जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा, सुप्रीम कोर्ट में मामला होने के बावजूद सरकार राम मंदिर के लिए कानून बना सकती है

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद सरकार राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बना सकती है। उन्होंने कहा कि विधायी प्रक्रिया द्वारा अदालती फैसलों में अवरोध पैदा करने के उदाहरण पहले भी रहे हैं। न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए एक कानून बनाने की मांग संघ परिवार में बढ़ती जा रही है। कांग्रेस पार्टी से जुड़े संगठन ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस (एआईपीसी) की ओर से आयोजित एक परिचर्चा सत्र में न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने यह टिप्पणी की।
आपको बता दें कि इस साल की शुरुआत में न्यायमूर्ति चेलमेश्वर उच्चतम न्यायालय के उन चार वरिष्ठ न्यायाधीशों में शामिल थे, जिन्होंने प्रेस कॉन्फेंस कर तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के कामकाज के तौर-तरीके पर सवाल उठाए थे।
‘विकल्प नहीं तो अध्यादेश पर सरकार करे विचार’
संघ के सर कार्यवाह भैयाजी जोशी ने कहा था कि अगर राम मंदिर पर कोई विकल्प नहीं बचता है तो सरकार को अध्यादेश पर विचार करना चाहिए। सरकार अगर अध्यादेश लाती है तब हम प्रतिक्रिया देंगे। नरसिंम्हा राव सरकार के दौरान केंद्र ने जो हलफनामा दिया था उस पर काम होना चाहिए। हलफनामा में सरकार ने कहा था अगर विवादित स्थल पर हिंदू धर्म से जुड़ा स्ट्रक्चर था तो इसे उन्हें ही सौंपा जाएगा। अब सब सबूत सबके सामने हैं। इस पर तुरंत फैसला होना चाहिए।’
जहां एक ओर बीजेपी नेता आगामी लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर अयोध्या मामले में बेहद सक्रिय रहते हुए अध्यादेश की बहस छेड़ रहे हैं वहीं, बीजेपी में ही इस फैसले पर सवाल भी खड़े किए जा रहे हैं। संघ विचारक और बीजेपी के करीबी राज्यसभा में सांसद राकेश सिन्हा ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए प्राइवेट मेंबर बिल लाने का ऐलान किया है और इस पर बीजेपी सांसद ने ही सवाल उठाए हैं। बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले ने इस असंवैधानिक करार दिया है।
बता दें कि दलित नेता सावित्री बाई अक्सर पार्टी के खिलाफ बयानबाजी करती रही हैं। उन्होंने कहा कि यह संविधान के धर्मनिरपेक्ष विचार के खिलाफ है।
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, मामला सुप्रीम कोर्ट में है इसलिए हम कुछ नहीं कहेंगे
अयोध्या विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा अगले वर्ष (2019) तक के लिए टालने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने राम मंदिर निर्माण के लिए शुक्रवार को अध्यादेश की मांग दोहराई। इस मामले में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में डेप्युटी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा यह केस सुप्रीम कोर्ट के पास है, हम इसमें कुछ नहीं कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि अयोध्या में हमें रामलला का स्टैचू खड़ा करने से कोई नहीं रोक रहा है।
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, ‘राम मंदिर का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के पास है, हम इस मामले में कुछ नहीं कर सकते हैं लेकिन हमें अयोध्या में रामलला का स्टैचू खड़ा करने से कोई नहीं रोक रहा है। यदि कोई ऐसा करने से रोकता है तो हम देख लेंगे…अयोध्या का विकास करने से हमें कोई नहीं रोक सकता है।’
-एजेंसियां

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