हेरात के शेर कहे जाने वाले इस्‍माइल खान को तालिबान ने बंदी बनाया

हेरात। भारत के दोस्‍त और हेरात के शेर कहे जाने वाले इस्‍माइल खान को तालिबान आतंकियों ने बंदी बना लिया है। कई दिनों तक जोरदार टक्‍कर देने वाले इस्‍माइल खान अंतत: हार गए।
तालिबान आतंकियों ने अफगान‍िस्‍तान के हेलमंद प्रांत की राजधानी लश्‍कर गाह पर कब्‍जा करके पिछले कई दिनों से जोरदार टक्‍कर दे रहे स्‍थानीय वॉर लॉर्ड इस्‍माइल खान को बंदी बना लिया है।
बताया जा रहा है कि हेरात के ‘बूढे़ शेर’ इस्‍माइल खान के साथ-साथ अफगानिस्‍तान के उपगृहमंत्री जनरल रहमान और कई आला पुलिस अधिकारियों को पकड़ा गया है। बताया जा रहा है कि अफगान सेना में घुसपैठ के बाद तालिबान ने भारत के ‘दोस्‍त’ इस्‍माइल खान के किले को ध्‍वस्‍त कर दिया।
अफगानिस्तान के एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि तालिबान ने दक्षिण हेलमंड प्रांत की राजधानी लश्करगाह पर कब्जा कर लिया है। इस्‍माइल खान पिछले कई दिनों से चट्टान की तरह से तालिबान के खिलाफ जंग लड़ रहे थे लेकिन अंतत: उन्‍हें हार का मुंह देखना पड़ा। बताया जा रहा है कि इस्‍माइल खान, पुलिस और स्‍थानीय सेना के प्रमुख हेलिकॉप्‍टर से हेरात से निकलना चाहते थे लेकिन अफगान सैनिकों ने ही उन्‍हें जाने नहीं दिया। अब ये सभी तालिबान की गिरफ्त में आ गए हैं।
तालिबान आतंकियों के साथ तस्‍वीर भी सोशल मीडिया में वायरल
यही नहीं, इस्‍माइल खान की तालिबान आतंकियों के साथ एक तस्‍वीर भी सोशल मीडिया में वायरल हो गई है। इस बीच तालिबान ने कंधार समेत कई और प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा कर लिया है। अधिकारियों ने बताया कि कंधार पर तालिबान ने बृहस्पतिवार रात को कब्जा कर लिया और सरकारी अधिकारी तथा उनके परिजन हवाई मार्ग से भागने के लिए किसी तरह हवाई अड्डे पहुंच गए। इससे पहले गुरुवार को तालिबान ने अफगानिस्तान के तीसरे सबसे बड़े शहर हेरात पर कब्जा कर लिया था। तालिबान के लड़ाके ऐतिहासिक शहर में ग्रेट मस्जिद से आगे बढ़ गए और सरकारी इमारतों पर कब्जा कर लिया।
गजनी पर तालिबान के कब्जे से अफगानिस्तान की राजधानी को देश के दक्षिण प्रांतों से जोड़ने वाला अहम राजमार्ग कट गया। काबुल अभी सीधे खतरे में नहीं है लेकिन तालिबान की देश में पकड़ मजबूत होती जा रही है और दो तिहाई से अधिक क्षेत्र पर वह काबिज हो गया है। उग्रवादी संगठन अन्य प्रांतीय राजधानियों में सरकारी बलों पर दबाव बना रहा है। बदतर होते सुरक्षा हालात को देखते हुए अमेरिका काबुल में अमेरिकी दूतावास से कर्मियों को निकालने के लिए 3,000 सैनिकों को भेज रहा है। वहीं, ब्रिटेन भी देश से अपने नागरिकों को निकलने में मदद देने के लिए कुछ समय के लिए करीब 600 सैनिकों की वहां पर तैनाती करेगा।
तालिबान के खिलाफ लड़ी थी जंग, भारत के अच्‍छे दोस्‍त
इस्‍माइल खान एक पूर्व मुजाहिद हैं जिन्‍होंने 1970 के दशक में हाथ में असॉल्‍ट राइफल उठा ली थी। इसके बाद उन्‍होंने तालिबान के खिलाफ जंग लड़ी थी। अब अगर वह फिर से तालिबान की आंधी को रोकने में सफल होते तो वह अफगानिस्‍तान में अमर हो जाते लेकिन ऐसा हुआ नहीं। उन्‍हीं के आह्वान पर हेरात शहर के लोगों ने सरकार और सेना के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करने के लिए अल्लाह हू अकबर के नारे लगाए और आतंकवादी समूह तालिबान के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया था।
इस्‍माइल खान ताजिक मूल के हैं और काफी प्रभावी तरीके से तालिबानियों का खात्‍मा कर रहे थे। इस्‍माइल खान भारत के अच्‍छे दोस्‍त रहे हैं और उन्‍होंने सलमा बांध को बनाने में प्रमुख भूमिका निभाई थी। इससे पहले तालिबानियों ने सलमा बांध पर हमला किया था तब अफगान सेना ने विफल कर दिया था। इस बांध को भारत ने बनाया था। अप्रैल महीने में इस्‍माइल खान भारत आए थे और विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की थी।
-एजेंसियां

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