जानिए इस्लामिक स्टेट में अंडरकवर एजेंट कैप्टन की कहानी

बगदाद। कैप्टन हरीथ अल-सूडानी इराक की इंटेलिजेंस सेल के सबसे बहादुर और काबिल अधिकारियों में से थे। सूडानी की सूझबूझ और बहादुरी के कारण सैंकड़ों लोगों की जान इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के आतंकियों से बच गई। उन्होंने इस्लामिक स्टेट के अंदर रहकर खुफिया ऑपरेशंस को अंजाम दिया। न्यू यॉर्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने 18 आत्मघाती हमलों और 30 के करीब बम धमाकों को नाकाम किया।
आईएस के अंदर उन्होंने खुद को स्थापित किया और काफी ऊपर की पोस्ट तक पहुंच गए। हालांकि, सूडानी अपने आखिरी मिशन में पकड़े गए और आईएस ने उन्हें मौत के घाट उतार दिया। सूडानी की बहादुरी पर उनके परिवार को गर्व है। सूडानी आईएस की तरफ से मिलने वाली विस्फोटक सामग्री बदल देते थे और नकली धमाकों के जरिए उन्होंने लाखों लोगों की जिंदगी बचाई।
कैप्टन अल सूडानी के पिता को अपने बेटे पर गर्व है और वह कहते हैं, ‘मेरे बच्चे ने बहुत से मासूमों की जिंदगी बचाई। आईएस के हर ऑपरेशन में कितने ही मासूमों की जान चली जाती है, लेकिन मेरे बेटे ने लोगों की जान बचाने का महान काम किया।’ अपने आखिरी मिशन में सूडानी असफल रहे और आतंकियों ने उनकी कार को पकड़ लिया।
सूडानी ने अंडरकवर एजेंट के तौर पर 16 महीने इस्लामिक स्टेट में काम किया और जनवरी 2017 में आखिरकार पकड़े गए। पकड़े जाने के बाद आतंकियों ने उन्हें नॉर्थ बगदाद के फॉर्महाउस में कहीं भेज दिया और उसके बाद वह कभी वापस लौटकर नहीं आए। माना जा रहा है कि आईएस ने उनकी बेरहमी से गला काटकर हत्या कर दी।
इराकी इंटेलिजेंस एजेंसी के डायरेक्टर अबू अली अल-बसरी ने डेली मेल को बताया, ‘आईएस के लोगों को जब कैप्टन सूडानी पर शक हुआ तो उन्होंने उसे एक ट्रक बम दिया। उसे मार्केट एरिया में विस्फोट करने के लिए भेजा गया था लेकिन उन्होंने उस ट्रक में जासूसी के कुछ उपकरण भी लगा दिए थे। आईएस ने अपनी टीम के साथ कैप्टन की बातचीत सुन ली और उन्हें पकड़ लिया गया।’
कैप्टन सूडानी के परिवार को भी उनके इंटेलिजेंस एजेंट के तौर पर काम करने के बारे में जानकारी नहीं थी। कैप्टन के परिवार में पत्नी और एक 12 साल का बेटा और 2 बेटियां है। उनके बेटे को भी अपने पिता की बहादुरी पर गर्व है।
-एजेंसियां

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