अरुण गोविल के 63वें बर्थडे पर जानिए, कैसे मिला भगवान राम का रोल

मुंबई। अरुण गोविल ने करीब 44 साल पहले जब करियर शुरू किया था, तब उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि पूरी दुनिया एक दिन उन्हें भगवान श्री राम के रोल से जानेगी। 12 जनवरी को अरुण गोविल का 63वां बर्थडे है और इस मौके पर हम आपको एक ऐसा किस्सा बताने जा रहे हैं, जो शायद ही आप जानते हों।
क्या आप जानते हैं कि अगर ताराचंद बड़जात्या और सूरज बड़जात्या न होते तो अरुण गोविल को ‘रामायण’ में राम के रोल के लिए साइन नहीं किया जाता?
रामानंद सागर ने इस रोल के लिए अरुण गोविल को पहले रिजेक्ट कर दिया था।
रिजेक्ट हुए तो बड़जात्या ने दी थी यह सलाह
दरअसल, एक इंटरव्यू में अरुण गोविल ने बताया था कि जब वह रामानंद सागर की ‘रामायण’ में भगवान राम के रोल के लिए ऑडिशन देने गए तो उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया। इसके बाद ताराचंद और सूरज बड़जात्या ने उन्हें सलाह दी कि वह राम के किरदार के लिए लुक टेस्ट के दौरान अपनी स्माइल का प्रयोग करें। बड़जात्या परिवार राजश्री प्रोडक्शन्स का मालिक था और उसके साथ अरुण गोविल ने कई फिल्में कीं। ताराचंद, सूरज बड़जात्या के दादा थे।
इस स्माइल ने जीत लिया था रामानंद सागर का दिल
अरुण गोविल ने सूरज बड़जात्या की उस बात को गांठ बांध लिया और राम के रोल के लिए लुक टेस्ट के दौरान अपने सिग्नेचर स्टाइल में स्माइल दी। यही स्माइल रामानंद सागर को भा गई और उन्हें लगा कि अरुण गोविल राम के रोल के लिए एकदम परफेक्ट हैं। बस यहीं से अरुण गोविल के करियर की दिशा ही बदल गई।
दुनिया भर में ‘राम’ के रूप में मशहूर
अरुण गोविल ने राम का ऐसा किरदार निभाया जो दुनिया भर में अमर हो गया। लोग उन्हें सच में भगवान राम मानकर पूजने लगे। आज भी अरुण गोविल को राम के किरदार से ही जाना जाता है।
-एजेंसियां

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