कर्नाटक: भाजपा ने सरकार बनाने का दावा पेश किया

बेंगलुरु। कर्नाटक में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के फौरन बाद येदियुरप्पा समेत पार्टी के नेताओं ने राजभवन जाकर गवर्नर से मुलाकात की। 104 सीटें जीतने वाली भाजपा ने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। ऐसे में अब सबकी नजरें राज्यपाल वजुभाई आर. वाला के फैसले पर टिकी हैं कि वह भाजपा  या कांग्रेस+जेडीएस में से किसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं।
आइए समझते हैं कि ऐसी परिस्थिति में विशेषज्ञों की क्या राय है:
गोवा, मणिपुर की तर्ज पर मिले न्योता
कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिस तरह गोवा और मणिपुर में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरने के बाद कांग्रेस ने सरकार बनाने की पेशकश की थी, BJP को भी वही तर्क सामने रखना चाहिए। दोनों राज्यों में कांग्रेस को ज्यादा वोट मिलने के बावजूद भाजपा ने क्षेत्रीय पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाई थी।
सबसे बड़ी पार्टी को मिले न्योता
पूर्व अटर्नी जनरल सोली सोराबजी का मानना है कि पहले सबसे बड़ी पार्टी यानी भाजपा को न्योता दिया जाना चाहिए। सदन के फ्लोर पर वह 7 से 10 दिन में अपना बहुमत साबित करे। अगर वह पार्टी बहुमत साबित नहीं कर सकी तब अगली सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन को न्योता दिया जाना चाहिए। अगर वह भी बहुमत साबित नहीं कर सके, ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति शासन लगना चाहिए।
राज्यपाल के विवेक पर सब निर्भर
कई तरह के तर्कों से हटकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार बनाने का न्योता देने का अधिकार राज्यपाल को उनके विवेक के आधार पर दिया है। लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष कश्यप का कहना है कि राज्यपाल को किसी भी पार्टी, चुनाव से पहले या बाद में बने गठबंधन को न्योता देना होता है परंतु वह इस बात से संतुष्ट हों कि जिसे वह न्योता दे रहे हैं, वे सदन में बहुमत साबित कर सकेंगे।
यहां तक माना गया है कि राज्यपाल का फैसला गलत भी हो सकता है लेकिन फिर भी उनसे यह अधिकार छीना नहीं गया है। हालांकि, बहुमत सदन में फ्लोर पर ही साबित करना होगा। जस्टिस आरएस सरकारिया कमीशन ने इस बारे में विकल्पों और उनकी प्राथमिकताओं को चिह्नित किया है लेकिन साथ ही राज्यपाल के खुद के फैसले को भी अहम बताया है।
कौन होगा मुख्यमंत्री?
कर्नाटक की स्थिति पर कश्यप ने बताया कि कैसे पहले के कई उदाहरणों से कर्नाटक की संभावनाओं को समझा जा सकता है। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी पार्टी के नेता को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है या चुनाव के बाद गठबंधन होने पर उसके किसी नेता को भी मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।
इस बारे में भी राज्यपाल अपने विवेक से फैसला कर सकते हैं क्योंकि संविधान में जोड़-जोड़ कर सरकार बनने पर राज्यपाल को कैसे मुख्यमंत्री की नियुक्ति करनी है, इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है। सरकारिया कमीशन ने किसी एक पार्टी या चुनाव से पहले बने गठबंधन को बहुमत न मिलने पर मुख्यमंत्री चुनने के लिए पार्टियों की प्राथमिकता इस तरह तय की है-
1. चुनाव से पहले बना गठबंधन।
2. निर्दलीयों के समर्थन से सरकार बनाने की पेशकश करने वाली सबसे बड़ी पार्टी।
3. चुनाव के बाद बना गठबंधन जिसमें सभी दल मिलकर सरकार बनाएं।
4. चुनाव के बाद बना गठबंधन जिसमें कुछ दल सरकार बनाएं और बाकी बाहर से समर्थन दें।
कमीशन ने यह साफ किया है कि इन प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए राज्यपाल को अपने विवेक के आधार पर उस नेता को चुनना होता है जो उनके विचार में सदन में बहुमत साबित कर सके।
-एजेंसी

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