इन Apps पर जानकारी शेयर करना खतरनाक, बैंकों के भी फर्जी Apps

मोबाइल फोन में डाउनलोड किए जाने वाले कई Apps से लोगों को साइबर सुरक्षा में खतरा पैदा हो गया है

नई दिल्‍ली। इंटरनेट पर नामी कंपनियों के Apps पर भी अपनी जानकारी शेयर करना खतरे से खाली नहीं है। कास्पर्स्की लैब द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक ऊबर, नेटफ्लिक्स, स्पॉटिफाई जैसे मशहूर ऐप्स के अलावा गेमिंग वेबसाइट्स, डेटिंग ऐप्स और अश्लील सामाग्री परोसने वाली वेबसाइट्स आसानी से आपकी सारी बैंक डिटेल्स चुरा रही हैं, जिसकी जानकारी आपको भी नहीं पता चलती है।

एक डॉलर से कम में उपलब्ध है जानकारी

हैकर्स प्रत्येक फोटो, कांटेक्ट और मैसेज के लिए 40 पैसे में आपकी जानकारी को खरीद लेते हैं। सारा भुगतान क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से होता है। वहीं अश्लील क्लिप के लिए 900 डॉलर से अधिक का भुगतान किया जाता है। मोबाइल फोन में डाउनलोड किए जाने वाले कई Apps से लोगों को साइबर सुरक्षा में खतरा पैदा हो गया है।

तीसरे पक्ष के साथ होता है शेयर

सेलफोन ऐप डेवलपर अन्नू गुप्ता ने कहा कि सर्वर पर जो डाटा स्टोर होता है वो तीसरे पक्ष के साथ कंपनियां शेयर करती हैं। एक और रिपोर्ट सामने आई है जिसमें दावा किया जा रहा है कि गूगल प्ले स्टोर पर 7 प्रमुख बैंकों के फर्जी ऐप मौजूद हैं जो करोड़ों ग्राहकों को डाटा चोरी कर रहे हैं और उन्हें हैकर्स तक पहुंचा रहे हैं। इसकी जानकारी सूचना प्रौद्योगिकी सुरक्षा से जुड़ी कंपनी सोफोज लैब्स ने अपनी एक रिपोर्ट में दी है।

बैंकों के फर्जी ऐप्स

जिन बैंकों के फर्जी ऐप्स होने की बात रिपोर्ट में कही गई है उनमें भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, सिटी बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और यस बैंक हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन फर्जी ऐप्स से ग्राहकों के डेबिट व क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स भी चोरी हो गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ये ऐप कैश बैक, नि:शुल्क मोबाइल डाटा और बिना ब्याज के कर्ज समेत पुरस्कार का वादा कर उपभोक्ताओं को डाउनलोड, इंस्टॉल और इस्तेमाल के लिए प्रलोभन देते हैं।

महत्वपूर्ण डाटा की पहचान

सबसे पहले व्यवसाय में इस्तेमाल हो रहे यूजर्स के महत्वपूर्ण डाटा की पहचान करनी चाहिए। इससे हमें उस डाटा के बारे में जानकारी हो जाती है, जिसे सबसे ज्यादा सुरक्षा की जरूरत होती है। इसके लिए डाटा लॉस प्रिवेन्शन सॉफ्टवेयर (डीएलपी) का इस्तेमाल करना चाहिए।

इस तरह के महत्वपूर्ण डाटा किसी भी योजना का ब्लू-प्रिंट, वित्तीय लेखा-जोखा या फिर किसी भी तरह की निजी तस्वीरें भी हो सकती हैं। डीएलपी सॉफ्टवेयर सुरक्षित की जाने वाली जानकारियों को वर्गीकृत कर देता है, जिसके बाद संस्था या आपको उसकी सुरक्षा के लिए एक योजना के तहत अत्यंत ही महत्वपूर्ण जानकारियों के रख-रखाव की उचित व्यवस्था करनी होती है। यह एक तरह का उत्कृष्ट उपाय है, जिसकी मदद से आप सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को हानि पहुंचने से बचा सकते हैं।
-एजेंसी

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