किशोर बियानी ने बताया, फ्यूचर ग्रुप ने रिलायंस के साथ डील क्‍यों की?

पिछले साल 30 जून को अमेजन समर्थित प्राइवेट इक्विटी फर्म समारा कैपिटल ने फ्यूचर रिटेल लिमिटेड के साथ एक नॉन-बाइंडिंग टर्म शीट साइन की थी। दोनों तरफ से हुए कम्युनिकेशन के आधार पर ये बात पता चली है कि इस डील के तहत 7000 करोड़ रुपये का निवेश आना था। ये डील अगस्त के अंत में फ्यूचर-रिलायंस के बीच हुई 24,713 करोड़ रुपये की डील से करीब दो महीने पहले हुई थी। किशोर बियानी ने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्हें ऐमजॉन की तरफ से कोई मदद नहीं मिली, जबकि फ्यूचर ग्रुप ने ऐमजॉन से करीब 8 बार मदद मांगी। ऐसे में फ्यूचर ग्रुप के सामने रिलायंस के साथ डील करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था।
अब ऐमजॉन ‘रिलायंस-फ्यूचर डील’ के खिलाफ सिंगापुर मध्यस्थता कोर्ट में जा पहुंचा है। ये मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट तक आ गया है। ऐमजॉन का आरोप है कि फ्यूचर ग्रुप ने कॉन्ट्रैक्ट को तोड़ा है, जिसके तहत फ्यूचर ग्रुप अपना बिजनेस रिलांयस जैसे किसी बिजनेस को नहीं बेच सकता है।
समारा के साथ हुए एग्रिमेंट में क्या था
ऐमजॉन और फ्यूचर ग्रुप के बीच हुए कम्युनिकेशन का जिक्र पहले इसलिए नहीं हुआ क्योंकि वह सिंगापुर मध्यस्थता कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में दिखाए गए थे। समारा के साथ हुए एग्रिमेंट के मुताबिक समारा की तरफ से फ्यूचर ग्रुप के सभी स्मॉल फॉर्मेट वाले सुपरमार्केट बिजनेस को 3000-3500 करोड़ रुपये में खरीदा जाना था और बाद में उसे अपने बिजनेस से मर्ज कर लेना था। इसके अलावा समारा को फ्यूचर ग्रुप का लार्ज फॉर्मेट का सुपरमार्केट बिजनेस और फैशन बिजनेस भी खरीदना था।
दोनों पार्टियों ने एक दूसरे को भेजे थे कई मैसेज और मेल
समारा और ऐमजॉन सितंबर 2018 में आदित्य बिरला ग्रुप की सुपरमार्केट चेन को खरीदने के लिए एक साथ आए थे। समारा और फ्यूचर ग्रुप के बीच टर्म शीट साइन होने के कुछ ही समय बाद 1 जुलाई को फ्यूचर रिटेल के ज्वाइंट एमडी राकेश बियानी ने ऐमजॉन इंडिया के प्रमुख अमित अग्रवाल को एक वाट्सऐप मैसेज भेजा था। मैसेज में लिखा था- अगर टर्म शीट के मुताबिक रीस्ट्रक्चरिंग का विकल्प चुना जाता है तो फ्यूचर रिटेल लिमिटेड एक कंपनी की तरह बना रहेगा और इसकी सब्सिडियरी कंपनी हाइपर मार्केट और अपैरल स्टोर को बिग बाजार और एफबीबी ब्रांड के जरिए ऑपरेट करती रहेगी। साथ ही फ्यूचर रिटेल लिमिटेड ईजीडे, आधार और हेरिटेज के सुपरमार्केट बिजनेस को बेचने पर भी विचार कर सकेगी, जिससे कंपनी का कर्ज का बोझ कम किया जा सके और कंपनी चलती रहे।
फ्यूचर रिटेल को वापस पटरी पर लाना चाहते थे बियानी
समारा और फ्यूचर ग्रुप के बीच 13 मई को साइन हुई टर्म शीट का मकसद ये था कि फ्यूचर रिटेल को 5,500 करोड़ रुपये मिलें, जिससे वह अपना बिजनस वापस पटरी पर ला सके। वहीं जो बिजनस नुकसान वाले हैं, उन्हें इन बिजनेस में रुचि रखने वालों को बेचा जाना था। सितंबर 2020 तक फ्यूचर रिटेल पर करीब 5000 करोड़ रुपये का कर्ज था।
कई विकल्पों पर हुई बात
टर्म शीट साइन होने के दौरान मई और जून में दोनों तरफ से कई मैसेज और ईमेल किए गए। 24 जून को राकेश बियानी ने ऐमजॉन को कई फंडिंग स्ट्रक्चर और विकल्पों को लेकर मैसेज भेजा था। 30 जून को बियानी ने ऐमजॉन के हेड अग्रवाल को बताया कि समारा को फ्यूचर रिटेल के साथ टर्म शीट साइन के संदर्भ में नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट चाहिए। ऐमजॉन ने वह एनओसी दे दी। रिलायंस के साथ फ्यूचर ग्रुप की डील से करीब 48 घंटे पहले ऐमजॉन की ओर से चेतावनी भी दी गई थी।
-एजेंसियां

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