सिंधी समाज ने रद्द की झूलेलाल शोभायात्रा, घरों में मनेगा चेटीचंड पर्व

मथुरा। सिंधी जनरल पंचायत ने देशह‍ित में सत्तर वर्षों की परम्परा तोड़कर चेटीचंड पर्व पर नगर में निकलने वाली भगवान झूलेलाल की भव्य शोभायात्रा के साथ ही समस्त कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं।

मीडिया प्रभारी किशोर इसरानी ने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए भारत सरकार द्वारा जारी की गई गाइडलाइन का गम्भीरतापूर्वक पालन करते हुए 25 मार्च को चेटीचंड पर्व पर भगवान झूलेलाल जन्मोत्सव के संदर्भ में होने वाले कार्यक्रम सांस्कृतिक प्रोग्राम तथा शोभायात्रा आदि नहीं होंगे।

सिंधी उत्सव के मुख्य संयोजक रामचंद्र खत्री ने कोरोना वायरस से बचाव हेतु समाज के लोगों से घर पर ही रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अपने इष्टदेव भगवान झूलेलाल की जयंती पर कोई भी भीड़ न करें। सभी अपने-अपने घर पर ही झूलेलाल की ज्योति प्रज्जवलित करके परिवार के साथ ही आरती करें और घर में मीठे चावल का प्रसाद बनाएं।

पंचायत के अध्यक्ष नारायण दास लखवानी ने कहा कि सिंधी जनरल पंचायत द्वारा पिछले सत्तर वर्षों से लगातार चेटीचंड पर झूलेलाल जन्मोत्सव मनाया जाता रहा है, जिसे राष्ट्र हीत में देश के नागरिकों के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए स्थागित किया जा रहा है। 25 मार्च को चेटीचंड पर्व पर सिंधी समाज से जुड़े परिवार सायं अपने-अपने घरों के बाहर दीपक जलाएं और अपने घरों में रोशनी करें।

पंचायत के नारायण दास लखवानी, बसंत मंगलानी, रामचंद्र खत्री, तुलसीदास गंगवानी, जीवतराम चंदानी, गुरूमुखदास गंगवानी, किशनचंद भाटिया, गोपालदास भाटिया, डा.प्रदीप उकरानी, जितेंद्र लालवानी, झामनदास नाथानी, चंदनलाल आडवानी, सुदामा खत्री, अशोक अंदानी, सुंदरलाल खत्री, किशोर इसरानी, कन्हैयालाल भाईजी, सुरेश मेठवानी, लीलाराम लखवानी, रमेश नाथानी, भगवानदास बेबू , आत्माराम खत्री, मिर्चूमल कोतकवानी, विष्णु हेमानी, हरीश चावला, सुरेश मनसुखानी, ऐडवोकेट कन्हैयालाल खत्री, पीताम्बर रोहेरा, अनिल मंगलानी, महेश घावरी, गिरधारी नाथानी आदि ने सभी को नवसंवत्सर की शुभकामनाएं देते हुए घरों में ही पर्व मनाने की अपील की है।

भगवान झूलेलाल ने अवतार लेकर पापियों का संहार नहीं किया

वरूणावतार भगवान झूलेलाल ही एकमात्र ऐसे अवतार है जिन्होंने पापियों का संहार नहीं किया बल्कि उनका हदय परिवर्तन कर उन्हें प्रेम शांति साम्प्रदायिक सद्भाव, एकता व अखण्डता का संदेश दिया। भगवान झूलेलाल के जीवन पर शोध कर चुके लेखक किशोर इसरानी ने बताया कि अवतरण के बाद भगवान झूलेलाल ने मात्र 13 वर्ष तक की उम्र तक ही सिंधी समुदाय का मार्गदर्शन किया। संवत् 1007 (सन् 951ई) को जन्में वरूणावतार झूलेलाल संवत् 1020 (सन् 964 ई) के भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी पर जल समाधि लेकर अंतर्धान हो गए। आज भी लाल साई की ज्योति जलती रहती है जो भगवान झूलेलाल की मौजूदगी का एहसास कराती है।
-Legens News

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