गुलालाई इस्माइल के परिवार का पाकिस्तान में जीना दूभर

इस्‍लामाबाद। मारे जाने के डर से किसी तरह बचकर अमेरिका पहुंचीं मानवाधिकार कार्यकर्ता गुलालाई इस्माइल के परिवार का पाकिस्तान में जीना दूभर हो चुका है।
पाकिस्तानी सुरक्षा बल के जवान गुरुवार को इस्लामाबाद स्थित गुलालाई के घर आ धमके और उनके रिटायर्ड प्रोफेसर पिता से बाहर आने को कहा।
जवानों ने गुलालाई के पिता मोहम्मद से कहा कि वे उनसे बात करना चाहते हैं, लेकिन मोहम्मद सुरक्षा बलों की मंशा भांप चुके थे। उन्होंने घर से बाहर निकलने से इंकार कर दिया। मोहम्मद ने बताया, ‘मैंने उनसे कहा कि आप बिना यूनिफॉर्म के हैं और आपके पास हथियार हैं। मैं बाहर नहीं आऊंगा।’
पाकिस्तान में मानवाधिकार की आवाज उठाने वालों और उनके परिजनों को प्रताड़ित करने के लिहाज से इस तरह की छापेमारी की घटना आम हो गई है। पाकिस्तानी सुरक्षा बल की करतूतों का खुलासा करने वालों को इस तरह के डरा-धमका कर खामोश करने का चलन बढ़ता जा रहा है।
गुलालाई इस्माइल के माता-पिता पर टेररिज्म फंडिंग के आरोप में मुकदमा चल रहा है। आरोप है कि उन्होंने अपनी बेटी के जरिए आतंकवादी गतिविधियों की मदद के लिए पैसे मुहैया कराए। वो इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की साजिश बताते हैं। मोहम्मद और उनकी पत्नी अभी जमानत पर जेल से बाहर हैं, लेकिन उनकी विदेश यात्रा पर पाबंदी लगी हुई है।
पाकिस्तानी आर्मी और उसके ताकतवर खुफिया एजेंसी ने गुलालाई को उनकी आलोचनाओं के लिए निशाना बनाना शुरू किया तो वो भूमिगत हो गईं। फिर बचते-बचाते अमेरिका में अपनी बहन के यहां पहुंच गईं। उन्होंने पिछले महीने अमेरिका से शरण मांगी है।
गुलालाई और उनका परिवार पश्तूनों पर पाकिस्तान की सरकार, पुलिस प्रशासन और सेना के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। पश्तूनों का संगठन पीटीएम बॉर्डर एरिया में पाकिस्तानी सेना द्वारा चलाए जा रहे उस अभियान की कड़ा विरोध करता है जिसे आर्मी आतंकवाद के खिलाफ युद्ध बताती है। हालांकि, हकीकत में वह अधिकारों की मांग करने वाले पश्तूनों की हत्या करता है। पाकिस्तान सुरक्षा बलों ने कई पश्तून युवाओं को गायब कर दिया है।
पीटीएम का समर्थन करने पर गुलालाई को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। हालांकि, वह पाकिस्तानी इस्टैब्लिशमेंट की आंख की किरकरी तब बन गईं जब उन्होंने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा आदिवासी क्षेत्रों, खासकर वजीरिस्तान में महिलाओं और लड़कियों के यौन उत्पीड़न का खुलकर विरोध करना शुरू कर दिया।
गुलालाई के पिता मोहम्मद ने कहा, ‘वजीरिस्तान में जवान लड़कियों और महिलाओं ने बताया कि कैसे आर्मी और असामाजिक तत्व उनकी इज्जत तार-तार करते रहते हैं।’ ऊर्दू के प्रोफेसर रहे मोहम्मद इस्माइल ने 1980 के दशक में तत्कालीन सैन्य तानाशाह जनरल मोहम्मद जिया-उल हक का विरोध किया क्योंकि वह अमेरिका से पैसे लेकर इस्लामी आतंकवादियों को ट्रेनिंग और हथियार मुहैया कराने की नीति बना ली थी। वे आतंकवादी अफगानिस्तान में सोवियत रूस के खिलाफ लड़ते थे। उन्हीं में ओसामा बिन लादेन जैसे कुछ आतंवादियों ने बाद में अल-कायदा जैसा खूंखार आतंकी संगठन बना लिया।
इस्माइल परिवार उसी अफगानिस्तान वॉर से निकले तालिबान के निशाने पर रहता है। कुछ साल पहले उनका घर तहस-नहस कर दिया गया क्योंकि तब उन्होंने खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत में तालिबानी करतूतों के खिलाफ आवाज उठाई थी। पश्तूनों का संगठन पीटीएम का कहना है कि पाकिस्तान की आर्मी अब भी अच्छे और बुरे तालिबान का भेद कर रही है। भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त आतंकी संगठनों के प्रति उसका मोह नहीं टूट रहा है। हां, उसकी करतूतों को चुनौती देने वालों के प्रति निर्दयता से जरूर निपट रहा है।
-एजेंसियां

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