बिना उबाले किसी भी पशु के दूध का सेवन करना नुकसानदेह है

गांवों में पशुओं का दूध कच्चा ही पीने का चलन है और लोग इसे फायदेमंद माना जाता है, वहीं पिछले कुछ समय से बकरी के कच्चे दूध को डेंगू की कारगर दवा बताकर प्रचारित किया जा रहा है और शहरों में भी लोग इसका सेवन कर रहे हैं, लेकिन इन सबके विपरीत विशेषज्ञ कहते हैं कि बिना उबाले किसी भी पशु के दूध का सेवन करना नुकसानदेह है और इससे ब्रूसेलोसिस जैसी बीमारी भी हो सकती है जिसका ट्रीटमेंट नहीं होने पर ये जानलेवा साबित हो सकती है.
एक मामला आया है सामने-
हाल ही में मेदांता-मेडिसिटी गुड़गांव में इस तरह का मामला सामने आया जहां आये एक बुजुर्ग रोगी को पिछले करीब दो महीने से सांस लेने में दिक्कत और बार-बार बुखार की समस्या थी. ब्लड कल्चर की जांच में ब्रूसेलोसिस का पता चला जो पशुओं से होने वाला बैक्टीरियल इंफेक्शन है. डॉक्टरों ने जब कारणों की पड़ताल की तो पता चला कि वह नियमित बकरी का कच्चा दूध पीते थे और आम तौर पर पशुओं में पाये जाने वाला घातक बैक्टीरिया उनके शरीर में आ गया.
क्या कहते हैं डॉक्टर-
मेदांता की इंटरनल मेडिसिन की निदेशक डॉ. सुशीला कटारिया ने बताया कि गांवों में आज भी कच्चा दूध पीने का चलन है और लोग इसे इम्यून सिस्टम स्ट्रांग करने वाला मानकर इसका नियमित सेवन करते हैं. इस समय डेंगू के रोगियों को भी दवा के रूप में बकरी का कच्चा दूध पीने की सलाह दी जाती है लेकिन इन सब मामलों में बकरी के कच्चे दूध से होने वाले लाभों की डॉक्टसर्स ने पुष्टि नहीं की है.
जानलेवा हो सकता है ब्रूसेला बैक्टीरिया-
जानवरों का कच्चा दूध बहुत घातक है जिसके माध्यम से मानव शरीर में ब्रूसेला बैक्टीरिया आ जाता है और सही समय पर इसकी पहचान और इसका उपचार नहीं होने पर यह जानलेवा भी हो सकता है.
ब्रूसेलोसिस के लक्षण-
ब्रूसेलोसिस के आम लक्षणों में लंबे समय तक बुखार होता है जो कई महीनों तक भी रह सकता है. इनके अलावा अन्य लक्षणों में कमजोरी, सिर में दर्द और जोड़ों, मांसपेशियों और कमर का दर्द शामिल है. लेकिन कई मामलों में बुखार को सामान्य मान लिया जाता है और जांच में रोग का पता नहीं चल पाता.
पशुओं में क्यों पाया जाता है ये बैक्टीरिया-
सही हाइजीन आदि का ख्याल नहीं रखने पर पशु इस तरह के बैक्टीरिया के इंफेक्शन के शिकार हो जाते हैं और ऐसा नहीं है कि बार-बार दूध पीने से ही इंफेक्शन होने की आशंका रहती है, बल्कि मनुष्य को एक बार भी दूध बिना उबाले पीने पर इंफेक्शन का जोखिम होता है.
पनीर और आइसक्रीम भी उबले दूध की खाएं-
पनीर और आइसक्रीम जैसे उत्पाद भी दूध को उबलने तक गर्म करके नहीं बनाये जाते तो ब्रूसेलोसिस का खतरा होता है. कच्चे दूध से बनी आइसक्रीम का सेवन करने वाले एक व्यक्ति को ब्रूसेलोसिस का इंफेक्शन होने का मामला सामने आ चुका है.
ब्रूसेलोसिस का हो सकता है इलाज-
डॉ. कटारिया ने कहा कि बीमारी का पता चलने पर इसका इलाज हो सकता है और छह सप्ताह तक दवाइयां लेनी होती हैं. सामान्य ब्लड रिपोर्ट में इसका पता चलने की संभावना कम होती है. विशेष रूप से जांच करानी होती है.
कुछ अध्ययनों में भी उबले दूध की तुलना में कच्चे दूध का सेवन नुकसानदायक बताया गया है. ऐसे में डा. सलाह देते हैं कि दूध का इस्तेमाल उबालकर ही करना चाहिए.
-एजेंसी