केडी हास्पीटल में critical pyloplasty से दो साल के बच्चे को मिली राहत

-critical pyloplasty से मिली राहत, लक्ष्य को हाइड्रोनेफ्रोसिस के चलते पेशाब उतरने में हो रही थी खासी परेशानी
-पेल्विस की एक मेजर धमनी को बचाते हुए क्रिटीकल आपरेशन कर डा. श्याम बिहारी ने पाई सफलता

मथुरा। एनएच-टू के अकबरपुर स्थित KD Hospital, मेडीकल कालेज एंड रिसर्च सेंटर के चिकित्सकों ने दो साल के एक बच्चे की हाइड्रोनेफ्रोसिस का इलाज करने में सफलता हासिल की है। बच्चा लक्ष्य की किडनी की पेशाब रुकने से फूलने वाली पेल्विस की एक मेजर धमनी को बचाते हुए आॅपरेशन कर पाइलोप्लास्टी के एक क्रिटीकल आॅपरेशन को सफलता पूर्वक अंजाम दिया गया है। इससे अब बच्चे लक्ष्य के चेहरे पर मुस्कान दिख रही है। वह अब अपने माता-पिता के साथ किलकारी भर रहा है। बच्चे के माता-पिता लक्ष्य के चेहरे की मुस्कान देख हास्पीटल के चिकित्सक और प्रबंधन का आभार जता रहे हैं।

केडी हास्पीटल मेडीकल कालेज के आईसीयू वार्ड में मौजूद जिला पलवल के गांव भूपगढ निवासी लक्ष्य के पिता बलराम बताते हैं कि उनको इस हास्पीटल के बारे में पूर्व में जानकारी यहां पर आॅपरेशन करा चुके मथुरा के कोटा निवासी हरिराम से हुई। उसने नववर्ष में 2 जनवरी को दो वर्षीय लक्ष्य को हास्पीटल में भर्ती कराया। यहां दो दिन पूर्व आॅपरेशन होने के बाद अब बच्चा अच्छी तरह से पेशाब कर रहा है। उसकी कई महीनों बाद लौटी मुस्कराहट ने हमारा चैन लौटा दिया है। बलराम के अनुसार वह इससे पूर्व लाइफ लाइन पलवल में अल्ट्रासाउंड करा चुका है। इसके बाद उसे केसी हास्पीटल मेें जांच के बाद पाइलोप्लास्टी कराने की सलाह दी। वहां ज्यादा खर्चा बताने के चलते वह वहां आॅपरेशन कराने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
दूसरी ओर आॅपरेशन करने वाली टीम के प्रभारी डा. श्याम बिहारी ने बताया कि लक्ष्य की जांच पूर्ण होने के बाद हाईड्रोनेफ्रोसिस साबित हुआ। बच्चे की किडनी की पेल्विस का उपरी भाग पेशाब में रुकावट के चलते फूल जाता था। इस भाग को पेल्वियूरेटिक जंक्शन कहते हैं। यहां मौजूद एक बडी धमनी को बचाकर काटी गई पेल्विस को आपस में फिर से जोड दिया गया है। इससे पेशाब उतरने में कोई बाधा नहीं रही। वह कहते हैं कि बच्चों में ये जन्मजात बीमारी के रुप में भी हो सकती है। डा. श्याम बिहारी को आॅपरेशन थियेटर में डा रुमान राणा, डा. विदुषी शर्मा और डा. शोभा अग्रवाल ने सहयोग किया।

इन लक्षणों से पहचानें बच्चों में हाइड्रोनेफ्रोसिस-डा. शर्मा

जयपुर के एसएमएस हास्पीटल में एचओडी रहे और सर्जन डा. श्याम बिहारी शर्मा बताते हैं कि ऐसे छोटे बच्चे, जो कम पेशाब करते हैं। पेशाब करते समय जोरों से रोते हैं। पेशाब न आने के कारण जिन बच्चों का पेट फूल जाता है। उन बच्चों के माता-पिता को लक्ष्य के माता पिता की तरह से जागरुक बनना चाहिए। उन्हें अपने ऐसे बच्चे को केडी हास्पीटल में जरुर दिखाने आना चाहिए। इससे समय रहते बच्चे को हाईड्रोनेसिस से मुक्ति दिलाई जा सके।

‘लक्ष्य‘ को जीवनभर का सुख देकर साबित की योग्यता

आरके ग्रुप के चैयरमेन डा. राम किशोर अग्रवाल और एमडी मनोज अग्र्रवाल ने कहा कि लक्ष्य को जीवन भर का सुख देकर आॅपरेशन टीम अपनी योग्यता को साबित किया है। डीन डा. मंजुला बाई केएच, एडीशनल डीन डा. जेके शर्मा, एकेडमिक एंड रिसर्च विंग के निदेशक डा. अशोक धनविजय, अरुण कुमार अग्रवाल ने हास्पीटल में critical pyloplasty आॅपरेशन कर बच्चे लक्ष्य को नई जिंदगी देने पर आॅपरेशन टीम को बधाई दी है।