताओं का मन जानकर सही वक्त पर किया जाएगा।
क्या है वर्जन-1
कुमार से यह पूछने पर कि अगर वह आम आदमी पार्टी वर्जन-2 बनाएंगे तो वर्जन-1 क्या था? कुमार ने कहा कि वर्जन-1 था रामलीला मैदान में और जंतर-मंतर पर पार्टी की लॉन्चिंग, जब हमने कहा था कि हम छोटे से छोटा फैसला कार्यकर्ता की बजाय मतदाता से पूछकर करेंगे, जब हमने टिकट देते वक्त पहली बार कार्यकर्ताओं को पंजीकृत किया, कार्यकर्ताओं की वोटिंग के आधार पर टिकट दिया, हमने कहा था कि कैरक्टर, क्रिमिनल बैकग्राउंड, करप्शन पर कोई समझौता नहीं होगा, हमने कहा था कि फैसलों में पारदर्शिता होगी।
उन्होंने कहा, वर्जन-1 था कि यह कार्यकर्ताओं की पार्टी है और हम धर्म, जाति की राजनीति नहीं करेंगे। इस बीच में हम इससे थोड़ा भटके हैं। कब-कब? यह बताने की जरूरत नहीं क्योंकि यह मेरी पार्टी के अंदर का मामला है। कुमार ने कहा कि जब-जब भटकाव दिखे हैं, मैंने पूरी मजबूती के साथ यह बात पार्टी में कही है। पिछले डेढ़ साल में कहने के कारण ही काफी लोग मुझसे नाराज हुए हैं।
आम आदमी पार्टी वर्जन-2 का मतलब
क्या वर्जन-2 का मतलब नई पार्टी है? यह पूछने पर कुमार विश्वास ने कहा कि बिल्कुल नहीं। वर्जन-2 का मतलब है इसमें कुछ ऐंटी-वायरस लगाए जा रहे हैं। वह ऐंटी-वायरस हैं कार्यकर्ताओं के। कार्यकर्ता सच-सच बताएंगे। कार्यकर्ता बताएंगे कि संगठन में कहां दिक्कत हो रही है और विधायक कैसा काम कर रहे हैं?
कौन-कौन हैं वायरस?
कुमार विश्वास से यह पूछने पर कि ऐंटी-वायरस की जरूरत क्यों पड़ी और कौन-कौन हैं वायरस? कुमार ने कहा कि वायरस यह है कि जब हम रामलीला मैदान से चले थे तो 5 लाख थे, इस बार जब हम रामलीला मैदान में थे तो 5 हजार कुर्सियां थीं। 5 लाख से 5 हजार की यात्रा के बीच जो जनता हमसे छूटी है वह वायरस की वजह से छूटी है। कई वजहों से लोग नाराज हुए हैं।
राज्यसभा का फैसला कार्यकर्ताओं का मन जानकर
राज्यसभा को लेकर कुमार के विचार पूछने पर उन्होंने कहा कि अगर पार्टी आगे बढ़ेगी तो राज्यसभा और लोकसभा आएगी लेकिन पार्टी के सीनियर और योग्य लोगों की इसलिए राजनीतिक हत्या कर देना कि इनके मरने से RAC (रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन) कन्फर्म होगी तो ऐसे चेहरों को पहचानने की जरूरत है, जो जंतर-मंतर से लेकर रामलीला मैदान तक नहीं आए पर सरकार बन गई तो आ गए। उन्होंने कहा कि राज्यसभा कौन जाएगा, इसके लिए कार्यकर्ताओं का मन जानकर हम सही समय पर फैसला लेंगे।
कुमार-केजरीवाल साथ-साथ
क्या इस ‘बैक टु बैसिक’ के लिए अरविंद केजरीवाल साथ हैं, क्या वह भी चाहते हैं? इस सवाल पर कुमार विश्वास ने कहा कि पार्टी का आंदोलन अरविंद केजरीवाल की ‘स्वराज’ किताब के अनुसार खड़ा हुआ तो वह क्यों नहीं चाहेंगे, वह बिल्कुल चाहते हैं।
कुमार ने कहा, ‘मेरे भाषण में मैंने कहा था कि पहले देश को, फिर दल को और फिर नेता को रखो। अरविंद ने मेरे बाद अपने भाषण में इसे दोहराया। अरविंद ने बहुत संजीदगी के साथ पार्टी के लोगों को संदेश दिया है कि हम जहां से चले थे वहीं लौटना है।’
क्या कपिल मिश्रा वापस आएंगे?
कुमार विश्वास ने पार्टी से नाराज होकर दूर चले गए लोगों को फिर से पार्टी में लाने की बात की। जब उनसे पूछा गया कि क्या कपिल मिश्रा को भी वापस लाएंगे? कुमार ने कहा कि कोई भी अनुशासनात्मक कार्यवाही की विधिक प्रक्रिया की वजह से बाहर गया है तो वह प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंदर आएगा। कोई अमानतुल्ला वाला केस नहीं है कि अचानक निकाल दिया और अचानक वापस ले लिया। पार्टी ऐसे नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि कई लोग जो बाहर गए हैं, अंजलि दमानिया से लेकर सुभाष वारे तक और योगेंद्र यादव से लेकर प्रशांत भूषण तक कई लोग हैं। उनसे कार्यकर्ता अलग-अलग स्तर पर संवाद कर रहे हैं। हमसे भी कुछ गलतियां हुई होंगी तो उनके लिए हम हाथ जोड़कर माफी मांग रहे हैं।
‘अपनी निजी लड़ाई नहीं लड़ूंगा’
विश्वास ने कहा कि मेरे सामने संकट यह है कि मैं कुछ लोगों की नाराजगी देखूं या करोड़ों लोगों का रामलीला मैदान का सपना देखूं, तो पिछले कुछ समय में मैंने यह तय किया कि मैं नाराजगी को नहीं देखूंगा, सपने को देखूंगा। इस कड़ी में छह महीने पहले एक सांप्रदायिकता के आरोप में एक आयातित विधायक से मुझ पर नीच तरह का आरोप लगवाया गया। तब भी मैंने कहा था कि वह मुखौटा है, हमला कहीं और से है। कुमार ने कहा कि मैं अपनी ओर से ऐसी कोई लड़ाई नहीं लड़ूंगा जो मेरी निजी लड़ाई हो। मेरा अपमान हो, या मुझ पर निजी हमले हों, मैं उस पर नहीं लड़ूंगा।
चुनाव क्यों नहीं लड़ा?
कुमार ने कहा कि कुछ साथी हिमाचल से आए हैं यह पूछने कि हमने वहां चुनाव क्यों नहीं लड़ा? कुछ लोग उत्तराखंड से यह पूछने आए हैं कि 11 सीट का अनुमान चुनाव से एक साल पहले कर दिया गया था। दो-दो कार्यकर्ता सम्मेलन मैंने वहां किए थे तो फिर चुनाव क्यों नहीं लड़ा? मैंने उन्हें आश्वासन दिया है कि हम उत्तराखंड की पांचों सीटों के लिए तैयारी करेंगे। यूपी, राजस्थान से भी लोग आए हैं।
-एजेंसी