KD Hospital गरीब मनोरोगियों के चेहरे पर ला रहा मुस्कान

KD Hospital में स्क्रीजोफ्रेनिया से पीडित दर्जनों मरीजों की दवाओें का भी किया जा रहा इंतजाम
मथुरा। आरके एजुकेशन हब के केडी हास्पीटल का मनो चिकित्सा विभाग मरीजांे के प्रति अपनी सेवा को लेकर खासे चर्चा में हैं। मनो रोगों से पीडित मरीजों को विभाग कई बार अपने पास से भी दवा दिलवाने में भी पीछे नहीं रहते हंै। मनोचिकित्सा विभाग अब तक दर्जनांे मरीजों को पूरे इलाज के दौरान अपनी तरफ से और कुछ अन्य दानदाताओं की ओर से दवा दिलवा रहे हैं। कई मनो रोगियों को वे न केवल मनोरोग से छुटकारा दिलवा चुके हैं, अपितु मरीजों के परिजनों को भी उनका स्वस्थ और मनोरोग मुक्त परिजन दे चुके हैं। इससे उनके चेहरे पर स्थाई मुस्कान आ चुकी है।

मनोचिकित्सा विभाग के एचओडी डा. विनय श्रीवास्तव एवं डा.गौरव सिंह बोले-केडीएमसीएचआरसी की तमाम निःशुल्क सुविधाएं कर रहीं सहयोग

केस संख्या-1
छाता के निकट एक गांव निवासी श्यामवती स्कीजोफ्रेनिया नाम के मनोरोग से पीडित होने के चलते आगरा स्थित मानसिक आरोग्य शाला में कई साल इलाज करा चुकी हैं। इस मनोरोग में मरीज को काला जादू या टोना टोटका कराए जाने का हमेशा डर बना रहता है। ढाई साल पूर्व उन्हें केडी हास्पीटल के मनोरोग विभाग में गायत्री ने भर्ती कराया तो जांच के दौरान मालुम पडा कि उन्हें ह्दय रोग भी है। इससे बार-बार पूरे शरीर पर सूजन आ रही है। दो-दो बीमारियों की हकदार इस विधवा महिला के कंधे पर खुद समेत सात प्राणियों के पालन पोषण की जिम्मेदारी है। घर के मुखिया भी इस दुनिया में नहीं हैं। जबकि परिवार की कुल सालाना खेती से आय 25-27 हजार रुपये से ज्यादा नहीं है।
केस संख्या-2
बिहार पटना के साखी सराय जिला निवासी शिव कुमार सात साल पूर्व वृंदावन में आए। उनका पुत्र अभिमन्यु कुमार को बाइपोलार मूड डिसओडर नामक मानसिक रोग से पीडित था। चार बच्चों का पिता अभिमन्यु अपनी पत्नी के साथ-साथ मां बाप के साथ भी मारपीट कर डालता था। दौरा पडने पर वह घर से भाग निकलता था। सामान तोड डालता था। अभिमन्यु की मां मिथलेश देवी ने बताया उसका रांची में दो साल इलाज चला। आगरा मानसिक आरोग्यशाला में इलाज के दौरान मरीज चादर बिस्तर छोड कर तक चला आया था। केडी हास्पीटल में दो साल से अब तक तीन बार भर्ती रहा है। हमारे पास तो अभिमन्यु के इलाज तक को पैसे नहीं थे। तब केडी मेडिकल कालेज, हास्पीटल एंड रिसर्च सेंटर में भर्ती होने पर बेड चार्ज और पैथोलाॅजीकल जांचे निशुल्क हुईं। डा. गौरव सर 1000 से लेकर 1100 रुपये तक की दवाएं अपनी ओर से दिलवाते रहे हंै। यहां के इलाज से फायदा होने के बाद अभिमन्यु आज एक सिक्योरिटी गार्ड के रुप में नौकरी कर रहा है।

KD Hospital पाॅलीक्लीनिक की ओपीडी में एक विशेष वार्ता के दौरान मनोचिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डा. विनय कुमार श्रीवास्तव और चिकित्सक डा. गौरव सिंह ने बताया कि केडी हास्पीटल में आई इस मरीज श्यामवती और अभिमन्यु की दयनीय हालत के चलते उन्होंने कुछ महीनों तक तो अपनी तरफ से दवाआंे का इंतजाम किया। बेड चार्ज, पैथोलाॅजीकल जांचें केडी मेडिकल कालेज, हास्पीटल एंड रिसर्च सेंटर में भर्ती होने के चलते निशुल्क होती रहीं। अब दवाओं के लिए एक दानदाता ने श्यामवती के लिए दो हजार रुपये प्रतिमाह देना स्वीकार कर लिया है। इससे मरीज श्यामवती दवाएं सुचारु रुप से दी जा रहीं हैं। अभिमन्यु के लिए भी दवाएं दी जा रही हैं। गरीब मरीजों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए कई अन्य दानदाता भी आगे आने लगे हैं। डा. गौरव सिंह ने बताया कि केडीएमसीएचआरसी के मनो चिकित्सा विभाग में मरीजों की ओपीडी प्रतिमाह हजार मरीजों से उपर पहुंच गई है। मरीजांे ने केडी हास्पीटल में कम खर्च और उत्तम इलाज को देखते हुए अब रुख कर लिया है।

चिकित्सक होते हैं जीते जागते भगवान-डा. राम किशोर अग्रवाल

आरके एजुकेशन हब के चैयरमेन डा. राम किशोर अग्रवाल, वाइस चैयरमेन पंकज अग्रवाल और एमडी मनोज अग्रवाल ने कहा कि चिकित्सक इस धरती पर जीते जागते भगवान होते हंै। उन्हंे मनुष्य मात्र के प्रति सेवा का भाव बनाए रखना चाहिए। हर चिकित्सक को डा. गौरव सिंह की तरह से हर संभव मदद मरीजों की करनी चाहिए। हर चिकित्सक अपनी ओथ के दौरान दिए वचनों की लाज रख ले तो समाज और राष्ट्र का परिदृष्य ही बदल जाएगा। डा. गौरव का यह कार्य काबिले तारीफ है।

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