JKLF के ‘आज़ादी मार्च’ को LoC से पहले रोका, वार्ता भी बेनतीजा

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी PoK की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद से चले JKLF के ‘आज़ादी मार्च’ को पाकिस्तानी सैन्यबलों ने नियंत्रण रेखा LoC से छह किलोमीटर पहले रोक दिया है. मार्च में शामिल लोगों ने रात सड़क पर ही गुज़ारी और वो सीमा की ओर बढ़ने की बात कह रहे हैं.
इस बीच सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच वार्ता भी हुई, जो किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है. जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट JKLF की ओर से बुलाया गया ये मार्च तीन दिन पहले शुरू हुआ था.
भारत ने दो महीने पहले जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था. ये मार्च इसी के विरोध में निकाला जा रहा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने लोगों से LoC पार न करने की अपील भी की.
भारत के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी करते हुए सीमा की ओर आए लोगों में शामिल पेशे से वकील शमा तारिक ख़ान ने कहा, “ये LoC नहीं बल्‍कि एक ख़ूनी लकीर है जिसे LoC का नाम दे दिया गया है. हम चाहते हैं कि इस लकीर को रौंदकर पार जाएं. ये हमारा घर है, हम अपने घर के एक कमरे से उठकर दूसरे कमरे में जाना चाह रहे हैं. हमें रास्ते में रोका ना जाए. हम अपने कश्मीर, अपने घर जा रहे हैं.”
JKLF से जुड़े कार्यकर्ता शहबाज़ कश्मीरी कहते हैं, “इंशाअल्लाह हम बॉर्डर तोड़ने जा रहे हैं, हम दुनिया के लोगों को ये संदेश देना चाहते हैं कि वो भी अपने घरों से बाहर निकलें और विरोध करें. अल्लाह ने चाहा तो बॉर्डर टूट जाएगा.”
मार्च का मक़सद बताते हुए एक प्रदर्शनकारी दानिश सानिया ने कहा, “हम अपने मुल्क को भारत और पाकिस्तान दोनों से आज़ाद देखना चाहते हैं. हमारे जिस मुल्क पर 22 अक्तूबर 1947 को क़ब्ज़ा कर लिया गया था, अब हम उसकी आज़ादी के लिए निकले हैं.”
“हमारे ख़ास दर्जे 35ए को, जिसके तहत कोई हमारी ज़मीन नहीं ख़रीद सकता था, उसे तोड़ा गया है, हम उसे बचाने आए हैं. जो ज़मीन हमारे बुज़ुर्गों ने सात हज़ार साल से संभाल कर रखी है, हम उसे बचाना चाहते हैं. हम कश्मीरियत में कोई दख़ल बर्दाश्त नहीं करेंगे.”
प्रदर्शनकारी संयुक्त राष्ट्र से दख़ल की मांग भी कर रहे हैं. शमा तारिक ख़ान कहती हैं, “उधर भारत की फ़ौज लगी है, इधर पाकिस्तान की फ़ौज है. हम तो जनता हैं. संयुक्त राष्ट्र का कोई प्रस्ताव हमें उस पार जाने से नहीं रोकता है. हम जो कर रहे हैं उससे कोई क़ानून नहीं टूट रहा है. हम चाहते हैं कि कश्मीरी लोगों के लिए नियंत्रण रेखा को खोल दिया जाए. संयुक्त राष्ट्र इसमें दख़ल दें.”
पाकिस्तानी सेना ने रोका मार्च
आज़ादी मार्च को पाकिस्तान के प्रशासन ने चिकोटी चेकपॉइंट से छह किलोमीटर पहले चिनारी के पास रोक दिया है. मार्च को रोकने के लिए सड़क पर कंटेनर लगाए गए हैं और कंटीली तारें बिछाई गई हैं.
प्रशासन के रोकने के बाद प्रदर्शनकारी श्रीनगर और उरी की ओर जाने वाली सड़क पर ही बैठ गए हैं. इस दौरान प्रदर्शनकारियों के नेताओं ने प्रशासन से बात भी की है हालांकि कोई समझौता नहीं हो सका है.
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे तौकीर गिलानी का कहना है कि प्रदर्शनकारी सड़क पर ही जमे रहेंगे और LoC की ओर बढ़ेंगे.
तौक़ीर गिलानी ने ये भी कहा कि वो नहीं चाहते कि प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच कोई टकराव की स्थिति पैदा हो लेकिन प्रदर्शन में शामिल अधिकतर लोग सीमा की ओर बढ़ने पर आमदा है. बारिश के कारण बढ़ी ठंड के दौरान आग पर हाथ सेंकते एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “कश्मीर को बांटने वाली खूनी लकीर पार करके हम श्रीनगर जाना चाहते हैं.
जीशान बशीर भट्ट नाम के एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम जम्मू-कश्मीर के रिफ़्यूजी हैं. आज़ाद कश्मीर के बाग़ क्षेत्र में रहते हैं. हमने बाग़ से चिकोटी तक जलसा निकाला है और हमारा मक़सद एलओसी क्रॉस करके अपने घर अपने कश्मीर, अपने श्रीनगर पहुंचना है. हमारे इरादे बुलंद हैं और हम अपनी मंज़िल की ओर बढ़ रहे हैं.”
वार्ता बेअसर
इसी बीच पाकिस्तानी अधिकारियों और JKLF के नेताओं के बीच रात में वार्ता भी हुई. जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ़्रंट से जुड़े रफ़ीक़ डार ने कहा, “हमने अपने रास्ते में रुकावटें देखने के बाद प्रशासन से बात की. हमने रुकावटें हटाने की गुज़ारिश की है, अगर रुकावटें नहीं हटाई गईं तो हम यहीं पर धरना देंगे.”
वहीं PoK के सूचना मंत्री मुश्ताक़ मिनहास और क़ानून मंत्री फ़ारूक़ अहमद ताहिर ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से बातचीत की है.
मुश्ताक़ मिनहास ने कहा, “हम मार्च पर नज़र रखे हुए हैं. जम्‍मू-कश्मीर के हालातों को दुनिया के सामने लाने में ये मार्च मील का पत्थर साबित होगा. हम इसे समर्थन देने यहां आए हैं.”
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार नहीं चाहती की मार्च यहां से आगे बढ़े. उन्होंने कहा, “आगे ऐसे पॉइंट हैं जहां तक भारतीय सेना की गोलियां पहुंच सकती हैं. ये हमारे नौजवान हैं जो सच्चे ज़ज़्बे के साथ यहां आए हैं. इनकी जान की सुरक्षा करना कश्मीर की सरकार की ज़िम्मेदारी भी है. हम इस ख़ूनी लकीर को नहीं मानते हैं लेकिन इस वक़्त हालात ऐसे नहीं है कि हम इसे पार करें, हम नहीं चाहते कि हमारे नौजवानों का जानी या माली नुक़सान हों.”
-BBC

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