जानिए… कैसे होती है CBI में डायरेक्टर की नियुक्ति?

CBI चीफ का चयन सलेक्शन कमेटी की ओर से तय किया जाता है जिसमें प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और नेता विपक्ष शामिल होते हैं।
सीबीआई चीफ चुने जाने की प्रक्रिया की शुरुआत गृह मंत्रालय से होती है। इसी मंत्रालय की ओर से IPS अधिकारियों की एक लिस्ट बनाई जाती है। इसमें उनके अनुभव और वरिष्ठता का ध्यान रखा जाता है। ऐसे अधिकारियों की लिस्ट तैयार होने के बाद उसे कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को भेज दिया जाता है।
वहां दोबारा से इस लिस्ट की जांच होती है और जिन अधिकारियों का इसमें नाम होता है उनके पिछले ट्रैक रेकॉर्ड को खंगाला जाता है। इसी आधार पर एक फाइनल लिस्ट तैयार की जाती है। यह पूरा काम सर्च कमेटी की ओर से किया जाता है। सर्च कमेटी की इन नामों पर चर्चा के बाद अपनी सिफारिश सरकार को भेजती है। इसके बाद CBI डायरेक्टर का चयन सलेक्शन कमेटी की ओर से तय किया जाता है जिसमें प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और नेता विपक्ष शामिल होते हैं।
लोकपाल एक्ट आने के बाद यह पूरी प्रक्रिया 2014 से लागू है। इससे पहले सीबीआई डायरेक्टर चुनने के लिए केंद्र सरकार की ओर से समिति बनाई जाती थी, जिसका अध्यक्ष केंद्रीय सतर्कता आयुक्त होता था।
1997 के बाद सीबीआई डायरेक्टर के कार्यकाल को लेकर बदला नियम
एक वक्त था कि सरकार अपनी मर्जी से कभी भी सीबीआई डायरेक्टर को हटा सकती थी। 1997 तक ऐसा नियम था जिसके बाद सरकार ऐसा कर सकती थी। साल 1997 में विनीत नारायण मामले के बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से कार्यकाल कम से कम दो साल का कर दिया गया। इसके पीछे मकसद था कि सीबीआई चीफ बिना किसी दबाव के मुक्त होकर अपना कार्य कर सके।
सीबीआई का गठन 1963 में हुआ था। CBI एजेंसी स्थापना की सिफारिश भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए गठित संथानम समिति की सिफारिश के आधार पर 1963 में गृह मंत्रालय के अंतर्गत की गई थी।
फुल टाइम डायरेक्टर को लेकर याचिका
सीबीआई के डायरेक्टर की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट ने हाई पावर कमेटी की बैठक दो मई से पहले करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा गया था कि सीबीआई में फुल टाइम डायरेक्टर की नियुक्ति की जाए। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल नागेश्वर राव की अगुवाई वाली बेंच ने मामले में केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट में एनजीओ कॉमन कॉज की ओर से अर्जी दाखिल कर कहा गया था कि केंद्र सरकार को निर्देश जारी किया जाए कि वह सीबीआई में रेग्युलर डायरेक्टर की नियुक्ति करें।
देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई के डायरेक्टर की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट ने हाई पावर कमेटी की बैठक दो मई से पहले करने को कहा है। सीबीआई डायरेक्टर का चुनाव करने की एक प्रक्रिया है जिसका पालन करना होता है उसके बाद ही इसका चयन होता है। सीबीआई पर विपक्षी दलों और कुछ मौकों पर कोर्ट की ओर से भी टिप्पणी की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक वक्त एक मामले की सुनवाई करते हुए टिप्पणी की थी कि सीबीआई पिंजरे में बंद ऐसा तोता बन गई है जो अपने मालिक की बोली बोलता है। कुछ एक टिप्पणी के बावजूद देश के किसी भी बड़े मामले की जांच की सिफारिश सीबीआई से ही कराने की होती है। किसी राज्य में क्राइम की कोई बड़ी घटना होती है तो पीड़ित पक्ष भी इसी जांच एजेंसी से जांच की मांग करता है। 2 मई से पहले बैठक होनी है और सीबीआई का नया डायरेक्टर कौन होगा इसकी कवायद शुरू हो चुकी है।
-एजेंसियां

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