बिहार उपचुनाव में अब तेजस्‍वी यादव के सामने होंगे कन्‍हैया कुमार

बिहार विधानसभा की दो सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव में इस बार प्रत्याशी नहीं बल्कि उनकी टीम के कैप्टन ही मुकाबला करेंगे। ये मुकाबला खासतौर पर महा कांग्रेस ने अपने स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी कर उपचुनाव के मुकाबले को बेहद ही ज्यादा दिलचस्प बना दिया है।
तेजस्वी के सामने ताल ठोकेंगे कन्हैया
अब ये करीब-करीब तय हो चुका है कि इस उपचुनाव में कांग्रेस भी लेफ्ट की तरह बड़ा दांव खेल चुकी है। बिहार कांग्रेस ने मंगलवार को अपने स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी कर दी और इसमें दो नाम बेहद खास हैं। कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी, यानि ये तय हो गया है कि बिहार विधानसभा की दोनों सीटों पर प्रचार के लिए कन्हैया भी शामिल होंगे। उधर यानि RJD के तेजस्वी का प्रचार के लिए जाना तय ही है।
तेजस्वी के दांव का कांग्रेस ने दे दिया जवाब
आखिर तेजस्वी यादव ने बिहार उपचुनाव में बगैर कांग्रेस की सहमति के RJD उम्मीदवार कैसे घोषित कर दिए। महागठबंधन में ले-देकर बिहार में उनके साथ कांग्रेस ही एक बड़ी सहयोगी बची है। बाकी लेफ्ट पार्टियों की राह वैसे भी थोड़ी अलग ही रहती है। ऐसे में तेजस्वी का ये फैसला क्या कन्हैया का कद छोटा बनाए रखने की राजनीति का हिस्सा है?
कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की लिस्ट देखें तो काफी हद तक इस सवाल का जवाब मिल जा रहा है।
क्या कन्हैया से घबराए तेजस्वी?
बिहार में युवा नेताओं की पौध की बात करें तो सीपीआई में कन्हैया को किनारे किए जाने के बाद चिराग और तेजस्वी के बीच ही सियासत की धुरी घूम रही थी मगर चिराग अभी चाचा पारस के साथ पारिवारिक और सियासी दोनों ही संग्राम पर व्यस्त हैं। ऐसे में तेजस्वी के लिए फ्रंटफुट पर खेलना आसान था क्योंकि भाई तेज प्रताप की बगावत के बाद भी लालू का समर्थन उन्हें हासिल है लेकिन अचानक से कन्हैया को कांग्रेस ने अपने पाले में शामिल कर इस धुरी को त्रिकोणीय बना दिया।
सूत्रों ने पहले ही ये संकेत दे दिए थे कि कांग्रेस बिहार में कन्हैया की एंट्री जोर-शोर से कराएगी। ऐसे में तेजस्वी के सामने अपनी बादशाहत को दिखाने के लिए बिहार उपचुनाव ही सबसे मुफीद समय है। शायद इसीलिए तेजस्वी ने बिहार विधानसभा उपचुनाव की दोनों सीटों पर बगैर कांग्रेस की रजामंदी के अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए।
क्या तेजस्वी कन्हैया को मान रहे चुनौती?
तेजस्वी क्या कन्हैया को चुनौती मान रहे हैं? इस सवाल को महागठबंधन की पूर्व सहयोगी और वर्तमान में बिहार की एनडीए सरकार में हिस्सा VIP चीफ मुकेश सहनी के एक पुराने बयान से भी बल मिलता है। जब सहनी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में महागठबंधन से नाता तोड़ा था तो उन्होंने खुलेआम ये आरोप लगाया था कि तेजस्वी युवा नेता के तौर पर खुद से किसी को भी आगे बढ़ते देखना नहीं चाहते। ऐसे में कांग्रेस भी कन्हैया के नाम पर तेजस्वी की टक्कर में एक दूसरा विकल्प देने में कोई कमी नहीं छोड़ेगी।
-एजेंसियां

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