इतने बदनाम हुए हम इस ज़माने में, लगेंगी आपको सदियाँ हमें भुलाने में

हिन्दी के मूर्धन्य साहित्यकार, शिक्षक, एवं कवि गोपाल दास नीरज का जन्‍म 4 जनवरी 1925 को ब्रिटिश भारत के संयुक्त प्रान्त आगरा व अवध, जिसे अब उत्तर प्रदेश के नाम से जाना जाता है, में इटावा जिले के ब्लॉक महेवा के निकट पुरावली गाँव में बाबू ब्रजकिशोर सक्सेना के यहाँ हुआ था।
गोपाल दास नीरज कवि सम्मेलनों में काव्य वाचक और फ़िल्मों के गीत लेखक थे। वे पहले व्यक्ति थे जिन्हें शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में भारत सरकार ने दो-दो बार सम्मानित किया। पहले पद्म श्री से, उसके बाद पद्म भूषण से। यही नहीं, फ़िल्मों में सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिये उन्हें लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिला।
अलीगढ़ के धर्म समाज कॉलेज में हिन्दी विभाग के प्राध्यापक नियुक्त हो जाने के बाद नीरज ने मैरिस रोड जनकपुरी अलीगढ़ में अपना स्थाई आवास बना लिया और वहीं रहने लगे।
गोपालदास ‘नीरज’ ने दिल्ली के एम्स में 19 जुलाई 2018 की शाम लगभग 8 बजे अन्तिम सांस ली।
गोपालदास नीरज के लिखे फ़िल्मी-गीतों को लोगों ने जितने प्यार से गुनगुनाया, उतनी ही मुहब्बत से उन्होंने उनकी लिखी कविताओं को भी पढ़ा। पेश हैं नीरज की लिखी कविताओं से चुनिंदा पंक्तियां

हम तो मस्त फकीर, हमारा कोई नहीं ठिकाना रे
जैसा अपना आना प्यारे, वैसा अपना जाना रे

औरों का धन सोना चांदी
अपना धन तो प्यार रहा
दिल से जो दिल का होता है
वो अपना व्यापार रहा

हानि लाभ की वो सोचें, जिनकी मंजिल धन दौलत हो
हमें सुबह की ओस सरीखा लगा नफ़ा-नुकसाना रे

कोई जावे पुरी द्वारिका
कोई ध्यावे काशी
कोई तपे त्रिवेणी संगम
कोई मथुरा वासी

उत्तर-दक्खिन, पूरब-पच्छिम
भीतर बाहर, सब जग जाहर
संतों के सौ-सौ तीरथ हैं
मेरे वृन्दावन बस तुम हो!

आँसू जब सम्मानित होंगे, मुझको याद किया जाएगा
जहाँ प्रेम का चर्चा होगा, मेरा नाम लिया जाएगा

मान-पत्र मैं नहीं लिख सका, राजभवन के सम्मानों का
मैं तो आशिक़ रहा जन्म से, सुंदरता के दीवानों का
लेकिन था मालूम नहीं ये, केवल इस ग़लती के कारण
सारी उम्र भटकने वाला, मुझको शाप दिया जाएगा
-एजेंसियां

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