जेपी इंफ्राटेक: IDBI पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, 11 सितम्बर को सुनवाई

नई दिल्‍ली। जेपी इन्फ्राटेक को दिवालिया घोषित करने (इंसॉल्वेंसी) की प्रक्रिया पर रोक लगाने के फैसले पर IDBI बैंक की पुनर्विचार की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। सुनवाई के लिए 11 सितम्बर की तारीख तय की है।

IDBI की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अमिताभ राय अौर न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की पीठ के समक्ष दलील दी कि शीर्ष अदालत के कल के स्थगनादेश से कंपनी जेपी इंफ्राटेक एक बार फिर से इसके प्रोमोटरों के हाथों में चल गयी है।
श्री सिंघवी ने पीठ से अपने आदेश में संशोधन का अनुरोध किया हालांकि घर खरीदारों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अजित सिन्हा ने श्री सिंघवी के अनुरोध का पुरजोर विरोध किया।
जेपी इन्फ्राटेक को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने के फैसले पर IDBI बैंक की पुनर्विचार की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।

आईडीबीआई बैंक ने सुप्रीम कोर्ट से अपने आदेश पर दोबारा विचार करने की मांग की है। शीर्ष अदालत ने बैंक की इस याचिका पर 11 सितंबर को सुनवाई का फैसला लिया है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, अमिताव रॉय और ए.एम खानविल्कर की बेंच ने ने बैंक की ओर से पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई की मांग को स्वीकर कर लिया।

बैंक की ओर से अदालत में पेश हुए ए.एम सिंघवी ने कहा कि शीर्ष अदालत के सोमवार के आदेश के बाद जेपी ग्रुप एक बार फिर से इन्फ्राटेक का इंचार्ज हो गया है। सिंघवी ने कहा कि बैंक का पैसा भी जनता का ही पैसा है और हम कोर्ट के आदेश में बदलाव की मांग कर रहे हैं।

सोमवार को जेपी समूह की बिल्डर कंपनी जेपी इन्फ्रा को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। इससे नोएडा और ग्रेटर नोएडा के करीब 32,000 फ्लैट खरीददारों को राहत मिली है, जिन्होंने कंपनी की परियोजनाओं में निवेश किया था। ट्राइब्यूनल की इलाहाबाद बेंच की ओर से 10 अगस्त को ही कंपनी को दिवालिया श्रेणी में डालने का आदेश दिया था।
इस आदेश के बाद उन ग्राहकों की चिंताएं बढ़ गई थीं, जिन्होंने निर्माणाधीन फ्लैटों में निवेश किया है और अब तक पजेशन का इंतजार कर रहे हैं।

जेपी इन्फ्राटेक के प्रॉजेक्ट में फ्लैट खरीदने वाले लोगों की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अजित सिन्हा ने IDBI बैंक की मांग का विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ग्राहकों को राहत मिली है।

-एजेंसी