अलकायदा से प्रभावित होकर सोशल मीडिया द्वारा खड़ा कर लिया Khorasan Group

Khorasan Group set up through social media Influenced by al-Qaeda
अलकायदा से प्रभावित होकर सोशल मीडिया द्वारा खड़ा कर लिया Khorasan Group

लखनऊ। सीरिया से संचालित अलकायदा के Khorasan Group का नाम लेकर कानपुर-लखनऊ के कुछ लोकल लड़कों ने यहां भी ऐसा ग्रुप बनाया। ये सब आतंकी ग्रुप इस्लामिक स्टेट से भी प्रभावित हैं। एडीजी (एलओ) दलजीत सिंह चौधरी ने ऐसा दावा किया है। उनका कहना है कि इन लोकल लड़कों ने सोशल मीडिया से ही अपना ग्रुप खड़ा किया। पुलिस का यह भी दावा था कि सोशल मीडिया के जरिए ही ये लोग एक-दूसरे के संपर्क में रहकर आतंकी घटनाओं की तैयारी कर रहे थे।
आईएस की कार्यप्रणाली को कर रहे थे फॉलो
ग्रुप से जुड़े सभी मिसगाइडेड युवक आईएस की कार्यप्रणाली को फॉलो कर रहे थे। यूपी एटीएस के मुताबिक कानपुर, लखनऊ और इटावा के संदिग्धों के ठिकानों से बरामद लैपटॉप, मोबाइल फोन और बड़ी संख्या में आईएस का साहित्य दबिक मिला है। इसके अलावा इनके पास से बम बनाने की कई विधियों से जुड़े मटिरियल भी मिले हैं। लैपटॉप व मोबाइल फोन की पड़ताल की जा रही है। यह भी जानकारी जुटाई जा रही है कि ये कितने लोगों के संपर्क में हैं और किस-किस से चैट करते हैं।
एमपी व तेलंगाना पुलिस कर रही थी निगरानी
सूत्रों के मुताबिक एमपी एटीएस व तेलंगाना पुलिस कई दिनों से इस ग्रुप की हरकतों पर नजर रखे हुए थी। इन सभी के सोशल मीडिया अकाउंट एजेंसियों के निशाने पर थे। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि इनके ट्रेन ब्लास्ट करने की भनक नहीं लगी। ब्लास्ट होने के बाद ही एमपी एटीएस व आईबी ने इनकी धरपकड़ शुरू की। पहले तीन संदिग्धों को एमपी पुलिस ने पिपरिया से गिरफ्तार कर लिया। इनकी निशानदेही पर ही लखनऊ, इटावा व कानपुर में छापेमारी की गई।
आईएस मॉड्यूल्स का ट्रांजिट पॉइंट बना लखनऊ
बीते तीन साल में लखनऊ तेजी से आतंकियों का ट्रांजिट पॉइंट बन रहा है। खासतौर से आईएस मॉड्यूल्स का। पिछले वर्ष लखनऊ में इंदिरानगर से यूपी एटीएस व एनआईए ने संयुक्त अभियान में मोहम्मद अलीम को गिरफ्तार किया। एनआईए का दावा था कि अलीम आईएस से जुड़ा हुआ था। अलीम की निशानदेही पर कुशीनगर से मोहम्मद रिजवान को पकड़ा गया। इन दोनों ने ही लखनऊ में मुंशी पुलिया स्थित एक स्थान पर आईएस के लिए तमाम मीटिंग आयोजित की थी।
‘दबिक’ से भटक रहे हैं युवा
इंटरनेट में वायरल होते जा रहे आईएस के साहित्य दबिक ने सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों की मुश्किलें ज्यादा बढ़ा दी हैं। सोशल मीडिया के जरिए इस साहित्य से भटके हुए युवाओं को आईएस व अन्य आतंकी संगठन खुद से जोड़ने का काम कर रहे हैं। इंटरनेट पर बार-बार इसे सर्च करने वाले भटके युवा आतंकी संगठनों के निशाने पर आ जाते हैं।
-एजेंसी

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