जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंपकर बताया, नाबालिगों की गिरफ्तारी का आरोप झूठा पाया

नई दिल्‍ली। जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कमेटी (JJC) ने सुप्रीम कोर्ट में 5 अगस्त के बाद पुलिस द्वारा 144 नाबालिगों को गैरकानूनी रूप से गिरफ्तार किए जाने के आरोपों पर अपनी जांच रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 142 नाबालिगों को रिहा कर दिया गया जबकि दो अभी भी जुवेनाइल होम में हैं।
JJC के सदस्यों में चार जज जस्टिस अली मोहम्मद मागरे, धीरज सिंह ठाकुर, संजीव कुमार और राशिद अली हैं। अपनी डिटेल रिपोर्ट में जेजेसी ने दर्ज की गई एफआईआर, हिरासत में लिए जाने के बाद रिहाई की विस्तृत जानकारी दी है। इसमें बताया गया है कि दो नाबालिगों को छोड़कर सभी को उसी दिन रिहा कर दिया गया था।
दरअसल, बाल अधिकार कार्यकर्ता इनाक्षी गांगुली और शांता सिन्हा ने न्यूज़ वेबसाइट्स और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट के हवाले से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में कहा गया था कि 5 अगस्त को विशेष राज्य का दर्जा हटाए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर में कई नाबालिगों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया है।
सीजेआई रंजन गोगोई की पीठ ने 20 सितंबर को कहा था, ‘मामला बच्चों के गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लेने का है, हम जुवेनाइल जस्टिस कमेटी को मामले की जांच के निर्देश देते हैं। हमें एक सप्ताह के अंदर इस पर जवाब चाहिए।’
जेजेसी ने 26 सितंबर को पेश अपनी रिपोर्ट में वैसी हरेक घटना पर नजर डाली जिसको लेकर वॉशिंगटन पोस्ट, क्विंट, स्क्रॉल और कैरवन ने स्टोरी की थी। जेजेसी ने यह भी कहा कि कमेटी या इसके किसी सदस्य को किसी भी व्यक्ति, वकील, मानवाधाकिर कार्यकर्ता, किसी ग्रुप के सदस्य, संगठन, सिविल सोसाइटी के लोग या किसी अन्य द्वारा नाबालिग की गिरफ्तारी को लेकर कोई शिकायत नहीं मिली।
सब-ऑर्डिनेट कोर्ट और डिस्ट्रिक्ट जुवेनाइल जस्टिस कमेटी की रिपोर्ट को प्राप्त करने के बाद हाई कोर्ट जेजेसी ने राज्य पुलिस से घटना के संबंध में जानकारी मांगी, जिस पर पुलिस महानिदेशक ने न्यूज़ वेबसाइट्स की एक-एक रिपोर्ट पर जवाब दिया था। महानिदेशक ने जेजेसी को बताया कि इन खबरों को पुलिस की छवि खराब करने के मकसद से लिखा गया है।
-एजेंसियां

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