गीत गुंजन काव्य संग्रह का कार्ष्णि महाराज ने किया विमोचन

मथुरा। रमणरेती में आयोजित एक काव्य गोष्ठी में बृजभाषा के रस सिद्ध कवि सुरेश चतुर्वेदी के काव्य संग्रह ‘गीत गुंजन’ का विमोचन कार्ष्णि स्वामी गुरुशरणानंद के द्वारा किया गया। काव्य संग्रह का संपादन पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया द्वारा किया गया है। कवि सुरेश चतुर्वेदी द्वारा रचित, ऐसौ गीत सुनाओ प्यारे जाते प्यार बढ़े। पकर अंगुरिया नेह पंथ पर हम हर द्वार चढ़े, कविता का सस्वर पाठ राधागोविन्द पाठक ने किया।

महाराजश्री ने इस अवसर पर आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि बृजभाषा केवल बृज क्षेत्र की नहीं संपूर्ण देश की सबसे अधिक मिठलोनी भाषा है और उसमें काव्य रचना का यह प्रयास बहुत ही वंदनीय है, अभिनंदनीय है। निश्चित रूप से इससे प्रेरणा प्राप्त करके बृज भाषा में और भी रचनाओं की प्रस्तुति की जाएगी।

पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया ने कवि सुरेश चतुर्वेदी का परिचय देते हुए कहा कि सुरेश चतुर्वेदी बृजभाषा के शीर्षस्थ कवि थे कविता उनके हृदय में बसी हुई थी। कण-कण में ब्रजभाषा थी और उनका बहुत बड़ा योगदान यह रहा है कि उन्होंने ब्रजभाषा के कवियों को प्रोत्साहित करने के लिए हाथरस के दाऊ जी मेले में बृजभाषा कवि सम्मेलन की नींव डाली। अनेक वर्षों तक बृज भाषा के कवि सम्मेलनों का संयोजन किया। नवोदित कवियों को उसमें आमंत्रित करके प्रोत्साहित किया। अलीगढ़ की प्रदर्शनी में भी उन्होंने बृजभाषा कवि सम्मेलन के लिए वहां के आयोजकों को प्रोत्साहित किया। बहुत अल्प आयु में हमें छोड़ गए और आज उनकी पुस्तक का विमोचन महाराजश्री के आशीर्वाद के साथ हो रहा है। यह भी एक बहुत ही ऐतिहासिक क्षण है। हमारे परम सिद्ध महाराजश्री ने उनकी पुस्तक का विमोचन किया।

इस मौके पर राधा गोविंद पाठक, पदमश्री मोहन स्वरूप भाटिया, विद्यासागर विकल, मुकेश चतुर्वेदी, गोपाल चतुर्वेदी, आनंद चतुर्वेदी, आचार्य अशोक कुमार जोशी, किशन चतुर्वेदी, राजीव श्रीवास्तव, डॉक्टर एसपी गोस्वामी ने महाराजश्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।

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