उड़ानें बंद होने से पहले जेट एयरवेज बेच चुका था 3500 करोड़ रुपए के टिकट

मुंबई। उड़ानें बंद होने से पहले जेट एयरवेज करीब 3500 करोड़ रुपए के टिकट बेच चुकी थी। ये टिकट खरीदने वाले यात्री अब दूसरी टिकट खरीदने पर मजबूर हैं जिससे उन पर दोहरी मार पड़ रही है।
जेट एयरवेज की उड़ानें ठप होने से उन मुसाफिरों को दोहरी मार पड़ी है, जिन्होंने इस एयरलाइंस से आगे की तारीखों के टिकट बुक किए थे। एक तो टिकट बुकिंग में उनका पैसा फंसा है और रिफंड नहीं मिला, दूसरा – अपनी यात्रा के लिए उन्हें अब दूसरी एयरलाइंस से कई गुना ऊंचे दामों पर टिकट खरीदना पड़ रहा है। मसलन, दिल्ली से लंदन का टिकट अगर किसी यात्री ने दो महीने पहले 66 हजार रुपये का लिया था, तो अब यही टिकट 1.20 लाख का है।
जानकार बताते हैं कि जिस दिन उड़ानें बंद हुईं, उस समय तक जेट 3,500 करोड़ रुपये के टिकट बुक कर चुकी थी। इन यात्रियों को रिफंड के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। एक्सपर्ट कहते हैं कि सरकार तुरंत दखल दे ताकि नियमों के तहत या तो मुसाफिरों को उनका पैसा मिले या फिर उन्हें दूसरी एयरलाइंस में यात्रा कराई जाए।
ट्रैवल एजेंट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सुभाष गोयल कहते हैं कि सरकार और डीजीसीए उसी सेक्टर की दूसरी एयरलाइंस को जेट के टिकट स्वीकार करने और उसके यात्रियों को अपनी फ्लाइट में जगह देने का निर्देश दे सकते हैं। जानकार हर्षवर्धन कहते हैं कि अगर सरकार ने पहले दखल दिया होता और जेट को भविष्य के लिए टिकट बुकिंग से रोका जाता तो यात्रियों का पैसा बच सकता था।
ऐसा हुआ तभी मिलेगा पैसा
अगर कंपनी फिर चल निकलती है तो यात्रियों को उनका पैसा मिल सकता है।
बैंक कंपनी की संपत्ति बेचकर रेश्यो के आधार पर यात्रियों को रिफंड दे सकते हैं।
कर्मचारियों ने लगाई मदद की गुहार
वहीं दूसरी ओर जेट एयरवेज के कर्मचारियों ने अपनी सैलरी के बकाया और कंपनी को फौरी मदद देने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलकर भी मदद की गुहार लगाई है। जेट की उड़ानें ठप होने से इसके 20 हजार से ज्यादा कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में हैं। सिविल एविएशन में राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने उम्मीद जताई है कि कंपनी के तमाम सक्षम और काबिल कर्मचारियों को जल्द नौकरी मिल जाएगी।
-एजेंसियां

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