जूना अखाड़ा एकसाथ बनाएगा 221 Dalit महिलाओं को संत

प्रयाग में लगने वाले कुम्भ 2019 में जूना अखाड़ा 221 Dalit महिलाओं को संत बनाएगा। मौनी अमावस्या के पहले इन महिलाओं को संत बनने की दीक्षा दी जाएगी। इसके बाद इन्हीं महिला संतों में से पांच को महामंडलेश्वर भी बनाया जाएगा। ऐसा पहली बार होगा जब एक साथ इतनी बड़ी संख्या में दलित महिलाओं को संत बनाया जाएगा। जूना अखाड़ा के प्रमुख संरक्षक महंत हरि गिरि ने बताया कि इन Dalit महिलाओं के अलावा इसी अखाड़े में लगभग तीन सौ दलित व महादलित पुरुष भी संत बनने की दीक्षा ग्रहण करेंगे।

500 है अखाड़े में दलित महिला संतों की संख्या 
बकौल महंत हरि गिरि देश के अलग-अलग हिस्सों में जूना अखाड़ा के लाखों संत हैं। हिमाचल प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, कनार्टक, महाराष्ट्र और नेपाल में सभी वर्गों को मिलाकर लगभग सवा लाख महिला संत हैँ। इनमें से दलित और महादलित महिलाओं की संख्या पांच सौ के आसपास है। कुम्भ में दलित महिला संतों की संख्या में इजाफा हो जाएगा।

जूना अखाड़े में है आठ दलित महामंडलेश्वर
जूना अखाड़े में बड़ी संख्या में दलित जाति के पुरुष और महिला संत पहले से हैं। इनमें से मात्र आठ को ही महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई है जिनमें पांच पुरुष और तीन महिला महामंडलेश्वर हैँ।

संत बनने की प्रक्रिया
संत बनने के पूर्व पुरुष व महिलाओं को मुंडन कराना पड़ता है। उसके बाद उन्हें पीला वस्त्र धारण कर विधिविधान के साथ अपना पिंडदान करना पड़ता है।  उसके उपरांत सम्बंधित अखाड़ों के पदाधिकारी उन्हें दंड धारण कराते हैं।

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