श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर जन्माष्टमी 12 अगस्त को, होगा लाइव प्रसारण

मथुरा। अनन्त लीला पुरूषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण की पुण्य जन्मभूमि मथुरा में पूर्णावतार, रसावतार, प्रेमावतार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म महोत्सव शास्त्रीय मर्यादाओं एवं परंपराओं के अनुसार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तद्नुसार दिनांक 12 अगस्त 2020 बुधवार को मनाया जा रहा है।

इस संबंध में श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास के सचिव कपिल शर्मा ने जानकारी देते हुये बताया कि श्रीकृष्ण-जन्मभूमि के संपूर्ण परिसर को अद्भुद कलात्मकरूप से सजाया जा रहा है। अवसर की महत्ता, जन्मभूमि की गरिमा एवं भक्तों की भावनाओं के अनुरूप जन्मभूमि की नयनाभिराम भव्य साज-सज्जा को लाइव प्रसारण के माध्यम से देखकर श्रद्धालुगण अभिभूत हो उठेंगे। जन्मभूमि के संपूर्ण प्रांगण, भवनों एवं देवालयों को ब्रज के भावुक भक्त सज्जाकार अद्भुद् स्वरूप प्रदान करने के लिए दिन-रात साज-सज्जा एवं विद्युत सजावट के कार्यों में लगे हुये हैं।

श्री शर्मा ने आगे बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का 5247वां जन्ममहोत्सव शास्त्रोक्त विधि-विधान में एवं परंपराओं के अनुरूप बड़ी ही दिव्यता और भव्यता के साथ मनाया जायेगा।

वैश्व‍िक महामारी कोरोना से उत्पन्न परिस्थिति एवं इसके निर्मूलन के लिए सरकार द्वारा जारी किये गये दिशा-निर्देशों के अनुपालन में जन्माष्टमी के महापर्व पर श्रद्धालुओं का मंदिर में प्रवेश प्रतिबंधित है। मंदिर की साज-सज्ज भगवान का श्रृंगार, पोशाक, जन्म महाभिषेक की व्यवस्थाऐं, पुष्प-बंगला आदि इस प्रकार से की जा रही हैं जिससे भगवान श्रीकृष्ण के जन्ममहाभिषेक के दर्शन टेलीविजन के माध्यम से जो भी श्रद्धालु करे, उनको ऐसी अनुभूति हो कि वह इस आयोजन में सम्मिलित हैं।

इस वर्ष जन्मस्थान पर विराजित केशवदेव जी, श्रीगर्भगृह जी, श्रीयोगमाया जी एवं श्री भागवत-भवन मंदिर को दिव्य रूप से सजाया जा रहा है।

पत्र, पुष्प, रत्न प्रतिकृति, वस्त्र आदि के अद्भुद संयोजन से बनाये गये ‘पुर्णेन्दु-कुंज’ बंगले में विराजमान हो ठाकुरजी बड़े ही मनोहारी स्वरूप में दर्शन देंगे। पत्र, पुष्प, काष्ट आदि से निर्मित इस बंगले की छठा और कला निश्च‍ित ही अनूठी होगी।

इस पवित्र अवसर पर ठाकुरजी रेशम, जरी एवं रत्न प्रतिकृति के सुन्दर संयोजन से बनी ‘पुष्प-वृंत’ पोषाक धारण करेंगे।

श्रीकृष्ण-जन्माष्टमी 12 अगस्त बुधवार को प्रातः मंगला-दर्शन से पूर्व भगवान इसी पोशाक को धारण कर दर्शन देंगे। पोशाक में रत्न प्रतिकृति, मोती एवं रेशम का उपयोग करते हुये कमल-पुष्प, पत्ती, लता-पता आदि की जड़वाई की गयी है। रेशम एवं रत्न प्रतिकृति के प्रयोग करते समय यह ध्यान रखा गया है कि भक्तों को सभी आकृतियां स्पष्ट रूप से दृश्टव्य हों।

श्रीकृष्ण-जन्मभूमि न्यास के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि जन्माष्टमी की पूर्व संध्या 11अगस्त मंगलवार को सांय 6ः00 बजे श्रीकेशवदेव मंदिर से संत एवं आयोजन समिति के सदस्य ढोल-नगाड़े, झांझ-मंजीरे, के मध्य भगवान श्री राधाकृष्ण की दिव्य पोषाक अर्पित करने के लिए संकीर्तन करते हुये जायेंगे।

पोषाक, मुकुट, श्रंगार, दिव्य मोर्छलासन, कामधेनु गाय की प्रतिकृति एवं दिव्य रजत कमल के विषेश दर्शन होंगे। इस वर्ष सुन्दर जरी, रेशम एवं रत्नप्रतिकृतियों के संयोजन से दिव्य मुकुट, जन्माश्टमी के पवित्र दिन ठाकुर जी धारण करेंगे। इस वर्ष भगवान श्रीराधाकृष्ण के दिव्य विग्रह को नवरत्न जड़ित स्वर्ण-कण्ठा धारण कराया जायेगा।

इससे पहले 11 अगस्त मंगलवार की सांय 6ः30 बजे भागवत-भवन में जन्म महोत्सव की ‘पुष्प-वृंत’ पोषाक, मोर्छलासन, स्वर्ण मण्डित रजत कामधेनु स्वरूपा गौ प्रतिमा एवं ‘ब्रजरत्न’ मुकुट के एवं दिव्य रजत कमल-पुष्प के विशेष दर्षन होंगे। यह अवसर जन्माष्टमी महोत्सव का महत्वपूर्ण अंग है।

श्रीकृष्ण जन्म महाभिषेक कार्यक्रम

1- श्री गणेश जी, नवग्रह पूजन, पुष्प सहस्त्रार्चन रात्रि 11 बजे से 11.55 बजे तक
2- प्राकट्य दर्शन हेतु पट बन्द रात्रि 11ः55बजे से 11ः59 बजे तक
3- प्राकट्य दर्शन रात्रि 12ः00 बजे
4- प्राकट्य आरती रात्रि 12ः00 बजे से 12ः05 बजे तक
5- जन्म महाभिषेक रात्रि (स्वर्ण मण्डित रजत गऊ के द्वारा) 12ः10 बजे से 12ः20 बजे तक
6-जन्म महाभिषेक (रजत कमल) 12ः20बजे से 12ः30 बजे तक
7- श्रंगार आरती रात्रि 12ः40बजे से 12ः50 बजे तक
8- शयन आरती रात्रि 1ः00 बजे

दिनांक 12अगस्त बुधवार को प्रातः दिव्य शहनाई एवं नगाड़ों के वादन के साथ भगवान की मंगला आरती के दर्शन होंगे। तदोपरान्त भगवान का पंचामृत अभिषेक किया जायेगा एवं ठाकुरजी के प्रिय स्त्रोतों का पाठ एवं पुष्पार्चन होगा। प्रातः 10ः00 बजे भागवत-भवन में युगल सरकार श्रीराधाकृष्ण जी के श्रीविग्रह के श्रीचरणों में दिव्य पुष्पांजलि का कार्यक्रम संपन्न होगा। भजन गायक राजीव चोपड़ा ठाकुरजी के समक्ष परंपरागत पद एवं भजनों का गायन करेंगे।

जन्म महाभिषेक का मुख्य एवं अलौकिक कार्यक्रम रात्रि 11 बजे श्रीगणेश-नवग्रह आदि पूजन से शुरू होगा। रात्रि 12 बजे भगवान के प्राकट्य के साथ संपूर्ण मंदिर परिसर में बज उठेंगे शंख, ढोल-नगाड़े, झांझ-मंजीरे और मृदंग बज उठेंगे और कन्हैया के जन्म की प्राकट्य आरती शुरू होगी। शंख एवं ढोल, मृदंग आदि अभिषेक स्थल पर तो बजेंगे ही साथ-ही-साथ सपूर्ण मंदिर परिसर में स्थान-स्थान पर दिव्य ध्वनि सुनाई देगी। आरती के उपरान्त केसर आदि सुगन्धित द्रव्यों को धारण किये हुये भगवान श्रीकृष्ण के चल विग्रह मोर्छलासन पर विराजमान होकर अभिषेक स्थल पर पधारेंगे।

पौराणिक एवं शास्त्रीय परंपराओं के अनुसार ऐसी मान्यता है कि भगवान के जन्ममहाभिषेक महोत्सव के दर्शन करने के लिए देव, देवाधिदेव महादेव सहित 33 कोटि देवतागण उपस्थित रहते हैं। भगवान का प्रथम जन्माभिषेक स्वर्ण मण्डित रजत से निर्मित कामधेनु स्वरूपा गौमाता करेंगी। शास्त्रीय मान्यता है कि गौमाता में स्वयं 33 कोटि देवतागण वास करते हैं। रजत कमलपुष्प में विराजमान ठाकुरजी के श्रीविग्रह का अभिषेक स्वर्ण मण्डित रजत गौ विग्रह के पयोधरों से निकली दुग्धधारा से होगा। ठाकुरजी के अभिषेक से पूर्व गौमाता का पूजन कर देवताओं का आव्हान पूजाचार्य करेंगे।

ठाकुरजी के चल श्रीविग्रह को जन्ममहाभिषेक दूध, दही, घी, बूरा, शहद आदि पंचामृत से होगा साथ ही अन्य शास्त्रोक्त सामग्री का भी उपयोग दिव्य महाभिषेक में किया जायेगा। जन्माष्टमी की रात्रि को सीधे प्रसारण के द्वारा श्रद्धालुजन रात्रि 1 बजे तक दर्शन कर सकेंगे।

श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान की प्रबंध समिति के सदस्य गोपेष्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि ‘‘कृश्णं वन्दे जगद्गुरूम्’’ भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन, दर्शन, लीलाओं में मानवता का कल्याण एवं उत्थान का संदेश स्पष्ट है। आज विश्व के अधिकांश देशों में भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा उद्भाशित परम दिव्य श्रीमद्भगवत गीता एवं कृष्ण लीलाओं का चिन्तन एवं अनुसरण करने वाले भक्त अवश्य मिल जायेंगे। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, दर्शन एवं उपदेशों को व्यापक रूप से लोगों तक पहुंचाने के लिए ‘कृष्णं वन्दे जगद्गुरूम्’ के भाव को हृदयंगम कर 5248 वां जन्म महोत्सव मनाया जायेगा।

श्री चतुर्वेदी ने बताया कि प्रशासन के साथ बैठक के उपरान्त यह निश्चय किया गया है कि इस नयनाभिराम दृश्य को विभिन्न टी0वी0 चैनलों पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम में सजीवता के साथ दिखाया जा सके इसके लिए अभिषेक स्थल पर बनाये जा रहे मंच को भी विशेष स्वरूप प्रदान किया जायेगा।

श्री चतुर्वेदी ने आगे बताया कि पुलिस-प्रशासन से बैठक के उपरान्त यह निश्च‍ित किया गया है कि दिनांक 10 अगस्त 2020 की दोपहर 12 बजे से दिनांक 13 अगस्त 2020 की सांय 4 बजे तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का प्रवेश बन्द रहेगा। श्री चतुर्वेदी ने बताया कि वैश्व‍िक महामारी कोरोना से उत्पन्न परिस्थिति एवं महामारी से बचाव की दृष्ट‍ि से जन्माष्टमी पर प्रसाद वितरण नहीं किया जायेगा।

संस्थान ने सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि सभी धर्मप्रेमीजन इस महामारी के निर्मूलन में अपना संपूर्ण योगदान दें और कोविड-19 से संबंधित सभी सरकारी दिशा-निर्देशों का कठोरता से पालन करें। भगवान की जन्माष्टमी को अपने घर में धूमधाम एवं भाव से मनायें। भगवान की सेवा-पूजा विधि-विधान से करें साथ ही श्रीकृष्ण-जन्मस्थान से विभिन्न प्रसारण माध्यमों से प्रसारित होने वाले लाइव दर्शन एवं जन्ममहाभिषेक कार्यक्रम का अलौकिक आनन्द प्राप्त करें।

कोविड-19 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप इस वर्ष के जन्माष्टमी महोत्सव में सीमित संख्या में पूजाचार्य एवं आयोजन से जुड़े लोग कोविड-19 के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुऐ सम्मिलित होंगे।

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