Sweden के PM ओलेफ पाम की हत्या क्‍या बोफोर्स सौदे से जुड़ी है?

Sweden के प्रधानमंत्री ओलेफ पाम की आज से तीस साल पहले हत्या कर दी गई थी. वो शुक्रवार की एक रात थी, जब वो अपनी पत्नी लिसबेट के साथ फिल्म देखकर लौट रहे थे तब हत्यारों ने उन्हें गोली मार दी थी. गोली लगते ही उनकी मौत हो गई थी.
आज तक उनकी हत्या की गुत्थी सुलझी नहीं है. जब राजीव गांधी भारत के प्रधानमंत्री थे तब Sweden की हथियार कंपनी बोफोर्स के साथ तोप मुहैया कराने को लेकर सौदा हुआ था. कई लोगों का मानना है कि उनकी हत्या बोफोर्स के इस हथियार सौदे से जुड़ी हुई है.
ओलेफ दूसरी बार Sweden के प्रधानमंत्री चुने गए थे. इसके बावजूद उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वो एक साधारण ज़िंदगी जीते थे. वो अक्सर पुलिस की सुरक्षा लेने से मना कर देते थे. हत्या वाली रात भी वो बिना किसी पुलिस सुरक्षा के किसी आम शहरी की तरह फिल्म देखने गए हुए थे. ओलेफ अपनी बेबाकी के लिए भी जाने जाते थे.
Sweden के भीड़-भाड़ वाले इलाके में सरेआम गोली मारने के बाद भी आज तक उनके हत्यारों का पता नहीं चल पाया है. करीब दर्जन भर लोग इस वारदात के गवाह भी थे जिन्होंने अपने सामने यह हत्या होते हुई देखी थी.
34 साल बाद अब Sweden के संबंधित अधिकारियों ने यह घोषणा की है कि वो इस घटना को लेकर हुई तफ्तीश के नतीजों के बारे में बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेस में बताएंगे.
मुख्य अभियोजक क्रिस्टर पीटरसन ने Sweden के सरकारी टीवी चैनल पर कहा था, “मैं इस बात को लेकर आशान्वित हूँ कि मर्डर के बारे में और इसके लिए कौन जिम्मेवार है, इसे सामने लाया जा सकेगा.”
इस बारे में कुछ पता नहीं कि किसी पर मुक़दमा दर्ज किया गया है या फिर किसी संदिग्ध का नाम सामने आया है लेकिन उम्मीद की जा सकती है कि पुलिस आखिरकार दशकों से चली आ रही इस अनसुलझी पहेली को सुलझा लेगी और कई तरह के षड्यंत्रों की कहानियों पर विराम लग पाएगा.
‘ब्लड ऑन द स्नो: द कीलिंग ऑफ ओलेफ पाम’ नाम की किताब के लेखक डॉक्टर जेन बॉनडेसन कहते हैं, “यह ऐसा ही जैसे कोई मार्गेरेट थैचर को पिकाडिली सर्कस में गोली मार कर और गायब हो जाए और फिर कभी ना पकड़ा जाए.”
ओलेफ के बेटे मार्टिन पाम उन आखिरी लोगों में से थे जिन्होंने उन्हें आख़िरी वक़्त में देखा था. उन्होंने इस साल की शुरुआत में कहा था, “पुलिस के पास सबूत है लेकिन वो इसे सामने नहीं लाना चाहती.”
उन्होंने Sweden के आफटब्लेट अखबार से बातचीत में कहा, “अगर किसी के पास कुछ अहम सुराग है और वो अब तक सामने नहीं आया है तो यह वक़्त उसके सामने आने का है.”
कौन थे ओलेफ पाम?
ओलेफ पाम का जन्म एक ऊंचे घराने में 1927 में हुआ था. उन्होंने 1949 में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ज्वाइन किया.
1969 में वो अपने मेंटर टैग एरलैंडर की जगह पार्टी के प्रमुख बने. वो दो बार Sweden के प्रधानमंत्री चुने गए थे.
उन्होंने अपने कार्यकाल में मज़दूर संगठनों को मजबूत किया. स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया और एक लोककल्याणकारी राज्य के तौर पर अहम फैसले लिए. उन्होंने राजशाही से जुड़ी तमाम औपचारिक राजनीतिक ताकतों को हटाया. शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने महत्वपूर्ण काम किए.
ओलेफ पाम इंटरनेशनल सेंटर की महासचिव संडस्टॉर्म ने कहा, “ओलेफ पाम को टैग एरलैंडर के नक्शे कदम पर चलने वाला कहा जाता है. टैग एरलैंडर ने उन्हें राजनीति में प्रशिक्षित किया था. टैग Sweden में लोककल्याणकारी राज्य के संस्थापक थे. पाम ने उनकी नीतियों को बखूबी आगे बढ़ाया. उन्होंने नर्सरी और प्री-स्कूल की शुरुआत की. औरतों को पहली बार काम करने की इजाज़त दी और जेंडर के भेदभाव को मिटाने में अहम भूमिका निभाई.”
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी वो एक सशक्त आवाज़ थे. उन्होंने अमरीका और सोवियत संघ दोनों की आलोचना की. उन्होंने सोवियत संघ के 1968 में चेकोस्लोवाकिया में अतिक्रमण करने का विरोध किया और उत्तरी वियतनाम में अमरीकी बमबारी का दूसरे विश्व युद्ध के दौरान के नाजियों के कैंप से तुलना की.
देश और बाहर दोनों ही जगहों पर उनके फैसलों की वजह से उनके कई दुश्मन और समर्थक भी बन गए थे.
उनकी सुधारात्मक कदमों की वजह से देश का व्यावसायिक वर्ग उनसे नाराज़ हो गया था तो वहीं विदेशी सरकारों को खड़ी-खोटी सुनाने की वजह से दुनिया भर के नेता उनसे प्रभावित थे.
1973 को न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “मुझे इस बात का कोई दुख नहीं क्योंकि दुनिया को अपनी बात सुनानी है तो आपको खुल कर बोलना ही होगा. किसी मुद्दे पर मैं चुप नहीं रह सकता और न ही कोई मुझे चुप करा सकता है.”
कैसे मारे गए ओलेफ पाम?
28 फरवरी 1986 को जिस दिन पाम की हत्या हुई थी, उन्होंने अपनी सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों को छुट्टी दे दी थी.
जब वो घर पहुँचे तो उनकी बीवी ने उन्हें सिनेमा चलने को कहा. लिसबेट ने अपने बेटे मार्टिन से पहले ही टिकट के बारे में बोल रखा था. मार्टिन ने ख़ुद और अपनी गर्लफ्रेंड के लिए भी टिकट ले रखे थे. पाम और उनकी बीवी घर से अपने बेटे के साथ नहीं निकले थे. मार्टिन और उनकी गर्लफ्रेंड से पाम और लिसबेट की मुलाकात हॉल के बाहर नौ बजे के करीब हुई.
फिल्म देखने के बाद भी वो दोनों अपने बेटे और उनकी गर्लफ्रेंड से अलग ही घर के निकले.
तभी एक भीड़ भाड़ वाली सड़क से गुजरते हुए करीब 11 बजकर 21 मिनट पर एक लंबा आदमी पाम के पीछे से आता है और प्वाइंट ब्लैंक रेंज से उनकी पीठ में गोली मार देता है. इसके बाद दूसरी गोली लिसबेट को मारता है.
इसके बाद हत्यारा भागते हुए सड़क पार करता है और बगल की गली में सीढ़ी चढ़ते हुए गायब हो जाता है.
पाम की हत्या की ख़बर से पूरा स्वीडन स्तबध रह गया था. शैरलोट वॉलस्टैन तब सिर्फ 12 साल की थी जब उनके पिता ने उन्हें बताया था कि कुछ बहुत ही भयावह घटना घटी गई है.
वो कहती हैं, “हमने तुरंत टीवी चालू किया. टीवी पर पाम की हत्या की ख़बर आ रही थी. पूरा देश सदमे में था.”
वो याद करती है कि उनके स्कूल में पाम की याद में कैंडल जलाए गए थे. वो कहती हैं, “जब उनकी हत्या हुई तब राजनीति सबसे अहम बात नहीं रह गई थी. सब सदमें में थे. स्वीडन में ऐसा पहले नहीं हुआ था.”
ऐसा लगता है कि पुलिस भी सदमे में थी. पुलिस अधिकारियों ने घटना स्थल की ठीक से घेराबंदी नहीं की और घटना के घंटों बाद शहर के छोटे से इलाके को ही बंद रखा.
शोक जताने वाले वहाँ से गुजरते रहे और फूल चढ़ाते रहे जहाँ पाम का खून अब भी ज़मीन पर बह रहा था. मौजूद गवाहों से जब तक सवाल पूछा जाता तब तक वो जा चुके थे. काफी दिनों तक उस एक गोली को नहीं खोजा जा सका था जिस पर बाद में एक राहगीर की नज़र पड़ी थी.
क्या वजह हो सकती है ओलेफ पाम की हत्या की?
डॉक्टर जेन बॉनडेसन बताते हैं कि जो गोलियां घटना स्थल पर मिली थी उससे पता चलता है कि हत्यारे ने 0.357 मैगनम गन का इस्तेमाल हत्या में किया था.
वो कहते हैं, “यह एक काफी शक्तिशाली गन होती है. अगर वो बुलेटप्रूफ़ जैकेट भी पहने होते तो वो मारे जाते. इसलिए यह कोशिश उन्हें वाकई में जान से मार देने के लिए ही हुई थी. यह पूरी तरह से योजनाबद्ध था.”
पहली बार इस मामले के मुख्य जांचकर्ता को लगा कि उनकी हत्या का लेना-देना कुर्द चरमपंथी पीकेके के साथ है. ये चरमपंथी तुर्की के ख़िलाफ़ गुरिल्ला लड़ाई लड़ रहे थे. पाम की सरकार ने इस संगठन को चरमपंथी संगठन घोषित कर रखा था.
1988 में पुलिस ने क्रिस्टर पीटरसन नाम के एक अपराधी को गिरफ़्तार किया. उन्होंने स्टॉकहोम की सड़क पर एक आदमी की बिना वजह हत्या कर दी थी और उनका हुलिया उस आदमी से मिलता था जिसने सिनेमा हॉल के पास पाम की हत्या की थी.
शिनाख्त के वक़्त भी लिजबेट ने पीटरसन की हत्यारे के रूप में पहचान की थी. उन्हें दोषी पाते हुए 1989 में उम्र कैद की सज़ा दे दी गई लेकिन उनके वकील ने तुरंत इसके ख़िलाफ़ अपील की और बिना मक़सद और हत्या में शामिल हथियार के नहीं मिलने की वजह से उन्हें रिहा कर दिया गया.
वो सिर्फ़ तीन महीने तक क़ैद में रहे. उन्हें मुआवजे के तौर पर 50 हज़ार डॉलर दिए गए. पिटरसन की 2004 में मौत हो गई थी.
भारत को तोप बेचने का सौदा
ओलेफ की हत्या को लेकर कई तरह की कहानियां सामने आई हैं. दक्षिण अफ्रीका के पूर्व पुलिस अधिकारी ने 1996 में दावा किया कि पाम की हत्या इसलिए हुई क्योंकि उन्होंने नस्लभेद के खिलाफ आवाज़ उठाने में साथ दिया था और अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस को फंड भी दिया था.
Sweden के जांचकर्ता इसके बाद दक्षिण अफ्रीका गए भी थे लेकिन उन्हें इस दावे के अलावा कोई भी दूसरा सबूत नहीं मिला.
हालांकि डॉक्टर जेन बॉनडेसन का मानना है कि ओलेफ पाम की हत्या भारत के साथ हुए आर्म्स डील से जुड़ी हुई थी. स्वीडन की हथियार बनाने वाली कंपनी बोफोर्स का अस्सी और नब्बे के दशक में भारत को तोप बेचने का सौदा हुआ था. लेकिन बाद में पता चला था कि बोफोर्स ने भारत में कई लोगों को इस सौदे को पक्का करने के लिए घूस खिलाई थी. इसमें तब भारत के प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी का भी नाम सामने आया था. कई सालों तक भारत की अदालतों में इस पर सुनवाई भी हुई थी लेकिन कोई नतीजा अब तक सामने नहीं आ पाया है.
बॉनडेसन कहते हैं, “यह हो सकता है कि ओलेफ को हत्या के दिन पता चल गया होगा कि बोफोर्स ने धांधली की है. बोफोर्स सौदे में शामिल बिचौलियों के लिए उनकी हत्या करने की यह एक मजबूत वजह थी. लेकिन पुलिस ने हमेशा इसे नज़रअंदाज किया.”
इसके अलावा एक स्कैंडियन व्यक्ति पर भी शक जाहिर किया गया था. उनका नाम था स्टिग एंग्सट्रॉम. वो स्कैंडिया की एक बीमा कंपनी में काम करते थे. इस कंपनी का मुख्यालय घटना स्थल के पास ही था. वो उन 20 लोगों में से एक थे जिन्होंने यह हत्या होते हुए देखी थी. उन्होंने ख़ुद को साल 2000 में मार लिया था.
हथियार चलाने की ट्रेनिंग
स्वीडन के एक पत्रकार थॉमस पीटरसन ने सबसे पहले उन्हें एक संदिग्ध के रूप में पहचाना था. उन्होंने आरोप लगाया था कि एंग्सट्रॉम के पास हथियार चलाने की ट्रेनिंग थी और उनकी दोस्ती एक ऐसे व्यक्ति के साथ थी जिसके पास बंदूकों का संग्रह था. वो मैगनम गन का भी शौक़ रखता था.
एंग्सट्रॉम ने हत्या के वक़्त प्रधानमंत्री की मदद करने का झूठा बयान भी दिया था.
बॉनडेसन कहते हैं कि “स्वीडन के कई लोग यह मानते हैं कि एंग्सट्रॉम को बली का बकरा बनाया गया होगा. वो कद में बहुत छोटा और कमजोर सा दिखने वाला था जबकि हत्यारा लंबा और मजबूत कद-काठी का था. एक बात यह भी कि एंग्सट्रॉम ने कभी कोई हत्या नहीं की थी.”
-BBC

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