यूएस से आर्थिक मदद में शर्तें लागू होने पर इस्लामाबाद ने खेला चीनी कार्ड

इस्लामाबाद। पाकिस्तान पर आंतकवाद के सुरक्षित पनाहगाह होने के आरोपों के बाद यूएस की तरफ से आर्थिक मदद में शर्तें लागू होने पर अब इस्लामाबाद ने चीन कार्ड खेला है। प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी ने सोमवार को कहा है कि पाकिस्तानी अधिकारियों को प्रतिबंधित करना या सैन्य सहायता में कटौती करना अमेरिका के लिए प्रतिकूल हो सकता है। अब्बासी ने चेतावनी दी कि इससे दोनों देशों की आतंकवाद के खिलाफ जारी लड़ाई पर भी असर पड़ेगा।
बीते महीने अफगानिस्तान पर यूएस की नई रणनीति की घोषणा के समय राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर लताड़ा था, जिसके बाद से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव है। अब्बासी ने कहा, ‘हम आतंकवाद के खिलाफ युद्ध लड़ रहे हैं, हमारी कोशिशों को कुछ भी नुकसान पहुंचा तो इससे अमेरिका की कोशिशों को ही नुकसान होगा।’
अमेरिका ने बीते साल पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर से भी कम सैन्य सहायता दी है जबकि 2011 में यह राशि 3.5 अरब डॉलर थी। अब्बासी ने वॉशिंगटन को इसपर चेताया कि पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद में कटौती कर के अमेरिका कभी भी अपने आतंकविरोधी लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकेगा। उन्होंने कहा कि सैन्य सहायता में कटौती की बजाय सहयोग बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए।
अमेरिका की सख्ती के बाद पाकिस्तान का चीन की तरफ झुकाव पहले से भी ज्यादा बढ़ गया है और अब्बासी के बयान से भी इसकी पुष्टि हो जाती है। अब्बासी ने कहा, ‘चीन के साथ हमारा बड़ा आर्थिक सहयोग है, 1960 से हमारे सैन्य रिश्ते हैं, बेशक वह भी हमारा एक विकल्प है।’ अब्बासी ने कहा, ‘अफगानिस्तान में हर परेशानी के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराना गलत है। अमेरिका को पाकिस्तान के नुकसान और 35 लाख अफगानिस्तानी शरणार्थियों को पनाह देने के लिए हमारी तारीफ करनी चाहिए।’
अब्बासी ने कहा कि अफगानिस्तान में पल रहे आतंकवादी भी पाकिस्तान पर हमले कर रहे हैं। जिसकी वजह से हमें सीमा पर बाड़ लगाने के लिए अरबों डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हमें पूरी सीमा पर बाड़ लगाने की जरूरत है।
-एजेंसी