गुजरात एनकाउंटर्स को लेकर Justice Bedi कमेटी ने खारिज़ किए याचिकाकर्ताओं के आरोप

पत्रकार बीजी वर्गीस और गीतकार जावेद अख्तर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित की गई Justice Bedi कमेटी

नई दिल्‍ली। गुजरात में नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्रित्‍वकाल में 2002 से 2006 के बीच हुए गुजरात एनकाउंटर्स को लेकर Justice Bedi कमेटी की रिपोर्ट आ गई है। पत्रकार बीजी वर्गीस और गीतकार जावेद अख्तर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित की गई जस्टिस एच एस बेदी कमेटी ने अपनी फाइनल रिपोर्ट में उन आरोपों को भी खारिज कर दिया गया है जिनमें कहा गया था कि गुजरात में 2002 से 2006 के बीच मुस्लिम अतिवादियों को चुन-चुन कर बाहर निकाला गया था हालांकि कमेटी ने गुजरात में हुए 17 एनकाउंटर्स में से 3 फर्जी पाए।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस ने अपनी रिपोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी के अध्यक्ष को सौंपी है, इस मॉनिटरिंग कमेटी का गठन 2002-2006 के बीच गुजरात में हुए एनकाउंटर्स की जांच के लिए किया गया था। कमेटी ने उन आरोपों को भी खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि गुजरात में 2002 से 2006 के बीच मुस्लिम अतिवादियों को चुन-चुन कर बाहर निकाला गया था।

गुजरात के पूर्व डीजीपी आर बी श्रीकुमार के उस दावे को भी खारिज किया है जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि मुस्लिमों की हत्या में राज्य की मशीनरी भी शामिल थी। उन्होंने आरोप लगाए थे बड़े पदों पर बैठे अधिकारी और नेता फेक एनकाउंटर कर मुस्लिमों को मारने के लिए मौखिक आदेश देते थे। उस वक्त श्रीकुमार गोधरा कांड के दौरान गुजरात में सशस्त्र इकाइयों के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक थे और 2002 में हुए दंगों के दौरान इंटेलिजेंस डीजीपी भी थे। उन्होंने समिति के सामने अपना बयान दर्ज किया और 2 अन्य आवेदन भी दायर किए।

जस्टिस बेदी की अध्यक्षता वाली समिति को श्रीकुमार के दावों में कोई विश्वसनीय तथ्य नहीं मिला

श्रीकुमार की ओर से किए गए रिप्रेजेंटेशन और स्टेटमेंट सामान्य हैं जो प्रशासनिक निर्णय से संबंधित हैं, जिस पर वे सहमत नहीं थे और ये वही कारण थे जिसकी वजह से राज्य सरकार के सामने उन्होंने पीड़ित होने की बात कही। 229 पन्नों की इस रिपोर्ट में कहा गया कि ये सारे मुद्दे मुस्लिम अतिवादियों के चयन से संबंधित थे जिनके बारे में कोई रिकॉर्ड नहीं है। जस्टिस बेदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि परिस्थितियों की वजह से आरोपों की सत्यता संदेहों के घेरे में है। इसकी वजह से अलग-अलग राज्यों से संबंधित एनकाउंटर के 17 मामलों में सभी समुदाय के पीड़ित पक्ष शामिल हैं। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, केरल और महाराष्ट्र प्रमुख हैं. कमेटी ने कहा कि इन सभी मामलों में एक ही तथ्य समान है कि सभी लोग अपराध से जुड़े हुए थे।

इन मामलों से संबंधित अंतिम रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बेदी ने फरवरी 2018 में दाखिल की थी. यह वही सप्ताह है जब जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश दिया था कि इस मामले की अंतिम रिपोर्ट याचिकाकर्ताओं को भी सौंपी जाए। इन मामलों में याचिकाकर्ता पत्रकार बीजी वर्गीस और गीतकार जावेद अख्तर का नाम भी शामिल है। वर्गीस और जावेद अख्तर दोनों ने अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। उन्होंने 2007 में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और अपील की थी कि 2002 से 20006 के बीच हुए सभी एनकाउंटरों की जांच की जाए।

-एजेंसी

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