जज लोया केस: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, निष्पक्ष जांच होनी चाहिए

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को जज लोया की मौत की जांच को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने कहा कि इस केस की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे सीबीआई के दिवंगत जज बी. एच. लोया की मौत की जांच को लेकर मीडिया में काफी चर्चा रही। इस मामले में महाराष्ट्र सरकार का पक्ष रखते हुए वकील हरीश साल्वे ने कहा कि जज लोया की मौत दिल का दौरा पड़ने से ही हुई थी।
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि साल्वे ने यह भी कहा कि जज लोया की मौत मामले में किसी तरह की संदेह की कोई बात नहीं है। जज लोया की मौत हार्ट अटैक से बिल्कुल स्वाभाविक हुई थी। साल्वे ने कहा, ‘मीडिया रिपोर्ट्स के बाद 4 न्यायिक अधिकारियों ने जज लोया की मौत की जांच की थी। जांच रिपोर्ट में कोई संदिग्ध बात नहीं पाई गई।’ कोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट रुख रखते हुए कहा कि हमें पूरी निष्पक्षता के साथ सत्य की पड़ताल करनी है। जज लोया की मौत की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
केस की सुनवाई वाली बेंच में जस्टिस डी. वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस ए एम खानविलकर शामिल हैं। भारतीय लोकतंत्र के 70 साल के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जजों जस्टिस चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जज लोया की मौत से संबंधित केस की सुनवाई कर रहे बेंच को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच से यह केस चीफ जस्टिस की बेंच को ट्रांसफर किया गया।
48 साल के जज लोया दिसंबर 2014 में नागपुर में अपने साथी जज की बेटी की शादी में शरीक होने के लिए पहुंचे थे। जज लोया ने वहां तबियत बिगड़ने की बात कही जिसके बाद उन्हें अस्पताल में दाखिल कराया गया। वहां कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई डॉक्टरों ने उनकी मौत हार्ट अटैक से होने की बात कही।
-एजेंसी