KD Hospital में छोटी आंत से बनाई बड़ी आंत

सर गंगाराम हास्पीटल दिल्ली में सेवा कर चुके डा. सम्राट रे ने KD Hospital में किया ऑपरेशन

अल्सरेटिव कोलाइटिस से संक्रमित बड़ी आंत को निकाल कर मरीज राकेश देवी को दिया नया जीवन

मथुरा। मल्टी स्पेशियेलिटी KD Hospital के गेस्ट्रो सर्जरी विभाग के सर गंगाराम हास्पीटल दिल्ली में सेवा कर चुके डा. सम्राट रे ने अल्सरेटिव कोलाइटिस से संक्रमित बड़ी आंत को निकाल कर मरीज राकेश देवी को नया जीवन दे दिया है। उन्होंने दो चरणों ऑपरेशन में छोटी आंत से ही बड़ी आंत बनाकर उसे मलद्वार से जोड दिया है। इससे मरीज को अब बड़ी आंत और मलाशय के घावों से आ रहे बेइंन्तहा निकलने वाले खून से न केवल मुक्ति मिल गई है, अपितु रक्तस्त्राव से होने वाली असहनीय पीडा से भी निजात मिल गई है। अब राकेश देवी को काॅफी राहत में है। मरीज के पति संजय सिंह ने बताया उससे आगरा और दिल्ली के कई नामीगिरामी हास्पीटलों ने दोनों चरणों के आॅपरेशन के तीन से साढे चार लाख रुपये जमा करने को कहा था। जब केडी हास्पीटल में यही काम 45 हजार के ओटी चार्ज और इतनी ही की दवा के साथ नव्वे हजार में ही पूरा हो गया।
मल्टी स्पेशियेलिटी केडी हास्पीटल की आइपीडी में मथुरा की कोलाहर गांव निवासी मरीज राकेश देवी के पति संजय सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी को मलद्वार से रक्तस्त्राव, पेट दर्द और वजन घटने की समस्या से पांच साल से पीडित थीं। इसके लिए उन्होंने हाथरस में तीन माह तक इलाज कराया। मथ्ुाुरा के एक नर्सिंग होम से दो साल तक इलाज कराया। जबकि अलीगढ मुस्लिम विवि में भी दो साल तक इलाज कराया। लेकिन स्थाई फायदा नहीं मिल पा रहा था। वे अपने पडोसी की सलाह पर केडी हास्पीटल की ओपीडी में डा. सम्राट रे से आकर मिला। उन्होंने जांचों के आधार पर संजय सिंह को बताया कि मरीज को अल्सरेटिव कोलाइटिस बीमारी है। जो कि बहुत ही कम मरीजों को होती है। इसके लिए दो या तीन चरणों का आॅपरेशन किया जाता है। परिजनों की सहमति से डा. सम्राट रे, डा. जितेंद्र राना, योगेश, प्रियंका, एनथिएस्ट डा. मंजू सक्सेना ने आॅपरेशन कर दिया। डा. सम्राट रे ने बताया कि आईपीएए नाम के इस आॅपरेशन को दो या तीन चरणों में पूरा किया जाता है। पहले चरण में पूरी बडी आंत एवं गुदा को निकाल दिया जाता है। साथ ही छोटी आंत को ही फोल्ड कर बडी आंत बनाते हुए मलद्वार से जोड देते हैं। इस क्रिया को जे-पाउच कहा जाता है। इसी दौरान छोटी आंत को पेट से बाहर लाकर अस्थाई मलद्वार बना दिया जाता है। इस मलद्वार को 12 हफ्ते बाद द्वितीय चरण में बंद कर दिया जाता है। तब आॅपरेशन पूरा हो पाता है। इस आॅपरेशन के बाद बडी आंत में कैंसर का खतरा पूरी तरह से टल जाता है। छह से एक साल में व्यक्ति सामान्य जीवन जीने लगता है। इस आॅपरेशन के कराने के बाद मरीज होने वाले जोडों के गठिया दर्द, चमडे की परेशानियां, नेत्ररोग, यकृत और पित्ताशय की परेशानियां से भी बच जाता है।

मथुरा के एकमात्र गेस्ट्रो सर्जन ब्रजवासियों की सेवा कर अभिभूत
सर गंगाराम हास्पीटल नईदिल्ली में सेवा कर चुके डा. सम्राट रे ने बताया कि ये आॅपरेशन दुलर्भ होते हैं। सर गंगाराम में भी 3-4 साल में मात्र 15-20 आपरेशन हो पाते हैं। केडी हास्पीटल में मरीज राकेश देवी का आॅपरेशन ओपन विधि से किया गया। इसमें 6-8 घंटे लगे। स्टेपलर विधि से आॅपरेशन करने पर आॅपरेशन में 2 घंटे की बचत तो हो जाती है। मगर 20000-30000/-रुपये अधिक खर्च हो जाते हैं। गेस्ट्रो सर्जन डा. सम्राट रे ने ब्रजवासियों से अपील करते हुए कहा कि वे अपनी गेस्ट्रो प्राब्लम यानी आमाशय, आंत, मल, यकृत, पित्ताशय जैसी समस्याओं के इलाज और आॅपरेशन के लिए उनसे मिलें। उनको इन समस्याओं के लिए दिल्ली और आगरा जाने की अब आवश्यकता नहीं है। वे ब्रजवासियों की सेवा कर खुद को सम्मानित महसूस कर रहे हैं।

विभिन्न बीमा कम्पनियों की ओर से स्वास्थ्य लाभ पाएं-डा. राम किशोर अग्रवाल
आरके एजुकेशन हब के चैयरमेन डा. राम किशोर अग्रवाल, वाइस चैयरमेन पंकज अग्रवाल और एमडी मनोज अग्रवाल ने कहा कि गेस्ट्रो सर्जन डा. सम्राट रे ब्रज क्षेत्र के एकमात्र गेस्ट्रो सर्जन हैं। वे केडी हास्पीटल में बडी संख्या में आने वाले गेस्ट्रो प्राब्लम वाले मरीजों को राहत प्रदान कर रहे हैं। ऐसे में ब्रजवासियों को उनकी सेवाओं का लाभ लेना चाहिए। उनको ग्रेस्ट्रो प्राब्लम के लिए दिल्ली और आगरा भागने की जरुरत नहीं उनको केडी हास्पीटल आना चाहिए। मल्टी स्पेशियेलिटी केडी हास्पीटल में कारपोरेट हास्पीटलों की अपेक्षा काफी कम कीमत पर इलाज करा सकते है। इसके लिए विभिन्न बीमा कम्पनियों की फ्रैंचाइजी भी है। इससे इन कम्पनियों की ओर से भी इलाज कराया जा सकता है।

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