Parent होना आसान नहीं है, हमेशा रहना पड़ता है सतर्क

Parent होना आसान नहीं है। आपको हमेशा सतर्क रहना पड़ता है क्योंकि कई बार आपके सामने बच्चों से रिलेटेड ऐसी परिस्थिति भी उत्पन्न हो जाती है जो एक्सपीरियंस्ड Parent के लिए भी चैलेजिंग बन जाता है। लेकिन पैरेंटिंग का एक तरीका है जो बेहद कारगर है और जिसे फॉलो करने की सलाह एक्सपर्ट्स भी देते हैं और वह है- रिस्पॉन्सिव पैरेंटिंग। लेकिन इस पैरेंटिंग स्टाइल को अपनाना बिलकुल भी आसान नहीं है। इसके लिए आपको बहुत ज्यादा धैर्य रखने की जरूरत होती है।
रेस्पॉन्सिव पैरेंटिंग बच्चों के लिए है जरूरी
WHO की मानें तो रेस्पॉन्सिवनेंस यानी अनुक्रियता, एक मां या बच्चे की देखभाल करने वाले का फुर्ती दिखाना और बच्चे के साथ प्रासंगिक और उपयुक्त संवाद करना पैरेंटिंग का एक अहम टूल माना जाता है जो बच्चे के लिए काफी लाभदायक हो सकता है। ये सभी खूबियां ना सिर्फ बच्चे मनोवैज्ञानिक और सामाजिक विकास करती हैं बल्कि बच्चे को बीमारी और असमय मृत्यु से भी बचाती हैं। डिवेलपमेंटल पीडियाट्रिशन डॉ विभा कृष्णामूर्ति की मानें तो एक बच्चे को जीवित रहने और फलने-फूलने के लिए बेहतर न्यूट्रिशन, सुरक्षित माहौल और रेस्पॉन्सिव पैरेंटिंग की जरूरत होती है।
बच्चे की जरूरत के हिसाब से प्रतिक्रिया दें
रेस्पॉन्सिव पैरेंटिंग एक तरह से इंटरऐक्टिव पैरेंटिंग है जिसमें आपको अपने बच्चे को ऑब्जर्ब करना होता है और फिर उसी हिसाब से बच्चे की जरूरत के हिसाब से प्रतिक्रिया देनी होती है।
उदाहरण के लिए- खाना खाने के दौरान बच्चे को खिलौने या वीडियो दिखाकर डिस्ट्रैक्ट करने की बजाए उन संकेतों पर नजर रखें जब बच्चा सचमुच भूख महसूस कर रहा हो। ऐसा करने से आप बच्चे द्वारा दिए गए क्यू और संकेत को समझकर उसके हिसाब से प्रतिक्रिया देंगे तो बच्चे के ब्रेन को डिवेलप होने में मदद मिलेगी।
बच्चे को खुद खोजने दें समस्या का हल
रेस्पॉन्सिव पैरेंटिंग के जरिए बच्चे का सोशियो इमोशनल डिवेलपमेंट भी होता है जिसकी मदद से बच्चा कॉन्फिडेंट, इंडिपेंडेंट और प्रॉब्लम सॉल्व करने वाला बनता है। बेहद जरूरी है कि पैरेंट्स बच्चे को नाकामयाबी के लिए भी तैयार रखें। बच्चा अगर किसी तरह की परेशानी में है तो तुरंत उसकी समस्या का हल बताने की बजाए बच्चे को खुद ही उस समस्या से जूझने दें ताकि वह खुद उसके हिसाब से प्रतिक्रिया देना सीख जाए। हर बार अगर आप भी समस्या का हल बता देंगी तो बच्चा समस्या का हल खुद से कभी भी नहीं खोज पाएगा।
-एजेंसियां

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