जापानी इंसेफेलाइटिस vaccine का स्टॉक खत्म होने के कगार पर

गोरखपुर। गोरखपुर जिले में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) नामक इस जानलेवा बीमारी की जद में 3000 से अधिक मासूम पीड़ित हैं और जिले में जेई के vaccine का स्टॉक खत्म होने के कगार पर पहुंच गया है। जिसके कारण इन मासूमों को अब तक जेई का वैक्सीन नहीं लगा है।

हर महीने 3000 हजार से अधिक मासूमों को लगता है जेई का vaccine
राजधानी में भेजी जा चुकी है तीन बार डिमांड, नहीं मिली वैक्सीन
एक हफ्ते से कम का बचा है स्टॉक

पूर्वांचल में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) एक बार फिर से कहर बरपा रही है। बीआरडी मेडिकल कालेज में अब तक 50 से अधिक मासूमों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद अधिकारी इस बीमारी पर नियंत्रण को लेकर संजीदा नहीं है। आलम यह है जिले में जेई का टीका समाप्त होने के कगार पर है। सीएमओ कार्यालय में महज 200 इंजेक्शन ही बचें हैं। जबकि जिले में हर महीने 3000 मासूमों को टीका लगता है। वैक्सीन खत्म होने से मासूमों की जिंदगी पर संकट पर पैदा हो गया है। विभाग का दावा है कि 40 हजार टीकों की मांग की गई है।

डॉ. आईवी विश्वकर्मा, एडिशनल सीएमओ व टीकाकरण प्रभारी ने बताया कि ‘‘यह सही है जेई वैक्सीन का संकट हो गया है। यह वैक्सीन चीन से आयात की जाती है। फौरी तौर पर वाराणसी से करीब 1000 वैक्सीन मंगाया जा रहा है। इससे कुछ संकट कम होगा। वैक्सीन मौजूद रहने पर ही बच्चों को लगाया जाएगा।’’

एक दशक पूर्व शासन ने जेई टीकाकरण को नियमित टीकाकरण में शामिल किया गया है। अप्रैल 2013 से हर बच्चे को दो चरणों में टीका लगता है। पहला टीका नौ माह से 12 माह और दूसरा टीका 16 माह से 16 साल की उम्र पर लगता है। यह टीका बच्चे की जीवन भर जेई से सुरक्षा करता है।

मंडल में ही खत्म हो गया है vaccine
बीआरडी मेडिकल कालेज में इस वर्ष अब तक इंसेफेलाइटिस से पीड़ित करीब 200 मासूम भर्ती हुए। जिनमें से 65 से अधिक की मौत हो गई है। ऐसा नहीं है कि जेई के वैकसीन का संकट सिर्फ जिले में हैं। मंडल के देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज में भी टीका खत्म होने के करीब है। इस वजह से एडी हेल्थ कार्यालय ने भी शासन से करीब एक लाख जेई के vaccine की मांग की है।
-एजेंसी

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