तेजी पकड़ रहा है वर्कप्लेस पर Wellness का कॉन्सेप्ट

बिगड़ती जीवनशैली और तमाम दबावों के चलते दुनियाभर में मानसिक रूप से बीमार लोगों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। यही कारण है कि इन दिनों वर्कप्लेस पर Wellness का कॉन्सेप्ट काफी तेजी पकड़ रहा है।
एक आंकड़े के अनुसार कॉर्पोरेट Wellness की वैल्यू साल 2015 में 3.4 बिलियन डॉलर थी, जिसके 2024 तक 7.4 बिलियन डॉलर तक के हो जाने की उम्मीद है। जो कि इस दौरान एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सकल वार्षिक वृद्धि दर का 9 प्रतिशत होगा।
इंश्योरेंस कवर के अलावा हेल्थकेयर सॉल्यूशन भी
प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ के बीच बैलेंस बनाने के लिए भारतीयों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है, जिसका असर कर्मचारी की परफॉर्मेंस और कंपनी के प्रॉडक्शन पर भी पड़ता है। बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियां अब इस बात को अच्छी तरह समझने लगी हैं। शायद यही कारण है कि कंपनियां अब एंप्लॉयी की हेल्थ और Wellness पर निवेश करने में हिचकिचा नहीं रही हैं इसलिए अब वे इंश्योरेंस कवर के अलावा हेल्थकेयर सॉल्यूशन की सुविधा भी ऑफर कर रहे हैं। अब कंपनियां शरीर, दिमाग और उद्देश्यों के लिए विभिन्न प्रकार के स्वास्थ्यवर्द्धक उपाय करने को प्रतिबद्ध हैं। वजन घटाने, तनाव और स्मोकिंग मुक्ति से लेकर डायग्नोस्टिक केयर तक का ख्याल कंपनियों द्वारा रखा जा रहा है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि वैलनेस प्रोग्राम्स का उद्देश्य कर्मचारियों के जीवन को बेहतर बनाना होता है।
पर्सनल केयर
कंपनियां अब अपने एंप्लॉयी की सेहत पर खास ध्यान दे रही हैं और उन्हें पर्सनल केयर मुहैया करवा रही हैं। इसके लिए कंपनियां न सिर्फ डॉक्टर से इलाज करवाने की सुविधा दे रही हैं बल्कि तकनीक के इस्तेमाल से उन्हें जब जरूरत हो, तब डॉक्टर तक पहुंचा भी रही हैं। कंपनियां डिजिटल प्लेटफार्म के जरिए हर एंप्लॉयी के स्वास्थ्य के हिसाब से अलग-अलग आवश्यकताओं पर नजर रख रही है। इसकी सहायता से उनके स्वास्थ की मौजूदा स्थिति, पसंद और प्राथमिकताओं का पता लगाया जा रहा है और उनके लिए वैलनेस प्लान तैयार किया जा रहा है।
टोटल वैलनेस
कर्मचारियों के पूर्ण स्वास्‍थ्‍य लाभ के लिए कंपनियां आजकल वर्कप्लेस के माहौल को भी बेहतर बनाने पर जोर दे रही हैं ताकि कोई कर्मचारी खुद को किसी डिब्बे में पड़ी तीली की तरह न महसूस करे। यहां पूर्ण स्वास्थ्य लाभ से मतलब केवल शारीरिक तंदुरुस्ती से नहीं, बल्कि Wellness के पूरे स्पेक्ट्रम से है जिसमें शारीरिक वैलनेस के साथ-साथ मानसिक, भावनात्मक और फाइनेंशियल वैलनेस भी शामिल है। उदाहरण के लिए जब कोई व्यक्ति वित्तीय संकट से गुजर रहा है या उधारी के कारण परेशान है, तो वह धीरे-धीरे तनाव का शिकार होने लगता है, जो वर्कप्लेस पर उसकी कार्य क्षमता को प्रभावित करती है। उसकी अनुपस्थिति बढ़ने लगती है और वह धीरे-धीरे खराब आदतों और बीमारियों की तरफ बढ़ने लगता है इसलिए एक संपूर्ण वैलनेस प्लान के अंतर्गत वित्तीय प्रबंधन को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया जा रहा है।
मेडिकल सुविधाओं में बढ़ोत्तरी
कई कंपनियां अब यह भी नोटिस कर रही हैं कि उनके किन एंप्लॉयीज के ऊपर बच्चे या वृद्ध निर्भर हैं। ऐसे में कंपनियां यह ख्याल रखती हैं कि आने वाले वक्त में उनके ऊपर बोझ पड़ सकता है। ऐसे में कंपनियां एंप्लॉयीज के डिपेंडेंट के लिए मेडिकल सुविधाओं में बढ़ोत्तरी कर रही हैं ताकि कर्मचारी अपने फाइनेंस और अपने ऊपर निर्भर परिवार की चिंता छोड़ कंपनी के काम पर ज्यादा ध्यान दे सकें।
छुट्टियों में वृद्धि
कई सारे वैश्विक शोधों से इस बात की पुष्टि हुई है कि टोटल वैलनेस में छुट्टियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है मगर आज भी भारतीय कर्मचारी फाइनेंशियल प्रॉब्लम्स और काम के बोझ के कारण छुट्टी लेने से हिचकिचाते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए कई कंपनियां अब अपने कर्मचारियों को छुट्टी देने में ढिलाई बरतने लगी हैं। इसे देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले सालों में कर्मचारियों को दबाव मुक्त करने करने के लिए और अधिक कंपनियां आगे आएंगी और कर्मचारियों की छुट्टियों में वृद्धि करेंगी।
-एजेंसी

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