कश्‍मीर: दहशत में आतंकी, लश्‍कर चीफ बनने को कोई तैयार नहीं

श्रीनगर। पाकिस्तानी आतंकवादी अबू इस्माइल के पिछले हफ्ते एक एनकाउंटर में मारे जाने के बाद आतंकियों में दहशत बढ़ गई है। उनमें खौफ इस कदर है कि अब कश्मीर में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का चीफ बनने को कोई आतंकी तैयार ही नहीं हो रहा। जम्मू और कश्मीर पुलिस के महानिदेशक एस. पी. वैद्य ने यह जानकारी दी है।
घाटी में नए लश्कर चीफ की भर्ती को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में वैद्य ने कहा कि मैंने सुना है कि लश्कर में कमांडर पोस्ट के लिए वेकन्सी है, लेकिन कोई भी आवेदन करने को तैयार नहीं है। जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा आयोजित तीन दिवसीय वॉटर स्पॉर्ट फेस्टिवल का उद्घाटन करने के बाद वैद्य ने स्थानीय आतंकियों से हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में शामिल होने का अनुरोध किया। उन्होंने आगे कहा कि बड़े-बुजुर्गों, धर्मगुरु, माता-पिता और राजनेता सभी से मैं अपील करता हूं कि वे बच्चों को समझाएं कि क्या बुरा है और क्या अच्छा है। युवाओं को सही रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें, जिससे वे जीवन में आगे बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि खून-खराबे से कुछ भी हासिल नहीं होगा।
वैद्य ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हाल में 60 युवाओं को आतंकवाद के रास्ते से बचाया और उन्हें सही परामर्श दिया। हमें जिन भी युवाओं के बारे में जानकारी मिल रही है, हम परामर्श दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे हमारे बच्चे हैं और हम नहीं चाहते कि वे गलत रास्ते पर जाएं। वैद्य ने कहा कि सुरक्षा कर्मियों की पूरी कोशिश है कि युवाओं को आतंकवाद और ड्रग्स से दूर रखा जाए।
गौरतलब है कि पिछले गुरुवार को एक मुठभेड़ में अमरनाथ यात्रियों पर हमले का मास्टरमाइंड अबू इस्माइल मारा गया था। सुरक्षा बलों ने नौगाम के अरीगाम इलाके में उसे ढेर कर दिया था। वह लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर था और उसी ने अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमले की पूरी साजिश रची थी।
इस दौरान आतंकियों के खिलाफ सुरक्षा बलों के मास्टर प्लान की भी जानकारी सामने आई थी। एक अधिकारी ने बताया था कि एजेंसियों का जोर इस बात पर है कि आतंकी संगठन जिस भी दहशतगर्द को हमलों की जिम्मेदारी सौंपे, उसे उसके नापाक मंसूबे में कामयाब करने के लिए ज्यादा वक्त ही न दिया जाए। ऐसे में सुरक्षा बलों और केंद्रीय एजेंसियों की पूरी कोशिश रहती है कि शीर्ष कमांडर को उसके ऑपरेशन की दिशा में ज्यादा कुछ करने ही नहीं दिया जाए, जिससे आतंकी संगठन में एक हताशा का माहौल पैदा होगा। अब जम्मू-कश्मीर पुलिस को स्थानीय लोगों से भी पूरी मदद मिल रही है और इसका असर भी दिखने लगा है।
-एजेंसी