इसराइल: नेतन्याहू को सत्ता से बेदखल करने की कोशिशें, हिंसा की आशंका

इसराइल की ख़ुफ़िया सेवा के प्रमुख ने सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा और उकसावे वाले बयानों को लेकर चेतावनी जारी की है. उन्होंने हाल के दिनों में भड़काऊ बयानों में आयी तेज़ी को लेकर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इनसे आने वाले समय में राजनीतिक हिंसा भड़क सकती है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार एक बेहद ही ‘असामान्य’ सार्वजनिक बयान में ख़ुफ़िया सेवा शिन बेट के प्रमुख नादाव अर्गामान ने राजनेताओं और धार्मिक नेताओं से कम बयानबाज़ी करने का आग्रह किया है.
मौजूदा समय में इसराइल राजनीतिक अस्थिरता और तनाव के बुरे दौर से गुज़र रहा है.
इसराइल के घरेलू सुरक्षा सेवा के प्रमुख ने शनिवार को एक चेतावनी जारी की जिसमें उन्होंने मौजूदा राजनीतिक माहौल में हिंसा को लेकर आशंका जताई है.
दशकों के बाद इसराइल में इस तरह का राजनीतिक माहौल पनपा है जिसे लेकर सुरक्षा सेवा के प्रमुख की ओर से चेतावनी जारी की गई है.
एक ओर जहां देश अभी हाल ही में हमास के साथ हिंसक संघर्ष से निकला है वहीं देश में मौजूदा प्रधानमंत्री नेतन्याहू को सत्ता से बेदखल करने की कोशिशें जारी हैं. जिसके लिए विपक्ष एकजुट हो चुका है.
चेतावनी जारी करते हुए ख़ुफ़िया सेवा शिन बेट के प्रमुख नादाव अर्गामान ने कहा, “हमने हाल ही में भड़काऊ बयानों और अभद्र भाषा वाले पोस्ट्स में बढ़ोत्तरी देखी है. ख़ासतौर पर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर.”
हालांकि इस दौरान उन्होंने किसी का भी नाम नहीं लिया.
अपने बयान में उन्होंने कहा कि हो सकता है कि इस तरह के बयान किन्हीं विशेष समुदायों की ओर से पोस्ट किये जा रहे हों या फिर किसी व्यक्ति विशेष की ओर से भी ऐसा किया जा सकता है. जिनका मक़सद हिंसा को भड़काना और गैर-क़ानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देना हो सकता है. इससे लोगों की जान भी जा सकती है.
इसराइल के मौजूदा प्रधानमंत्री नेतन्याहू अपने 12 साल के कार्यकाल के अंत की संभावना से जूझ रहे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि नेतन्याहू का जाना लगभग तय है.
नेतन्याहू का जाना लगभग तय
इसराइल में प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के विरोधियों के बीच गठबंधन सरकार बनाने को लेकर सहमति बन गई है जिसके बाद उनकी विदाई का रास्ता साफ़ हो गया है.
नेतन्याहू इसराइल में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता हैं और पिछले 12 साल से देश की राजनीति उनके ही इर्द-गिर्द घूमती रही है.
मार्च में हुए चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को बहुमत नहीं मिलने के बाद दूसरे नंबर की पार्टी को अन्य सहयोगियों के साथ सरकार बनाने का निमंत्रण दिया गया था.
उन्हें बुधवार 2 जून की मध्यरात्रि तक बहुमत साबित करना था और समयसीमा समाप्त होने के कुछ ही देर पहले विपक्षी नेता याएर लेपिड ने घोषणा की कि आठ दलों के बीच गठबंधन हो गया है और अब वो सरकार बनाएँगे.
इसके साथ ही इसराइल में राजनीतिक अनिश्चितता के बीच जारी अटकलों पर विराम लग गया है क्योंकि गठबंधन पर सहमति होने को कई लोग असंभव बात मान रहे थे.
गठबंधन के लिए हुए समझौते के तहत बारी-बारी से दो अलग दलों के नेता प्रधानमंत्री बनेंगे. सबसे पहले दक्षिणपंथी यामिना पार्टी के नेता नेफ़्टाली बेनेट प्रधानमंत्री बनेंगे. बेनेट 2023 तक इस पद पर रहेंगे. बाद में अगस्त 2023 में वो ये पद मध्यमार्गी येश एटिड पार्टी के नेता याएर लेपिड को सौंप देंगे.
71 वर्षीय नेतन्याहू इसराइल में सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले नेता हैं और इसराइल की राजनीति में एक पूरे दौर में उनका दबदबा रहा है.
मगर रिश्वत खोरी और धाँधली के आरोपों का सामना कर रहे नेतन्याहू की लिकुड पार्टी मार्च में हुए आम चुनाव में बहुमत नहीं जुटा पाई और चुनाव के बाद भी वो सहयोगियों का समर्थन नहीं हासिल कर सके.
इसराइल में पिछले दो सालों से लगातार राजनीतिक अस्थिरता बनी है और दो साल में चार बार चुनाव हो चुके हैं. इसके बावजूद वहाँ स्थिर सरकार नहीं बन पाई है और ना ही नेतन्याहू बहुमत साबित कर पाए हैं.
नेतन्याहू के बहुमत नहीं साबित करने के बाद याएर लेपिड को सरकार बनाने के लिए 28 दिनों का समय दिया गया था लेकिन ग़ज़ा में संघर्ष की वजह से इसपर असर पड़ा.
तब उनकी एक संभावित सहयोगी अरब इस्लामिस्ट रा’म पार्टी ने गठबंधन के लिए जारी बातचीत से ख़ुद को अलग कर लिया.
फ़लस्तीनी चरमपंथी गुट हमास और इसराइल के बीच 11 दिनों तक चली लड़ाई के दौरान इसराइल के भीतर भी यहूदियों और वहाँ बसे अरबों के बीच संघर्ष हुआ था.
-BBC

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