राम जन्‍मभूमि के बाद कृष्‍ण जन्‍मभूमि: दावा दायर करने वाले एडवोकेट जैन ने कहा, न तो “Place of worship Act 1991” कोई बाधा है और न 1968 में हुआ समझौता

श्रीकृष्ण जन्मस्थान मथुरा की 13.37 एकड़ भूमि के स्वामित्व और शाही ईदगाह को हटाने को मांग वाली याचिका में न तो “Place of worship Act 1991” कोई बाधा है और ना ही 1968 में मुस्‍लिम पक्ष से हुए किसी कथित समझौते की कोई अहमियत है।
यह कहना है भगवान श्रीकृष्ण विराजमान व सात अन्‍य की ओर से मथुरा की अदालत में दावा दायर करने वाले सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्‍ता विष्‍णुशंकर जैन का।
दरअसल, कल मीडिया में इस बाबत आई खबरों के अनुसार Place of worship Act 1991 इसके लिए एक रुकावट है। इस एक्ट के मुताबिक आजादी के दिन 15 अगस्त 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था, उसी का रहेगा। इस एक्ट के तहत सिर्फ रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को छूट दी गई थी।
इस बारे में “Legend News” से बात करते हुए एडवोकेट विष्‍णुशंकर जैन ने बताया कि वैसे तो श्रीकृष्ण जन्मस्थान के लिए मथुरा की अदालत में दावा दायर करने से पहले ही Place of worship Act 1991 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है। बावजूद इसके कि 15 अगस्त 1947 यानी आजादी के दिन ही नहीं उससे भी पहले जब 1935 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वाराणसी के हिंदू राजा को जमीन के कानूनी अधिकार सौंप दिए थे, तब से लेकर अब तक संपूर्ण 13.37 एकड़ भूमि अभिलेखों में श्रीकृष्‍ण जन्‍मभूमि के नाम ही दर्ज है।
एडवोकेट विष्‍णुशंकर जैन के इस कथन की पुष्‍टि श्रीकृष्‍ण जन्‍मस्‍थान सेवा संस्‍थान के सदस्‍य गोपेश्‍वर नाथ चतुर्वेदी के दैनिक जागरण में आज छपे उस बयान से भी होती है जिसमें उन्‍होंने कहा है कि राजस्‍व अभिलेखों के साथ-साथ मथुरा नगर निगम में भी आज तक वह पूरी 13.37 एकड़ जमीन जन्‍मभूमि ट्रस्‍ट के नाम दर्ज है, जिस पर कृष्‍ण जन्मस्‍थान और शाही मस्‍जिद ईदगाह बनी है।
एडवोकेट विष्‍णुशंकर जैन ने कहा कि इस लिहाज से भी देखा जाए तो Place of worship Act 1991 हमारे खिलाफ नहीं जाता। वह हमें सपोर्ट करता है।
उन्‍होंने बताया कि इसके बावजूद इस एक्‍ट को चुनौती देने का मकसद दूसरे ऐसे धार्मिक स्‍थलों के लिए कानूनी आधार खड़ा करना है, जिनके लिए यह भविष्‍य में बाधा बन सकता है।
रहा सवाल 1968 में मुस्‍लिम पक्ष से हुए किसी समझौते का तो उसकी कोई वैधता नहीं है क्‍योंकि यह समझौता श्रीकृष्‍ण जन्‍मभूमि के किसी जिम्‍मेदार पदाधिकारी की ओर से नहीं किया गया।
गौरतलब है कि सिविल जज सीनियर डिवीजन मथुरा की अदालत में दायर दावे के तहत यह मांग की गई है कि श्रीकृष्‍ण जन्‍मस्‍थान की भूमि पर बनी मस्‍जिद को हटाया जाए क्‍योंकि जिस स्‍थान पर वह मस्‍जिद बनी है, वही भगवान कृष्‍ण का गर्भ ग्रह है। उसी स्‍थान पर कभी कंस का कारागार बना था, जहां श्रीकृष्‍ण का जन्‍म हुआ।
मथुरा में यह केस उसी तरह दायर किया गया है जिस तरह राम मंदिर मामले में नेक्स्ट टू रामलला विराजमान का केस बनाकर किया गया था। अब नेक्स्ट टू भगवान श्रीकृष्ण विराजमान के रूप में याचिका दायर की गई है।
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी

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