जापान के पीएम शिंज़ो आबे ने इस्‍तीफा दिया, स्‍वास्‍थ्‍य कारणों से थे परेशान

टोक्‍यो। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने स्‍वास्‍थ्‍य कारणों से अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया है। शिंजो आबे पिछले कई दिनों से पेट की बीमारी से परेशान चल रहे हैं और उन्‍हें कई बार हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा है। उनके इस्‍तीफे की अटकलें काफी दिनों से लग रही थीं। आज शिंजो आबे ने अपने इस्‍तीफे का औपचारिक रूप से ऐलान कर दिया। शिंजो आबे एक सप्‍ताह के अंदर दो बार हॉस्पिटल जा चुके हैं।
श‍िंजो आबे के इस्‍तीफे के बीच जापान का शेयर बाजार धराशायी हो गया है। यह दूसरी बार है जब स्वास्थ्य कारणों से आबे को अपना पद छोड़ना पड़ा है। इससे पहले उन्होंने 2007 में एक साल तक ऑफिस में रहने के बाद अपना पद छोड़ा था। वह दुबारा 2012 में भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापस लौटे थे। उधर, जापान के सत्‍ताधारी दल ने कहा है कि आबे की तबीयत ठीक है।
अब आबे ने आधिकारिक रूप से अपने पद से इस्‍तीफे का ऐलान कर दिया है। बताया जा रहा है कि पिछली बार जब आबे हॉस्पिटल गए थे तब वह करीब 7 घंटे तक वहां रहे थे। उनका कार्यकाल सितबंर 2021 तक है। गत सोमवार को आबे ने अपने कार्यालय में 8 साल पूरे कर ल‍िए और वह जापान के सबसे ज्‍यादा समय तक रहने वाले प्रधानमंत्री बन गए थे।
हाल के दिनों में कोरोना वायरस को ठीक से नहीं संभालने पर उनकी लोकप्रियता में भी करीब 30 प्रतिशत की कमी आई है। उनकी पार्टी इन दिनों कई घोटालों से जूझ रही है। 65 साल के आबे ने देश की अर्थव्‍यवस्‍था को फिर से पटरी पर लाने का वादा किया था। चीन के खतरे को देखते हुए आबे जापानी सेना को भी मजबूत करने में जुटे हुए थे।
अल्सरेटिव कोलाइटिस बड़ी आंत की एक आजीवन बीमारी है. इसमें बड़ी आंत की अंदरूनी परत में सूजन और जलन हो जाती है जिससे कई छोटे-छोटे छाले बनने लगते है. उन छालों और सूजन के कारण पेट-संबंधी परेशानियां होने लगती हैं जो पाचन तंत्र पर बुरा असर डालती हैं और सही समय पर इलाज ना कराने पर ख़तरे का कारण भी बन सकती है. इससे कोलोरेक्टल (मलनाली) कैंसर होने की संभावना भी होती है.
पब्लिक ब्रॉडकास्टर एनएचके ने कहा कि 65 साल के आबे अपनी सरकार के लिए परेशानियां खड़ी करने से बचना चाहते हैं.
शिंज़ो आबे का कार्यकाल सितंबर 2021 में ख़त्म होने वाला था. सोमवार को शिंज़ो आबे जापान के सबसे लंबे समय तक पीएम रहने का रिकॉर्ड तोड़ चुके थे.
इसके अलावा कोरोना वायरस की महमारी से निपटने को लेकर पीएम आबे की आलोचना रही थी. साथ ही उनकी पार्टी के सदस्यों पर लगे स्कैंडल के आरोपों के कारण भी वो घेरे में थे.
कोरोना वायरस की महामारी के कारण जापान की अर्थव्यवस्था की हालत ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर है. पीएम आबे ने वादा किया था कि वो अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाएंगे.
-एजेंसियां

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