कर्नाटक: संकटमोचक सिद्धारमैया ही बने कांग्रेस के गले की फांस

मेंगलुरु। कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस सरकार बनने के बाद से ही राज्य की सियासत में मजबूत पकड़ रखने वाले पूर्व सीएम सिद्धारमैया का रूठना सीएम एचडी कुमारस्वामी के लिए भारी पड़ता दिख रहा है। सियासी हलके में तो यहां तक चर्चा है कि 5 जुलाई को आने वाले बजट से पहले ही कुमारस्वामी की कुर्सी हिल सकती है। अब खबर आ रही है कि असंतुष्ट सिद्धारमैया से मिलने एक मंत्री समेत कांग्रेस के 9 विधायक दक्षिण कन्नडा जिले के बेलतानगडी पहुंच रहे हैं। पूर्व सीएम के रुख को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में कुछ बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।
पिछले कुछ दिनों से सिद्धारमैया लगातार सीएम कुमारस्वामी को लेकर अपना असंतोष जाहिर कर रहे हैं। इससे न केवल जेडीएस विधायकों में रोष बढ़ रहा है बल्कि कांग्रेस के भी कई नेताओं में असंतोष फैल रहा है।
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, जो जेडी (एस)-कांग्रेस समन्वय समिति के अध्यक्ष भी हैं, का कहना है कि वह इस समय पूर्णतया ब्रेक पर हैं और अपने उपचार के दौरान फोन कॉल्स भी नहीं उठा रहे हैं। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि उनकी अपने विश्वसनीय एसटी सोमशेखर, बी सुरेश और एन मुनिरत्न के साथ लगातार बातचीत जारी है।
कर्नाटक की गठबंधन सरकार अपने ही मंत्रियों और विधायकों की नाराजगी के चलते भंवर में फंसती दिख रही है। वहीं कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं की ओर से बातचीत के प्रयास बिल्कुल नहीं दिख रहे हैं। कर्नाटक सरकार के लिए सबसे ज्यादा मुश्किल यह भी है कि कांग्रेस के अधिकतर नाराज नेता सरकार गिराने के लिए बीजेपी से संपर्क कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर अब असंतुष्ट पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से विधायकों की मुलाकात की खबर सामने आने के बाद गठबंधन सरकार की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
कांग्रेस के संकटमोचक से पार्टी को संकट में डालने वाले बन गए सिद्धारमैया
कर्नाटक के विधानसभा चुनावों के परिणामों के बाद से ही पूर्व सीएम सिद्धारमैया एक असंतुष्ट शख्स के तौर पर उभर कर सामने आए हैं। आजकल सिद्धारमैया लगभग रोजाना ही सीएम कुमारस्वामी को लेकर अपना असंतोष जाहिर कर रहे हैं। इससे न केवल जेडीएस विधायकों में रोष बढ़ रहा है बल्कि कांग्रेस के भी कई नेताओं में असंतोष फैल रहा है।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि कोऑर्डिनेशन कमेटी के चेयरमैन होने के नाते उम्मीद थी कि सिद्धारमैया कांग्रेस-जेडीएस के गठबंधन के भविष्य को लेकर आश्वस्त करेंगे लेकिन दुर्भाग्य से वह सरकार के भविष्य पर शंका जता केवल समस्या ही खड़ी कर रहे हैं। कांग्रेस के कई विधायकों और नेताओं का कहना है कि कुमारस्वामी सरकार के पूर्ण नए बजट पेश करने पर सिद्धारमैया का विरोध अनावश्यक है क्योंकि हर नई सरकार बजट पेश करती है।
एक कांग्रेस नेता ने पूछा कि आप कैसे यह उम्मीद कर सकते हैं कि नई विधानसभा एक ऐसे बजट को स्वीकार कर लेगी जो अप्रूव्ड नहीं है? उन्होंने सिद्धारमैया को यह भी याद दिलाया कि कुमारस्वामी के बजट पेश करने से कांग्रेस सुप्रीमो राहुल गांधी को कोई दिक्कत नहीं है। जेडीएस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि सिद्धारमैया बजट से जुड़े मुद्दे को पब्लिक में ले जाने की बजाय कोऑर्डिनेशन कमेटी के सामने उठा सकते थे।
उन्होंने कहा कि जेडीएस और कांग्रेस के समझौते के मुताबिक केवल जेडीएस की तरह से महासचिव के दानिश अली और कांग्रेस की तरफ से केसी वेणुगोपाल ही मीडिया से बात करने को अधिकृत हैं। कांग्रेस और जेडीएस के कुछ विधायकों का यह भी मानना है कि जो वीडियो क्लिप सामने आई है वह बेल्तांगढ़ी के उस नैचुरोपैथी सेंटर की है जहां सिद्धारमैया इलाजरत हैं। ऐसा कहा है कि यह सिद्धारमैया के खेमे का ही काम है जिसका लक्ष्य कंफ्यूजन पैदा करना है।
जेडीएस के एक मंत्री ने कहा कि वह न तो बीमार हैं और न ही किसी बीमारी से पीड़ित हैं। उनके मुताबिक सिद्धारमैया वहां केवल आराम करने गए हैं। वह सवाल उठा रहे हैं कि ऐसे में क्यों कई विधायक और पार्टी नेता उनसे मिलने बेंगलुरु से धर्मस्थल जा रहे हैं? यह केवल दुविधा पैदा करने के लिए किया जा रहा है।
हालांकि कांग्रेस के एक विधायक ने सिद्धारमैया का बचाव करते हुए कहा कि पूर्व सीएम ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लग रहा है कि कुमारस्वामी और डेप्युटी सीएम जी परमेश्वर उनकी मेहनत का फल खा रहे हैं। विधायक के मुताबिक सिद्धारमैया शायद यह भी दिखाना चाह रहे हैं कि अब भी कांग्रेस विधायकों और गठबंधन सरकार पर उनका नियंत्रण है।
-एजेंसी

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