जम्मू-कश्मीर में इन्वेस्टर्स समिट 12 से 14 अक्‍टूबर तक

नई दिल्‍ली। अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में बदलाव की कोशिशें शुरू हो गई हैं। राज्य में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए 12 से 14 अक्टूबर तक इन्वेस्टर्स समिट होगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक सरकार को इसके लिए दो तरह से कदम उठाना होगा। पहला- कंपनियों को आकर्षित करना। दूसरा- आतंकवाद से प्रभावित अतिसंवेदनशील जिलों पर फोकस कर राज्य के हिंसाग्रस्त होने की धारणा बदलना।
इस बारे में बीएसएफ की इंटेलिजेंस विंग के प्रमुख रहे के श्रीनिवासन, सीआरपीएफ के सूत्रों, सेवानिवृत्त बिग्रेडियर अनिल गुप्ता, रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल (रिटायर्ड) जी डी बख्शी और राज्य के उद्योग और वाणिज्य विभाग के संयुक्त निदेशक संदेश कुमार शर्मा से बातचीत की।
सर्विस और सीमेंट इंडस्ट्री पर फोकस
जम्मू और कश्मीर में निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य का उद्योग और वाणिज्य विभाग कई कंपनियों से संपर्क कर रहा है। इनमें आईटीसी, टाटा ग्रुप, सुजलॉन एनर्जी, महिंद्रा एग्रोटेक, अल्ट्राटेक सीमेंट और रेडिसन होटल्स जैसे नाम शामिल हैं।
राज्य के उद्योग और वाणिज्य विभाग के संयुक्त निदेशक संदेश कुमार शर्मा ने बताया कि अक्टूबर में होने वाली इन्वेस्टर्स समिट में देश के ज्यादातर औद्योगिक समूहों से संपर्क किया गया है। हम उम्मीद कर रहे है कि यहां पर ज्यादा से ज्यादा इन्वेस्टर्स आएं ताकि जम्मू-कश्मीर का विकास हो सके। जम्मू-कश्मीर में मुख्यत: 2 सेक्टर- सर्विस सेक्टर और सीमेंट इंडस्ट्री में इन्वेस्टमेंट की सबसे ज्यादा उम्मीद की जा रही है। चूंकि यहां टूरिज्म का सबसे बड़ा स्कोप है इसलिए होटल्स के लिए ये बेहतरीन मौका है। सीमेंट से जुड़े रॉ मटेरियल की यहां कमी नहीं है इसलिए सीमेंट इंडस्ट्री के लिए यहां पर काफी संभावनाएं हैं। हम यहां इन्वेस्टर्स को 30% तक सब्सिडी भी दे रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा उद्योग स्थापित हों और जम्मू-कश्मीर में रोजगार बढ़े।
रिटायर्ड ब्रिगेडियर और जम्मू-कश्मीर भाजपा के प्रवक्ता अनिल गुप्ता बताते हैं कि अक्टूबर में जम्मू-कश्मीर में इन्वेस्टर्स समिट है। जल्द ही देश के बड़े उद्योग जम्मू-कश्मीर में निवेश करेंगे। यहां रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसका सीधा फायदा स्थानीय लोगों को होगा। जब घाटी के लोगों के पास काम होगा तो पत्थरबाजी और अलगाववाद जैसी समस्या ही खत्म हो जाएगी।
रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल (रिटायर्ड) जी डी बख्शी बताते हैं कि कश्मीर यानी भारत के स्विट्जरलैंड में आखिर कौन निवेश नहीं करना चाहेगा। वहां नौकरियां आएंगी तो तरक्की भी आएगी। अमन के माहौल में विकास का लाभ सब उठाना चाहेंगे। इससे वहां की आवाम को सबसे ज्यादा फायदा होगा। निवेश कोई मुश्किल काम नहीं है। आप वहां शांति बहाल कर दीजिए तो निवेश आएगा।
-एजेंसियां

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