इसरो ने लॉन्च व्हीकल से किया दो सैटलाइट का सफल प्रक्षेपण

हैदराबाद। इसरो ने गुरुवार रात ग्यारह बजकर 37 मिनट को पीएसएलवी के लॉन्च व्हीकल सी-44 के जरिए दो सैटलाइट का सफल प्रक्षेपण किया। लॉन्चिंग के समय तय करने में माइक्रोसैट-आर सैटलाइट ने मुख्य भूमिका निभााई।
आन्ध्र प्रदेश स्थित श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से आधी रात को पीएसएलवी के लॉन्च व्हीकल सी-44 के जरिए दो सैटलाइट का सफल प्रक्षेपण किया गया। पांच महीने में यह दूसरा ऐसा मौका था जब सैटलाइट का प्रक्षेपण रात के वक्त किया गया हो। लॉन्चिंग का समय निर्धारित करने में सैटलाइट माइक्रोसैट-आर ने मुख्य भूमिका निभाई। इसरो के चेयरमैन के सिवन का कहना है कि सैटलाइट की जरूरत के हिसाब से समय का चुनाव किया गया।
दरअसल, 740 किलोग्राम भार वाला इमेंजिंग सैटलाइट माइक्रोसैट-आर को इस तरह योजनाबद्ध किया गया था कि यह हर दिन दोपहर 12 बजे के करीब भूमध्य रेखा को पार करे जब सूर्य भारतीय क्षेत्र को रोशन कर रहा होता है। गुरुवार को श्रीहरिकोटा के भारतीय स्पेसपोर्ट के पहले लॉन्च पैड से रात ग्यारह बजकर 37 मिनट पर PSLVC-44 ने माइक्रोसैट-आर और कलामसैट आर सैटलाइट को साथ लेकर प्रक्षेपण किया।
इसरो के चेयरमैन के सिवन ने बताया, ‘लॉन्च का समय सैटलाइट की जरूरत पर निर्भर करता है। यहां वह चाहते थे कि सैटलाइट भूमध्यरेखा के दक्षिणी छोर से उत्तरी छोर में 12 बजे के करीब पार करे, यह सूरज की रोशन की स्थिति के कारण हो सकता है। उन्होंने आगे बताया, ‘हमारा लॉन्चर भूमध्य रेखा के उत्तर से दक्षिण की ओर जाता है इसलिए सैटलाइट की जरूरत को देखते हुए हमने रात में प्रक्षेपण कराया।’
उन्होंने कहा, ‘सैटलाइट टीम इस बात को तय करती है कि सैटलाइट कब तस्वीरें लेना शुरू करे। यह सर्वाधिक सूर्य की रोशनी में हो सकता है या फिर कम बादलों की स्थिति में। लॉन्च का समय उस पर निर्धारित किया जाता है। बता दें कि उड़ान के कुछ मिनटों बाद ही इसरो ने माइक्रोसैट-आर को उसकी वांछित कक्षा में स्थापित कर दिया।
-एजेंसियां

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