जनसूचना के केस जिले स्तर पर निस्तारित किए जाएंगे: राज्य सूचना आयुक्त

लखनऊ। राज्य सूचना आयुक्त अजय कुमार उप्रेती ने कहा कि जनसूचना के केस को जिले स्तर पर निस्तारित किया जाएगा। इससे सूचना मांगने वाले और सूचना देने वाले को लखनऊ का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। कहा कि जिले के 53 मामलों में सूचना न देने पर सम्बंधित विभाग के अफसर पर अर्थदण्ड लगाया गया है। इसमें से 10 मामले ऐसे हैं जिससे किस्तों में अर्थदण्ड की वसूली की जा रही है।
राज्य सूचना आयुक्त अजय कुमार उप्रेती गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार मे पत्रकारों से बातचीत रहे थे। कहा कि जिले में मार्च महीने से लेकर जून महीने तक के सौ मामले उनके यहां दर्ज हैं। मई तक का आंकड़ा है कि प्रदेश में जनसूचना के 52,685 मुकदमे चल रहे हैं। कहा कि जिला स्तर पर जनसूचना अधिकारी और अपीलीय अधिकारी को कार्यशाला के माध्यम से ट्रेनिंग देने का अर्थ है कि जनसूचना का जबाव ठीक ढंग से दे। वह सूचना देने से न कतराए बल्कि त्वरित निस्तारण करे। कहा कि कोई भी अधिकारी मांगी गई जानकारी को 30 दिन के सूचना न देकर इसके आगे के दिनों में पैसा जमा करने की बात करता है तो गलत है। 30 दिन के बाद उसे निशुल्क सूचना देना होगा। 30 दिन में सूचना न देने पर राज्य सूचना आयोग में अपील कर सकता है। उनकी ओर से आदेश देने के बाद अगर अफसर की ओर से सूचना देने में आनकानी की जाती है तो उसके खिलाफ 250 प्रतिदिन के हिसाब से अर्थदण्ड लगाया जाएगा।
सूचना आयुक्त ने कहा कि 500 शब्दों से अधिक की सूचना नहीं मांगी जा सकती है। कहा कि गलत रिपोर्ट देने वाले अफसर को दंड किया जाएगा। कहा, 80 प्रतिशत मामलों में अफसरों की ओर से सूचना दे दी जाती है। कुछ लोग आदती होते हैँ जो सूचना देने से भागते हैं।
-एजेंसियां

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