जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट पूरी तरीके से गैर क़ानूनी: रघुराज सिंह

आगरा। दिल्ली एनसीआर के क्षेत्र के नेता रघुराज सिंह ने कहा है कि जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट पूरी तरीके से गैर क़ानूनी और किसानों कि जमीन कोलोनिज़ोरों को हस्तांतरित करवाने का हथकंडा मात्र है.

एनसीआर एक्ट बहुराज्य क़ानूनी प्रदिकर्ण है और पार्लियामेंट के एक्ट से बना है. इस में केवल संविधानिक संशोधन वावस्ता के तहत हि किसी भी प्रकार का परिवर्तन संभव है.

श्री सिंह जो कि सिविल सोसाइटी ऑफ़ आगरा के पदाधिकारियों के साथ होटल के एस रॉयल के किटी हॉल में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे, ने कहा कि जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एनसीआर बोर्ड से अब तक कोई सेव्क्रती नहीं है जेवर के लिये एनसीआर बोर्ड के तहत स्वीकृत २०२१ के जोनल मास्टर प्लान में कृषि भूमि /हरित क्षेत्र रहना हे नियत है.

उन्होंने कहा के एनसीआर एक्ट का मुख्य लक्ष्य क्षत्रे से आबादी कि संख्या को सिमित रखना है,जब कि जेवर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट से नागरिक अवस्थापना सुवेधाओं पर दबाब हि नहीं पड़ेगा बल्कि ३०/४० लखन कि आबादी का एक नया ग्रीनफ़ील्ड शहर हि बसा डाला जायेगा.

उन्होंने कहा आगरा से एयर ट्रैवलर अगर दिल्ली या जेवर जा कर हवाई जहाज पकड़ता है या वहां से उतर कर आगरा अत्ता है तोह यह एनसीआर के लिये उपयुक्त है और न हि आगरा के लिये .

नेशनल कैपीटल जोन जिसमें उ प्र के बुलंदशहर, मथुरा और अलीगढ जनपदों के भाग भी आते हैं , शहरी करण की उस अभूतपूर्व व्‍यवस्‍थाओं के दौर से गुजर रहा है जिनको नियंत्रित करने के लिये ही इसकी भारत सरकार ने एन सी आर-नेशनल कैपीटल जोन प्‍लानिंग एक्‍ट 1985 (एन सी आर एक्‍ट) लागू किया था।

उ प्र, राजस्‍थान, हरियाणा तथा दिल्‍ली राज्‍यों के राजधानी नई दिल्‍ली से लगे हुए जनपद इसमें शामिल किये गये थे। लक्ष्‍य था कि दिल्‍ली की आबादी को इस प्रकार से नियंत्रित किया जाये जिससे कि दिल्‍ली और एन सी आर के अन्‍य जनपदो के शहरी निकायों की अवस्‍थापना सुविधाओं पर दबाब न पडे।

किन्‍तु पिछले तीन सालो में यह अवधारणा असरहीन हो चुकी है। एन सी आर के शहरों खास कर नौयडा, ग्रटर नौयडा अथार्टियों के अलावा यमुना एक्‍सप्रेस वे इंडस्‍ट्रियल डव्‍लापमेंट अथार्टी ने नियोजन को एक तरु करके रख दिया है। अथार्टी के रीजनल प्‍लान 2001 को लगभग नकार सा दिया है।

जेबर जो कि इस प्‍लान में खेतीबाडी और कृषि उपजों पर आधारित कामधंधें के लिये चिन्‍हित जोन था , में गैर जरूरी होते हुए भी उस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उस ग्रीन फील्‍ड प्रोजेक्‍ट को क्रियान्‍वित करवाया जा रहा है जिससे ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था और क्षेत्रीय पंपरागत परिवेश ही नहीं बदल जायेगा तीन दर्जन गांव विलुप्‍त हो जायेंगे।

जिन किसानों की जमीन सरकार छीनेगी उसके बदले उन्‍हें मुआबजा मिलेगा किन्‍तु जिनके पास जमीन ही नहीं और खेती पर अधारित श्रमिक हैं, उनको लेकर कोई योजना अब तक कागजों तक पर नहीं है।

यही नहीं एन सी आर के रीजनल प्‍लान 2001 को जैबर इंटरनेशनल एयरपोर्ट योजना से भारी धक्‍का पहुंचेगा क्‍यों कि जहां यह एन सी आर में शहरी करण की प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिये दिल्‍ली में पहुंचने वालों की संख्‍या कम करने को बनायी गयी थी , वहीं जेबर एयपोर्ट के बनाये जाने से एन सी आर के शहरी निकाय वाले शहरों पर दबाब ही नहीं बढेगा अपितु तीस किमी क्षेत्र का एक ऐसा आबादी वाला शहर ही बन जायेगा जिसकी अवस्‍थापना संबधी योजना या संसाधनों को लेकर कोयी प्‍लानिंग तक नहीं है।

बने हुए हालातों ग्रीनफील्‍ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट से भी ज्‍यादा जरूरी ग्रीनफील्‍ड सिटी योजना बनाने और उसके लियसे संसाधन जुटाने की है। जो न केवल उ प्र सरकार, भारत सरकार और विदेशी फंडिंग एजैसियों की सामथ्‍य सीमा से बाहर है बल्‍कि कानूनी पेचीदगियों बढाने वाली है।

वैसे जेबर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने का कारण इन्‍दिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्री दबाब बढना बताया जाता रहा हे जो कि सिरे से गलत है।

जो जानकारियां हैं उनके मुताबिक इन्दिरा गांधी इंटरनेशनल एयपोर्ट को आप्रेट करने वाली कंपनी जी एम आर के पास इस एयरपोर्ट का उपयोग दस करोड ( 100मिलियन) यात्रियों की आवाजाही करने का लक्ष्‍य व योजना है। वर्तमान में क्षमता का 55 प्रतिशत उपयोग ही उसके द्वारा किया जा रहा है। अपनी 2000हेक्‍टेयर लैंडबैंक मे से वह भविष्‍य की जरूरत को दृष्‍टिगत कर टर्मिनल -4 विकसित करने जा रही है। इसके लिये उसके द्वारा 16,000करोड की निवेश योजना पर काम भी शुरू कर दिया गया है।

दिल्‍ली पर असर

दिल्‍ली एन सी आर इस समय आबादी के दबाब से भारी असर है। ढांचागत सुविधाओं की हालत यह है कि अपनी पेयजल स्‍त्रोत तक की कोयी व्‍यवस्‍था नहीं है। गंगा की अपर कैनाल सिस्‍टम की नहरों का पानी किसानों का हक नकार कर जुटाना पड रहा है। होली के पर्व तक को बिना पानी का इस्‍तेमाल किये मनाने को सरकार गुहारकरती नजर आती है।

इसी क्रम में जुमे की नमाज तक के लिये एन सी आर के अधिकांश शहरी क्षेत्रों की मस्‍जिदें छोटी पड गयी हैं । सडकों पर मुस्‍लिम भाईयों को इबादत करने को विवश होना पड रहा है। दीपावली, क्रिसमस और बडा दिन पर्यावरण का मिजज दृष्‍टिगत कर बिना पटाखों और परंपरागत आतिशबाजी के मनाने के लिये माहौल बनाना पड रहा है।

उपरोक्‍त को उल्‍लेखित करने का मकसद यह है कि पानी, पूजा स्थलों तथा पर्यावरण तक पर वर्तमान मे ही अत्‍यधिक जनदबाब है तो एन सी आर में एक और नया इंटरनेशनल एयरपोर्ट शुरू हो जाने के बाद की स्थिति क्‍या होगी इसकी कल्‍पना करना भी मुश्‍किल है।

आगरा पर असर

जैसा कि सर्व विदित है आगरा कभी मुगलों की राजधानी रहा होगा किन्‍तु वर्तमान में निहायत उपेक्षित और दिल्‍ली का सैटेलाइट सिटी बनकर रह गया है। एन सी आर की हर छोटी बडी योजना या गतविधि का इस पर असर पडाता है। दिल्‍ली के कारण आगरा में यमुना नदी जलशून्‍य(ताजा पानी) बनी हुई है। दिल्‍ली की हवायें शीतकाल में आगरा के मौसम को प्रभावित करती हैं, दीपावली और उसके आसपास के महीनों में अगर दिल्‍ली में पर्यावरणीय प्रदूषण बढता है तो आगरा के वायुमंडल में भी उसका असर दिखता है।

इस स्‍थिति अगर जैबर में नया इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनता है ओर उसके कारण एक और अघोषित ग्रीनफील्‍ड सिटी एन सी आर में अस्‍तित्‍व मे आता है तब आगरा और यहां के नागरिकों के सामने समस्‍याओं का और जटिल होना प्राय तय है।

सिविल सोसाइटी ऑफ़ आगरा चाहती है के एनसीआरबी अपना कार्य सुचारू रूप से करे, इस से आगरा का भी स्वाभाविक विकास होगा. एनसीआर प्लान में पापुलेशन डेंसिटी, लैंड use और हरित विकास का प्राविधान है.

जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को लेकर प्रेस वार्ता में अनिल शर्मा, राजीव सक्सेना , शिरोमणि सिंह, नॉएडा के श्री रघुराज सिंह (एनसीआर प्लान के फॉलो करने के लिये PIL कि हुई है ) और अधिवक्ता ध्रुव गौतम शामिल थे।

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