झारखंड हाईकोर्ट ने कहा, लालू या तो अस्‍पताल में रहें या जेल में

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने राजद सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री व चारा घोटाले के सजायाफ्ता लालू प्रसाद के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने सजायाफ्ता होने के बावजूद उनके घर पर होने के औचित्य पर सवाल उठाया है। कोर्ट ने कहा, या तो वे अस्पताल में हों, या फिर जेल में। उच्च न्यायालय के जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की कोर्ट में शुक्रवार को लालू प्रसाद के प्रोविजनल बेल को बढ़ाए जाने के मामले में सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस मामले में लालू यादव की मेडिकल रिपोर्ट पर सीबीआई को जांच कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अब 17 को सुनवाई होगी।
इसके साथ ही लालू यादव की प्रोविजनल बेल 20 अगस्त तक बढ़ा दी गई। लालू यादव की प्रोविजनल बेल 14 अगस्त को समाप्त हो रही थी। इस मामले में सुनवाई 17 अगस्त को होगी। सुनवाई के दौरान लालू के अधिवक्ता ने बताया कि मुंबई स्थित एशियन हार्ट इंस्टिट्यूट में लालू यादव 6 अगस्त को ही भर्ती हो गए हैं। उनको यूरिन, डायबिटीज सहित अन्य बीमारियां हैं। जिन का इलाज चल रहा है। उनका डायबिटीज कंट्रोल नहीं हो रही है और उन्हें प्रतिदिन 70 यूनिट इंसुलिन लेनी पड़ रही है। लालू यादव को क्रोनिक किडनी की बीमारी है। जिसका इलाज चल रहा है।
सीबीआई ने रखा पक्ष
कोर्ट ने लालू के वकील की दलीलें सुनने के बाद मौखिक रूप से कहा कि लालू यादव सजायाफ्ता हैं और वे अस्पताल में इलाज कराने के बाद घर में नहीं रह सकते। साथ ही, कोर्ट ने उनके द्वारा प्रोविजनल बेल की अवधि बढ़ाए जाने की माग को ठुकराते हुए सिर्फ 20 अगस्त तक प्रोविजनल बेल की अवधि बढ़ाई और 17 अगस्त को मामले की सुनवाई निर्धारित की।
सीबीआई ने कहा कि लालू की ओर से दाखिल डिस्चार्ज समरी में कहा गया है कि लालू प्रसाद फालोअप इलाज के लिए अस्पताल आ सकते हैं इसमें उन्हें एडमिट करने की कही बात नहीं कही गई लेकिन फिर भी लालू यादव 6 अगस्त को वहा भर्ती हो गए। जिस पर कोर्ट ने डिस्चार्ज समरी जांच कर सीबीआई को अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
-एजेंसियां

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