जस्‍टिस चंद्रचूड़ ने कहा, पीड़ित महिला की अनुपस्‍थिति में नहीं होनी चाहिए CJI पर लगे यौन उत्‍पीड़न मामले की जांच

नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश CJI रंजन गोगोई पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप की जांच पीड़ित महिला की अनुपस्‍थिति में नहीं होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के ही जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने मामले की जांच कर रही आंतरिक समिति से कहा है कि वो आरोप लगाने वाली महिला की अनुपस्थिति में जांच न करें क्योंकि इससे सुप्रीम कोर्ट की बदनामी होगी.
रिपोर्ट के मुताबिक़ जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस नरीमन ने मामले की जांच कर रही समिति से मिले और जांच को लेकर अपनी चिंताएं जताईं.
इससे पहले जस्टिस चंद्रचूड़ ने 2 मई को जांच समिति को एक पत्र भी लिखा था कि अगर आरोप लगाने वाली महिला की गैर मौजूदगी में जांच चलती रही तो इससे न्यायपालिका की विश्वसनीयता को नुक़सान पहुंचेगा.
यौन उत्पीड़न की शिक़ायत करने वाली महिला ने ख़ुद को जांच से अलग कर लिया है. उन्होंने सुनवाई में शामिल होने से भी इंकार किया है.
सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा चीफ़ जस्टिस रंजन गोगई पर उनकी पूर्व जूनियर सहयोगी ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है. जस्टिस गोगोई ने इस आरोप से इंकार करते हुए इसे स्वतंत्र न्यायपालिका के लिए एक ‘ख़तरा’ बताया था.
वहीं, वकील उत्सव बैंस ने दावा किया था यौन उत्पीड़न के ज़रिए न्यायपालिका के ख़िलाफ़ ‘साज़िश’ रची जा रही है. बैंस ने दावा किया था कि महिला का केस लड़ने और इस बारे में प्रेस कॉन्फ़्रेंस करने के लिए उन्हें ‘रिश्वत’ की पेशकश की गई थी.
फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय इस मामले की विभागीय जांच कर रही है जिसमें जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बैनर्जी शामिल हैं.
-BBC

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